फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Covid-19: कोरोना का बढ़ता खतरा, गर्भावस्था में संक्रमण होना कितना खतरनाक? अध्ययन में सामने आई चौंकाने वाली बात

Sun, 01 Jun 2025 05:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Coronavirus Risk: भारत में पिछले 15-20 दिनों में संक्रमण की स्थिति में जिस तरह से बदलाव आया है वह डराने वाला है। वैज्ञानिकों की टीम ने गर्भवती महिलाओं को संक्रमण से बचाव को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है।
विज्ञापन
कोरोना संक्रमण और खतरा - फोटो : Freepik.com
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Covid-19 Study: कोरोनावायरस का संक्रमण एक बार फिर से दुनियाभर के लिए चिंता बढ़ाता जा रहा है। संक्रमण की रफ्तार जो करीब एक साल से काफी स्थिर देखी जा रही थी, उसके बढ़ते मामले फिर से डराने लगे हैं। भारत में भी पिछले कुछ 15-20 दिनों में संक्रमण की स्थिति में जिस तरह से बदलाव आया है वह सोचने पर मजबूर कर रहा है।

विज्ञापन


22 मई के बाद से यहां कोरोना के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। 10 दिनों के भीतर ही संक्रमण में 10 गुना से अधिक का उछाल दर्ज किया गया। मई के अंतिम दिन 31 मई को देश में कुल एक्टिव मामले 3395 थे। 

वैसे तो जो वैरिएंट भारत में बढ़ रहा है उसे अध्ययनों में ज्यादा गंभीर प्रवृत्ति वाला नहीं पाया गया है। हालांकि इसमें देखे गए अतिरिक्त म्यूटेशन इसे शरीर की प्रतिरक्षा को चकमा देकर लोगों को तेजी से संक्रमित करने के योग्य जरूर बनाते हैं। 
विज्ञापन


स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना से बचाव के उपाय सभी लोगों के लिए जरूरी हैं, क्योंकि ये वायरस किसी आबादी में फैलने के बाद वहां के लोगों को काफी तेजी से संक्रमित करने वाला हो सकता है। इस प्रकार संक्रमण बढ़ने का असर उन लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है जिनकी इम्युनिटी कमजोर है, 65 साल से अधिक उम्र के हैं, पहले से कोमोरबिडिटी का शिकार हैं या फिर गर्भवती हैं।


(ये भी पढ़िए-  महीनों से शांत कोरोना अचानक कैसे बढ़ने लगा? जीन वैज्ञानिक ने सरल भाषा में समझाया इसका पूरा गुणा-गणित)

कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर रहें सावधान - फोटो : Freepik.com

गर्भवती महिलाओं के लिए दिक्कतें बढ़ा सकता है कोरोना

कोरोना का संक्रमण हमारे शरीर को किस प्रकार से प्रभावित कर सकता है? इसे समझने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने हाल ही में किए एक अध्ययन में ऐसी जानकारियां साझा की हैं, जो निश्चित ही डराने वाली हो सकती हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि कोरोनावायरस अब भले ही कम गंभीरता वाला हो गया है पर कुछ लोगों के लिए अब भी ये खतरनाक ही है। खासकर बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए। 




वैज्ञानिकों की टीम ने गर्भवती महिलाओं को संक्रमण से विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है।

(कोरोना होने का खतरा किसे सबसे ज्यादा?)

गर्भावस्था में कोरोना का संक्रमण - फोटो : Freepik.com
गर्भावस्था और कोविड का खतरा

हाल ही में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि गर्भावस्था से पहले या उसके दौरान अगर कोविड का संक्रमण हो जाता है तो गर्भावस्था के 20वें सप्ताह से पहले गर्भपात होने की आशंका दो से तीन गुना अधिक हो सकती है। अध्ययन में लगभग 27,000 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया था। 2019 से 2023 तक कोविड और गर्भपात के बीच संबंध निर्धारित करने के लिए इन महिलाओं के डेटा का इस्तेमाल किया गया। 

गर्भावस्था में कोरोना होने से क्या होता है? - फोटो : Freepik.com
संक्रमण बढ़ा सकता है गर्भपात का जोखिम

अमेरिका के ह्यूस्टन में महामारी विज्ञानी डॉ मीकाएला सैंडोवाल कहती हैं, अध्ययन से पता चला है कि गर्भावस्था में कोरोना का संक्रमण गर्भपात के खतरे को बढ़ाने वाला हो सकता है। 

"हमारे मॉडल में, जिन महिलाओं को गर्भवती होने से पहले मध्यम से गंभीर कोविड-19 हुआ था, उनमें गर्भपात का खतरा 2.81 गुना अधिक था। इसके अलावा, जिन गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था की शुरुआत में मध्यम से गंभीर कोविड-19 हुआ था, उनमें गर्भपात की आशंका 2.45 गुना अधिक थी। 
विज्ञापन

गर्भावस्था में संक्रमण से बचाव के उपाय जरूरी - फोटो : Freepik.com
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?

मार्च ऑफ डाइम्स में अंतरिम मुख्य चिकित्सा अधिकारी अमांडा पी. विलियम्स कहती हैं, कोविड-19 रोग शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करता है, खास तौर पर गर्भावस्था के शुरुआती दौर में, जब बच्चा विकसित हो रहा होता है।

गर्भावस्था के दौरान महिलाएं कोविड-19 जैसे वायरस के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती हैं, क्योंकि इस दौरान प्रतिरक्षा प्रणाली में भी बदलाव हो रहा होता है। डॉ. विलियम्स कहती हैं कि गर्भावस्था के दौरान संक्रमित होने पर प्रतिरक्षा प्रणाली का इंफ्लेमेटरी रिसपॉन्स अधिक होता है जो बढ़ते प्लेसेंटा और भ्रूण पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

अधिक गंभीर मामलों में, संक्रमण प्लेसेंटा के क्रियाविधि को बाधित कर सकता है या भ्रूण को ऑक्सीजन की आपूर्ति भी सीमित हो सकती है। इस तरह से अध्ययन स्पष्ट करता है  कि कोविड-19 मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि बुजुर्गों के साथ गर्भवती महिलाओं को भी संक्रमण से बचाव को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।


------------
स्रोत
Spontaneous first trimester miscarriage rates per woman among parous women with 1 or more pregnancies of 24 weeks or more


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें