धार्मिक भावना के अलावा मौसम परिवर्तन के समय व्रत रखना स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभदायक होता है । साल के इस समय जब मौसम का मिजाज सर्द होने लगता है, तब व्रत रखकर अपने शरीर के आंतरिक अंगो को आराम देना अत्यंत लाभदायक होता है । परन्तु व्रत रखने का ये अभिप्राय बिल्कुल नहीं है कि उपवास से हम अपने शरीर को कमजोर कर लें और बीमार हो जाएं । इसलिए जरूरी है कि व्रत के दिनों में सेहतमंद खाद्द पदार्थों का उचित मात्रा में उपयोग किया जाए ।
व्रत के दिनों में शुद्ध देशी घी में बने खाद्द पदार्थों का उपयोग स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभप्रद होता है । हमारे समाज में घी को लेकर विभिन्न तरीके के मिथक व्याप्त हैं । कई बड़ी कम्पनियां अपने उत्पादों को बेचने के लिए देशी घी के बारे में भ्रामक प्रचार करते हुए ये बताते हैं कि देशी घी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, इससे मोटापा, रक्तचाप व हृदय संबंधित रोग होते हैं । परंतु घी एक सुपाच्य सात्विक खाद्द पदार्थ है, जिसका वर्णन आयुर्वेद से लेकर हमारे सभी प्राचीन धर्मग्रंथों में मिलता है । इसलिए व्रत के दिनों में देशी घी का भरपूर प्रयोग करना चाहिए । घी से बने खाद्द पदार्थ पाचन में हल्के तो होते ही हैं साथ ही घी की तासीर गर्म होने के कारण कम खाने पर भी शरीर को भरपूर ऊर्जा प्रदान करते हैं । घी का सुपाच्य होना, मौसम में होने वाले इस बदलाव के समय में अत्यंत लाभदायक होता है । ऐसे समय में जहां वनस्पति तेल में तली भुनी चीजें हमें नुकसान पहुंचाती हैं तो वहीं घी का सुपाच्य होना हमें तले भुने खाद्द पदार्थों को भी आसानी से पचाने में सहायता करता है ।
व्रत के समय में हमें अपने खान पान का अत्यंत सावधानी पूर्वक निरीक्षण करना चाहिए । ऐसे में देशी घी का सेवन अत्यंत लाभ दायक है, लेकिन अक्सर बाजार में हमें अशुद्ध या मिलावटी घी ही प्राप्त होता है । मिलावटी घी हमारे स्वास्थ्य के लिए विष के समान है । शुद्धता का पर्याय बन चुके धौलपुर फ्रेश का घी हमें आज के इस मिलावट के दौर में भी शुद्ध घी का भरोसा दिलाता है । नवरात्रि की पूजा और व्रत दोनों की शुद्धता के लिए शुद्ध देशी घी का प्रयोग अत्यावश्यक है । इसलिए हमें शुद्ध देशी घी का ही सेवन करना चाहिए । नवरात्रि के पावन दिनों में शुद्ध देशी घी का प्रयोग आध्यात्मिक व वैज्ञानिक दोनो तरीकों से अत्यंत लाभदायक है ।
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