कोविड के अपडेट्स जानिए
देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रहे कोरोना के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं।
- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के गोदावरी हॉस्टल में कोरोना का एक मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने एडवाइजरी जारी कर दी है। इसमें कैंपस परिसर में संक्रमण फैलने से रोकने को निर्देश दिए गए है। स्कूलों/विशेष केंद्रों में कोविड निगरानी समिति के गठन का परामर्श जारी किया गया है।
- जम्मू-कश्मीर में कोरोना के सात नए मामलों के बाद अस्पतालों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों में ऑक्सीजन और दूसरी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि अभी तक सरकार की ओर से कोई एडवाइजरी जारी नहीं की गई है, हालांकि एहतियात के तौर पर अस्पतालों में तैयारियां पूरी करने को कहा गया है।
- दिल्ली में एक जनवरी से अभी तक कोरोना के 436 मरीजों की पुष्टि हुई। इनमें से 357 मरीजों को अस्पतालों से छुट्टी दी जा चुकी है। दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कोरोना के इलाज के लिए अस्पतालों में पर्याप्त व्यवस्था की गई है, साथ ही निजी अस्पतालों का भी सहयोग लिया गया है। मरीजों को फिलहाल डरने की जरूरत नहीं है। पिछले 24 घंटे में यहां 47 नए केस सामने आए हैं।
कोरोना के मामलों को लेकर बरतें सावधानी
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कोरोना को लेकर शोध (सांकेतिक)
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अपशिष्ट जल में मिला कोरोनावायरस
कोरोना मुख्यरूप से श्वसनवायरस है जो संक्रमित व्यक्ति के छींकने-खांसने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के माध्यम से फैलता है। हालांकि कई स्थानों पर अपशिष्ट जल में भी कोरोनावायरस के वायरल लोड में वृद्धि देखी गई है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है।
बेंगलुरु स्थित टाटा इंस्टीट्यूट फॉर जेनेटिक्स एंड सोसाइटी (टीआईजीएस) की एक रिपोर्ट के मुताबिक अपशिष्ट जल निगरानी डेटा से पता चलता है कि पिछले दो हफ्तों में इसमें कोविड-19 वायरल लोड में काफी वृद्धि हुई है, ये पिछले सप्ताह की तुलना में अधिक थी। कोविड-19 के मामलों के सामने आने के कुछ दिन पहले से ही अपशिष्ट जल में वायरल लोड में वृद्धि देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञओं ने कहा कि , "अपशिष्ट जल में वायरल लोड की वृद्धि एक साइलेंट वेब का स्पष्ट संकेत हो सकती है।
सीवेज के सैंपल में कोरोनावायरस
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
बेंगलुरु में टीआईजीएस द्वारा नियमित रूप से लगभग एक दर्जन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के नमूनों की जांच की जाती है। विशेषज्ञों ने कहा, "सीवेज के सैंपल में वायरल लोड की धीरे-धीरे वृद्धि हो रही है। यह समुदाय में कोविड-19 मामलों में वृद्धि को दर्शाता है।
वैज्ञानिकों का मानना था कि संक्रमित लोगों के माध्यम से वायरस का प्रसार हो सकता है भले ही उनमें लक्षण न हों। जिस पानी का वे उपयोग करते हैं, उसके माध्यम से भी वायरस के संचरण का खतरा रहता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि कोरोनावायरस अपशिष्ट जल में भी लंबे समय तक बना भी रह सकता है।
इससे पहले जनवरी 2024 में अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी हमने अपशिष्ट जल से कोरोना के खतरे को लेकर अलर्ट किया था,
पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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