पर्यावरण प्रदूषण, कीटनाशकों से दूषित भोजन और यहां तक कि जंक फूड जो तनाव बढ़ाते हैं, उससे शरीर और दिमाग दोनों प्रभावित होते हैं। यह तनाव शरीर में विषैले तत्वों का जमाव बढ़ाता है। इन विषैले तत्वों का भारी मात्रा में एकत्र होना और तनाव का बना रहना ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कहलाता है। वजन बढ़ना भी शरीर में विषैला कचरा जमा होने का संकेत है।
अमूमन खाने की अस्वस्थ व खराब आदत वाले लोग इस समस्या से ज्यादा पीडि़त हैं। ऐसे लोग खाते-पीते ज्यादा हैं। ये लोग जितनी कैलोरी वाला खाना खाते हैं, उसमें से बहुत कम खर्च कर पाते हैं। नतीजतन शरीर कैलोरी ऊर्जा को चर्बी में के रूप में जमाकर मोटापा बढ़ाता है। इसलिए उतना ही खाएं, जितना आप खर्च कर सकते हैं। खानपान की चीजों से जुड़े कैलोरी ज्ञान को बढ़ाएं। साथ में खाने के मामले में खुद पर नियंत्रण करना सीखें। पेट में गैस, अपच, डकारे, जलन, दर्द, उल्टी-दस्त आदि लक्षण बताते हैं कि शरीर में जो कचरा बन रहा है, वह बाहर नहीं निकल रहा है।
आहार और आदतों के कारण कचरे पर कचरा जमा होकर विष बनता जा रहा है और शरीर की सफाई व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। विषैले पदार्थ शरीर की क्रियाओं को अवरोधित करते हैं। बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन के कई तरीके हैं और कोई भी डिटॉक्स प्रोग्राम शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह-मशविरा जरूरी है।
बॉडी को डिटॉक्स करने के लिए ग्रीन टी पीएं
विशेषज्ञ कहते हैं...
डिटॉक्सिफिकेशन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके द्वारा शरीर को अवांछित विषाक्त पदार्थों से छुटकारा मिलता है। इन विषाक्त पदार्थों का कारण पर्यावरण प्रदूषकों या जंक रिफाइंड और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन होता है। वहीं तेल, नमक और चीनी का अत्यधिक सेवन से भी शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियां पैदा होती हैं। यदि बहुत अधिक भोजन या गलत प्रकार के भोजन से आपको पेट भरा-भरा सा लग रहा है, तब भी आपके शरीर को डिटॉक्सिफाई करने की आवश्यकता पड़ती है।
यदि आप कई दवाएं ले रहे हैं, जिनका असर शरीर से पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, तब आपके शरीर को डिटॉक्सिफिकेशन की आवश्यकता पड़ भी सकती है और नहीं भी। शरीर को विषाक्त होने से बचाने के लिए जंक फूड्स और प्रोसेस्ड फूड के सेवन से बचें। नियमित रूप से व्यायाम करें। हफ्ते या 15 दिन में एक बार उपवास करें। नींबू के रस के साथ गर्म पानी के गिलास से दिन की शुरुआत करें। थोड़ा समय प्रकृति और सूरज की रोशनी में बिताएं।
डॉ. हिमांशी शर्मा
सीनियर डाइटीशियन