कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर रहें सावधान
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गर्भवती महिलाओं के लिए दिक्कतें बढ़ा सकता है कोरोना
कोरोना का संक्रमण हमारे शरीर को किस प्रकार से प्रभावित कर सकता है? इसे समझने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने हाल ही में किए एक अध्ययन में ऐसी जानकारियां साझा की हैं, जो निश्चित ही डराने वाली हो सकती हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि कोरोनावायरस अब भले ही कम गंभीरता वाला हो गया है पर कुछ लोगों के लिए अब भी ये खतरनाक ही है। खासकर बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए।
वैज्ञानिकों की टीम ने गर्भवती महिलाओं को संक्रमण से विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है।
(कोरोना होने का खतरा किसे सबसे ज्यादा?)
गर्भावस्था में कोरोना का संक्रमण
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गर्भावस्था और कोविड का खतरा
हाल ही में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि गर्भावस्था से पहले या उसके दौरान अगर कोविड का संक्रमण हो जाता है तो गर्भावस्था के 20वें सप्ताह से पहले गर्भपात होने की आशंका दो से तीन गुना अधिक हो सकती है। अध्ययन में लगभग 27,000 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया था। 2019 से 2023 तक कोविड और गर्भपात के बीच संबंध निर्धारित करने के लिए इन महिलाओं के डेटा का इस्तेमाल किया गया।
गर्भावस्था में कोरोना होने से क्या होता है?
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संक्रमण बढ़ा सकता है गर्भपात का जोखिम
अमेरिका के ह्यूस्टन में महामारी विज्ञानी डॉ मीकाएला सैंडोवाल कहती हैं, अध्ययन से पता चला है कि गर्भावस्था में कोरोना का संक्रमण गर्भपात के खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है।
"हमारे मॉडल में, जिन महिलाओं को गर्भवती होने से पहले मध्यम से गंभीर कोविड-19 हुआ था, उनमें गर्भपात का खतरा 2.81 गुना अधिक था। इसके अलावा, जिन गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था की शुरुआत में मध्यम से गंभीर कोविड-19 हुआ था, उनमें गर्भपात की आशंका 2.45 गुना अधिक थी।
गर्भावस्था में संक्रमण से बचाव के उपाय जरूरी
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क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
मार्च ऑफ डाइम्स में अंतरिम मुख्य चिकित्सा अधिकारी अमांडा पी. विलियम्स कहती हैं, कोविड-19 रोग शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करता है, खास तौर पर गर्भावस्था के शुरुआती दौर में, जब बच्चा विकसित हो रहा होता है।
गर्भावस्था के दौरान महिलाएं कोविड-19 जैसे वायरस के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती हैं, क्योंकि इस दौरान प्रतिरक्षा प्रणाली में भी बदलाव हो रहा होता है। डॉ. विलियम्स कहती हैं कि गर्भावस्था के दौरान संक्रमित होने पर प्रतिरक्षा प्रणाली का इंफ्लेमेटरी रिसपॉन्स अधिक होता है जो बढ़ते प्लेसेंटा और भ्रूण पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
अधिक गंभीर मामलों में, संक्रमण प्लेसेंटा के क्रियाविधि को बाधित कर सकता है या भ्रूण को ऑक्सीजन की आपूर्ति भी सीमित हो सकती है। इस तरह से अध्ययन स्पष्ट करता है कि कोविड-19 मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि बुजुर्गों के साथ गर्भवती महिलाओं को भी संक्रमण से बचाव को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
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स्रोत
Spontaneous first trimester miscarriage rates per woman among parous women with 1 or more pregnancies of 24 weeks or more
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