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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल: विशेषज्ञ से जानिए कोरोना के डेल्टा वेरिएंट्स के लक्षण?

Sat, 05 Jun 2021 06:57 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के लक्षण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
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Medically Reviewed by-
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डॉ गोपाल चावला
छाती रोग विशेषज्ञ
मेट्रो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा


कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने लोगों के मन में एक डर का माहौल बना दिया है। पहली लहर के विपरीत इस बार स्वस्थ लोग भी संक्रमित हो रहे हैं। इतना ही नहीं इस बार लोगों में कई तरह के लक्षण भी देखे गए हैं। खांसी या बुखार के अलावा दूसरी लहर में लोग कई असामान्य और अपेक्षाकृत कहीं अधिक जटिल लक्षणों के शिकार हो रहे हैं। कोरोना संक्रमितों में न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं भी काफी ज्यादा देखने को मिल रही हैं। लोगों के मन में इसको लेकर कई तरह के सवाल हैं जैसे यदि वायरस एक है तो इसके लक्षण लोगों में अलग-अलग कैसे देखे जा रहे है? क्या आने वाली संभावित तीसरी लहर में इसके लक्षणों में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं?
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर शनिवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञ से कोरोना के हल्के और गंभीर लक्षणों में अंतरों के बारे में जानने की कोशिश की। इस दौरान छाती रोग विशेषज्ञ, डॉ गोपाल चावला ने सभी सवालों के जवाब दिए।
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नजर आते हैं भिन्न-भिन्न लक्षण 
डॉ गोपाल बताते हैं कि कोरोना मुख्यरूप से श्वसन से संबंधित वायरस है। हालांकि दूसरी लहर में वायरस के म्यूटेशन और नए स्ट्रेनों के कारण खांसी या बुखार के अलावा लोगों को स्वाद और गंध न आने, पेट की दिक्कत, उल्टी होने और आंखों के आने की भी समस्या देखने को मिली है। कोरोना के कई रोगी ऐसे देखे जा रहे हैं जिनमें बहुत हल्के लक्षण हैं जबकि कुछ में गंभीर लक्षणों का पता चल रहा है। 

वायरस एक पर लक्षण कैसे अलग-अलग?
इस सवाल के जवाब में डॉ गोपाल बताते हैं कि जैसे हर इंसान का फिंगरप्रिंट अलग होता है वैसे ही इम्यून रिस्पांस भी भिन्न हो सकता है। जब वायरस शरीर में जाता है तो यह एसीई2 रिसेप्टर पर अटैक करता है। इसमें सामान्य तौर पर हल्के लक्षण देखने को मिलते हैं। हालांकि इसके बाद जब शरीर उस वायरस पर अटैक करता है तो इम्यून रिस्पांस की वजह से भिन्न-भिन्न लक्षण हो सकते हैं। 
 
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डेल्टा वेरिएंट का शरीर पर असर - फोटो : Social media
डेल्टा वेरियंट्स के क्या लक्षण हो सकते हैं?
डॉ गोपाल बताते हैं कि डेल्टा वेरियंट (बी.1.617.2) में पेट से संबंधित लक्षण जैसे पेट में दर्द, या पेट खराब होने के साथ उल्टी होना, आंख आने जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। इसके अलावा यह वेरियंट अधिक संक्रामक है। इसकी संक्रामकता 70 फीसदी के करीब की हो सकती है। इसके अलावा डेल्टा वेरियंट वाले रोगियों में गंभीर बीमारी देखने को मिली है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि 15 अप्रैल से 5 मई तक संक्रमण का जो कहर देखा गया है वह इस डेल्टा वेरियंट के कारण ही था ।

क्या कोरोना के हल्के लक्षण भी एंटीबॉडी बना सकते हैं?
डॉ गोपाल बताते हैं कि कोरोना के हल्के लक्षण हों या गंभीर, शरीर वायरस के खिलाफ प्रतिक्रिया करती है तो एंटीबॉडीज भी बनती हैं। यह एंटीबॉडीज कितने दिनों तक शरीर में बनी रहती हैं इस बारे में तमाम अध्ययनों के अलग-अलग मत हैं। कुछ कहते हैं कि यह एंटीबॉडी 3 से 4 महीने तक बनी रहती है जबकि कुछ कहते हैं कि यह 6 महीने से भी अधिक समय कर शरीर की रक्षा कर सकती है।

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नोट: यह लेख मेट्रो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा में छाती रोग विशेषज्ञ डॉ गोपाल चावला से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ गोपाल को कोरोना मरीजों के इलाज करने का अनुभव है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

 
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