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Coronavirus: च्यवनप्राश से बढ़ती है इम्यूनिटी, कोरोना के ट्रायल में भी मिली सफलता, इसके फायदे कर देंगे हैरान

Mon, 07 Sep 2020 09:32 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना वायरस का इलाज ढूंढने में दुनियाभर के वैज्ञानिक लगे हुए हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और चीन जैसे देशों में जहां एडवांस तकनीक के जरिए वैक्सीन बनाने का काम किया जा रहा है, तो वहीं भारत में इसके साथ-साथ आयुर्वेद का भी सहारा लिया जा रहा है और खुशी की बात ये है कि इसके सकरात्मक परिणाम भी देखने को मिले हैं। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएमयू) में च्यवनप्राश का ट्रायल जून से अगस्त तक हुआ, जिसे आयुर्वेद संस्थान ने तैयार किया है। इस ट्रायल में 100 कर्मचारियों को च्यवनप्राश दी गई और 100 को नहीं दी गई। फिर च्यवनप्राश खाने और नहीं खाने वालों की इम्युनिटी परखी गई, जिसमें सकारात्मक नतीजे देखने को मिले। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रायल में यह पाया गया कि च्यवनप्राश लेने वाले बीमार नहीं हुए। ट्रायल के जांचकर्ता डॉ. एके. सोनकर ने बताया कि परिणाम बेहतर मिले हैं। इनका मूल्यांकन शुरू कर दिया गया है। केजीएमयू की संक्रामक रोग यूनिट के नोडल प्रभारी डॉ. डी. हिमांशु का कहना है कि यह भविष्य के लिए अच्छे संकेत हैं। अब ट्रायल के सभी पहलुओं का मूल्यांकन कर ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को भेजा जाएगा। 
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Coronavirus TIps by Ayush Ministry - फोटो : Twitter@AIR
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने भी कुछ महीने पहले च्यवनप्राश के फायदों के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था, 'च्यवनप्राश का सेवन सर्दी-गर्मी किसी भी मौसम में कर सकते हैं। यह शरीर के लिए फायदेमंद होता है। इसमें आंवला होता है, जो किसी भी मौसम में खाया जा सकता है। च्यवनप्राश सुबह नाश्ते में ले सकते हैं, लेकिन दूध में मिला कर नहीं पीना चाहिए।' उनका कहना था कि जिस राज्य में च्यवनप्राश की बिक्री ज्यादा हुई है, वहां मृत्यु दर कम हुई है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
च्यवनप्राश से क्या फायदा? 

च्यवनप्राश में कुछ ऐसे प्राकृतिक तत्व होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करते हैं। एक अध्ययन में भी यह पाया गया है कि च्यवनप्राश इम्यूनिटी सेल्स की गतिविधि बढ़ा देता है, जिससे संक्रमण की संभावनाएं घट जाती हैं। यह अध्ययन खांसी और सर्दी-जुकाम से पीड़ित कुछ लोगों पर किया गया था। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
च्यवनप्राश में कौन-कौन सी आयुर्वेदिक औषधियां होती हैं? 

च्यवनप्राश में आंवला, ब्राह्मी, बादाम तेल और अश्वगंधा जैसी आयुर्वेदिक औषधियां मिली होती हैं। कहा जाता है कि पहले के समय में कुछ ऐसे च्यवनप्राश होते थे, जिसमें 20 से अधिक जड़ी-बूटियां मिलाई जाती थीं। 
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आंवला (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
आंवले के फायदे 

आंवले को प्राचीन आयुर्वेदिक औषधियों में से एक माना जाता है। भारत में शायद ही ऐसा कोई होगा, जो इसके बारे में न जानता हो। घरेलू नुस्खों में आंवले का उपयोग बहुत ज्यादा किया जाता है, क्योंकि इसमें जीवाणु-रोधी गुण और पोषक तत्व पाए जाते हैं।  आंवले को शरीर में त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) में संतुलन बनाए रखने के लिए जाना जाता है। इसमें डायबिटीज को दूर करने वाले गुण भी होते हैं। इसके अलावा इसे दिमाग के लिए एक टॉनिक भी माना गया है। यह स्मरण शक्ति बढ़ाने और एकाग्रता को सुधारने में मदद करता है। आंवले का सेवन आंखों के लिए भी फायदेमंद है। यह आंखों में जलन और खुजली से राहत प्रदान करता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आंवले के नुकसान

इसके दुष्प्रभाव वैसे तो दुर्लभ हैं, लेकिन ज्यादा मात्रा में आंवले के सेवन से नुकसान भी हो सकते हैं। चूंकि आंवले को शीतल प्रवृति का माना गया है, इसलिए यह सर्दी और खांसी पर बुरा असर डाल सकता है। इसके अलावा पानी के साथ आंवले का सेवन कब्ज की समस्या पैदा कर सकता है। इसका अचार मधुमेह के रोगियों के लिए हानिकारक हो सकता है। 

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ब्राह्मी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
ब्राह्मी के फायदे 

ब्राह्मी भारत की एक प्राचीन जड़ी-बूटी है, जिसे तंत्रिका तंत्र और दिमाग तेज करने वाले औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। ब्राह्मी को तनाव कम करने में सहायक माना जाता है। इसमें डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसे विकारों की शुरुआत को कम करने की क्षमता होती है। नियमित तौर पर इसके इस्तेमाल से प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ब्राह्मी के नुकसान

वैसे नियमित रूप से 12 हफ्तों से अधिक इसका उपयोग ठीक नहीं माना जाता है। जिन लोगों का पेट संवेदनशील है या जिन्हें अल्सर की समस्या है, उनके लिए यह नुकसानदायक भी हो सकता है। इसके अलावा इसका अधिक सेवन मूत्र मार्ग में संक्रमण, कम हृदय गति और दमा जैसी परेशानियां भी ला सकता है। इसलिए ब्राह्मी के सेवन जरूरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए या हो सके तो इसके लिए किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह ले सकते हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
बादाम तेल के फायदे 

बादाम के तेल के कई फायदे होते हैं। इसमें विटामिन ए, बी और ई मौजूद होता है। बादाम तेल को दूध में डालकर पीने से दिमाग की कार्य क्षमता में वृद्धि होती है। इससे शरीर में ताकत आती है। यह कमजोर हृदय और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इससे दिल के दौरे या हार्ट स्ट्रोक का खतरा बहुत कम हो जाता है। यह कब्ज और सिरदर्द में भी फायदेमंद हो सकता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pexels.com
बादाम तेल के नुकसान 

बादाम के तेल के जितने फायदे हैं, उतने ही नुकसान भी हैं। अनियमित रूप से इसका सेवन करने से वजन बढ़ सकता है, क्योंकि इसमें फैट होता है। अधिक मात्रा में इसका सेवन कोलेस्ट्रॉल का लेवल भी बढ़ा सकता है। कभी-कभी इससे एलर्जी भी हो जाती है। हालांकि इसके मामले लगभग न के बराबर ही देखने को मिलते हैं। 

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अश्वगंधा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
अश्वगंधा के फायदे 

सदियों से कई रोगों के इलाज में अश्वगंधा का उपयोग किया जाता रहा है। तनाव से संबंधित लक्षणों और चिंता विकारों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियों में इसका नाम भी शामिल है। इसलिए इसे तनावरोधी जड़ी-बूटी के रूप में जाना जाता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अश्वगंधा के नुकसान 

गर्भवती महिलाओं को अश्वगंधा का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसमें गर्भ गिराने वाले गुण मौजूद होते हैं। डॉक्टर भी सावधानी से इसका उपयोग करने की सलाह देते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो मधुमेह, उच्च रक्तचाप, चिंता, अवसाद और अनिद्रा जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं। अधिक मात्रा में इसके सेवन से उल्टी, दस्त, पेट की खराबी और मतली जैसे दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। 
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