प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
दरअसल किसी भी टीके के इस्तेमाल की इजाजत से पहले 'सुरक्षा और बचाव' इन दोनों पैमानों पर उनसे नापना जरूरी होता है। फेज 1 और 2 के ट्रायल में टीका लगने पर लोगों में कोई दिक्कत या कोई साइड इफेक्ट तो नहीं हो रहा, ये पता लगाया जाता है। लेकिन कोरोना से बचाव का यही तरीका सही है- इसका पता लगाने के लिए थोड़ा लंबा वक्त लगता है। भारत में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेज 1 और 2 के ट्रायल रूस में होने के बाद स्पुतनिक-वी के तीसरे चरण का ट्रायल भारत में करने की तैयारी सरकार द्वारा की जा रही है।
इस बारे में शेखर मांडे से सवाल पूछने पर उन्होंने कहा कि ऐसा हो भी सकता है, लेकिन इस बात की उन्हें पुख्ता जानकारी नहीं है। इस बारे में भारत सरकार की संस्था ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ही फैसला ले सकती है। बीबीसी ने डीसीजीआई को भी इस बारे में ई-मेल कर सवाल पूछा है, लेकिन उनका कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यहां ये जानना जरूरी है कि केंद्र सरकार ने वैक्सीन के ट्रायल और किस देश से भारत को वैक्सीन खरीदने की जरूरत है और कब किन परिस्थितियों में भारत वैक्सीन खरीदेगा, इसके लिए एक अलग से कमेटी बनाई है। दुनियाभर के वैक्सीन पर चल रही तमाम कवायद पर उनकी नजर है और भारत में भी तीन वैक्सीन के ट्रायल उन्हीं की निगरानी में हो रहे हैं।