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Coronavirus Vaccine: कोरोना वैक्सीन को लेकर WHO की नई चेतावनी क्या है? चिंता बढ़ाने वाली है बात

Tue, 01 Sep 2020 01:00 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले दुनियाभर में लगातार बढ़ रहे हैं। जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के मुताबिक, दुनियाभर में अब तक इसके दो करोड़ 52 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं जबकि आठ लाख 47 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई है। अकेले अमेरिका में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 62 लाख से भी अधिक हो गई है, जबकि वहां एक लाख 87 हजार से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। वैसे तो दुनियाभर में वैक्सीन बनाने का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन कई देश ऐसे भी हैं जो ट्रायल पूरा किए बिना ही लोगों को वैक्सीन दे रहे हैं। अमेरिका ने भी कहा है कि वह अंतिम चरण का क्लीनिकल ट्रायल पूरा होने से पहले ही कोरोना की वैक्सीन को मंजूरी देने के लिए तैयार है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसको लेकर सभी देशों को चेताया है और कहा है कि वैक्सीन को मंजूरी देने की प्रक्रिया को 'गंभीरता' से लिए जाने की जरूरत है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
संयुक्त राष्ट्र के स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन ने कहा है कि सभी देश ट्रायल पूरा किए बिना दवाओं को मंजूरी देने का अधिकार रखते हैं, लेकिन यह कोई हल्के में लिया जाने वाला काम नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि दुनियाभर में इस समय 33 वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है जबकि 143 टीके अभी प्री क्लीनिकल स्टेज में हैं।   
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) के शीर्ष डॉक्टर ने हाल ही में कहा है कि वो अंतिम चरण का क्लीनिकल ट्रायल पूरा होने से पहले ही कोरोना की वैक्सीन को मंजूरी देने के लिए तैयार हैं। फाइनेंशियल टाइम्स न्यूजपेपर को दिए एक इंटरव्यू में स्टीफन हैन ने कहा है, अगर अधिकारी मानते हैं कि उस वैक्सीन के खतरे से ज्यादा फायदे हैं तो मैं उस वैक्सीन को पहले ही मंजूरी दिला सकता हूं। हालांकि उन्होंने ये भी कहा है कि एफडीए के 'आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी' देने का मतलब वैक्सीन को पूर्ण मंजूरी देना नहीं है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अमेरिका के शीर्ष वायरस विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फाउची ने भी हाल ही में यह चेतावनी दी थी कि कोरोना वायरस की वैक्सीन के मामले में जल्दबाजी ना करें और पहले पूरी तरह ये साबित हो जाने दें कि वो वैक्सीन सुरक्षित और असरकारी है। डॉ. फाउची ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि ऐसा करने से दूसरी वैक्सीनों के बनाने की कोशिशों को धक्का लग सकता है। इसके अलावा यह निश्चित तौर पर चिंता बढ़ाने वाली बात भी है, क्योंकि हो सकता है कि लोगों पर इसका नकरात्मक प्रभाव भी पड़े। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बिना पर्याप्त इंतजामों के लॉकडाउन हटा रहे देशों को भी चेतावनी दी है। स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि जिन देशों में अभी भी अच्छी खासी संख्या में नए मामले सामने आ रहे हैं, अगर वो लोगों को एक जगह जमा होने की इजाजत देते हैं यह तबाही को बुलावा देने जैसा होगा।   
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन की सर्वे की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसके मुताबिक कोरोना वायरस ने लगभग सभी देशों के हेल्थ सिस्टम ( स्वास्थ्य प्रणाली) को प्रभावित किया है। मार्च से जून के बीच जुटाए गए डाटा के मुताबिक, महामारी की वजह से कैंसर के इलाज जैसे क्रिटिकल केयर पर भी बहुत बुरा असर पड़ा है। खासकर मध्यम और कम आय वाले देशों को इसकी वजह से सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना महामारी के कारण आधे से ज्यादा देशों में गर्भनिरोध और फैमिली प्लानिंग (68 फीसदी), मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का इलाज (61 फीसदी) और कैंसर का इलाज (55 फीसदी) प्रभावित हुआ है। इसके अलावा करीब एक चौथाई देशों में जीवनरक्षक आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
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