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Coronavirus Vaccine: क्या भारत के लोग खरीद पाएंगे कोरोना वैक्सीन, कितनी होगी कीमत? जानें सबकुछ

Sun, 06 Sep 2020 01:34 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus vaccine price in India - फोटो : Pixabay/Amarujala
कोरोना संक्रमण का सबसे पहला मामला बीते साल दिसंबर में सबसे चीन के वुहान में सामने आया था जिसके बाद इसने तेजी से दुनिया के दूसरे देशों में पैर फैलाना शुरू किया। दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले अब दो करोड़ 66 लाख से अधिक हो चुके हैं और इस वायरस से मरने वालों की संख्या आठ लाख 75 हजार से अधिक है, लेकिन अब तक इससे निपटने के लिए कोई कारगर वैक्सीन नहीं बन पाई है। 

इसी साल 11 अगस्त को रूस ने कोविड-19 की पहली वैक्सीन को रजिस्टर किया और इसे स्पुतनिक V नाम दिया। रूस का कहना है कि उसने मेडिकल साइंस में एक बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है, लेकिन आलोचकों का दावा है कि यह वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल के तीसरे चरण से नहीं गुजरी है और इस कारण ये यकीन नहीं किया जा सकता कि वैक्सीन कामयाब होगी। लेकिन दुनियाभर के कई देशों में कोरोना वैक्सीन बनाने की कोशिशें हो रही हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 34 कंपनियां कोरोना वैक्सीन बना रही हैं और इनमें से सात के तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल जारी हैं। वहीं तीन कंपनियों की वैक्सीन दूसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल तक पहुंची हैं। संगठन के अनुसार, और 142 कंपनियां भी वैक्सीन बना रही हैं और अब तक प्री-क्लीनिकल स्तर पर पहुंच पाई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन के अनुसार, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की बनाई वैक्सीन जिसे एस्ट्राजेनेका बड़े पैमाने पर बना रही है, वो अब तक की सबसे उन्नत वैक्सीन है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बीबीसी स्वास्थ्य और विज्ञान संवाददाता जेम्स गैलाघर कहते हैं कि जानकारों के अनुसार, कोरोना वायरस की वैक्सीन लोगों के लिए 2021 के मध्य तक उपलब्ध होगी। हालांकि, जेम्स ये भी कहते हैं कि कोरोना वायरस परिवार के चार वायरस पहले से ही इंसानों के बीच मौजूद हैं और इनसे बचाव के लिए अब तक कोई वैक्सीन नहीं बन पाई है। लेकिन कोरोना वैक्सीन बनने की खबरों के बीच वैज्ञानिकों समेत आम लोगों को उम्मीद है कि वैक्सीन कुछ महीनों में आ जाएगी। लेकिन उन्हें अब फिक्र है इसकी कीमत की। वहीं वैज्ञानिकों को फिलहाल चिंता है कि कोरोना वायरस को दूर रखने के लिए वैक्सीन कितनी बार लगानी होगी।  

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वैक्सीन की कीमत के बारे में अब तक जो पता है

एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन बना रही कंपनी एस्ट्राजेनेका ने कहा है कि वो कम कीमत पर लोगों को कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराएगी और उसकी कोशिश होगी कि वो इससे लाभ न कमाए। बीते महीने मेक्सिको में कंपनी के प्रमुख ने कहा था कि लातिन अमेरिका में वैक्सीन की कीमत 4 डॉलर प्रति डोज से कम होगी। भारत में इस वैक्सीन को बड़े पैमाने पर बना रहे सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा है कि भारत और विकासशील देशों के लिए इस वैक्सीन की कीमत तीन डॉलर यानी 220 रुपये के करीब होगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वहीं, इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि यूरोप में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन की कीमत 2.5 यूरो तक हो सकती है। अगस्त में कोरोना वैक्सीन के लिए ऑस्ट्रेलिया ने भी एस्ट्राजेनेका के साथ करार किया है। देश के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन का कहना है कि वो अपने सभी नागरिकों को कोरोना की वैक्सीन मुफ्त में देंगे। इसके लिए सरकार क्या कीमत चुकाएगी इस पर अब तक कुछ कहा नहीं गया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सनोफी पाश्चर की वैक्सीन

फ्रांस में सनोफी के प्रमुख ओलिवियर बोगिलोट ने शनिवार को कहा कि उसकी भविष्य की कोविड-19 वैक्सीन की कीमत 10 यूरो प्रति डोज (करीब 900 रुपये) से कम हो सकती है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, बोगिलोट ने फ्रांस इंटर रेडियो से कहा, 'कीमत पूरी तरह से निर्धारित नहीं है। हम आने वाले महीनों में उत्पादन पर होने वाली लागत का आकलन कर रहे हैं। हमारी वैक्सीन की कीमत 10 यूरो से कम होगी।'

दुनियाभर के दवा निर्माता और सरकारी एजेंसियां महामारी से लड़ने और वैक्सीन विकसित करने की रेस में दौड़ रही हैं। सनोफी की प्रतिद्वंद्वी एस्ट्राजेनेका की डोज की कीमत कम होने के बारे में बोगिलोट का कहना है कि 'कीमतों में अंतर कीवजह ये हो सकती है कि हम अपने आंतरिक संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं। अपने खुद के शोधकर्ताओं और अनुसंधान केंद्रों का उपयोग करते हैं। एस्ट्राजेनेका अपने प्रोडक्शन को आउटसोर्स करता है।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
चीनी कंपनी साइनोफार्म की वैक्सीन

चीनी दवा कंपनी साइनोफार्म के चेयरमैन लिऊ जिंन्गजेन ने बीते महीने कहा था कंपनी जो वैक्सीन बनी रही है, उसका तीसरे चरण का क्लीनिकल ट्रायल पूरा हो गया है। उन्होंने कहा था कि एक बार बाजार में वैक्सीन उतारी जाएगी तो इसके दो डोज की कीमत 1000 चीनी युआन (दस हजार रुपये) से कम होगी। हालांकि, जानकारों का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मियों और छात्रों को वैक्सीन की डोज मुफ्त में दी जानी चाहिए। 

चीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, अगर इस वैक्सीन को राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में शामिल किया गया तो जिन लोगों के नाम इस अभियान से जुड़े हैं, उन्हें यह वैक्सीन सरकारी खर्च पर मिल सकेगी। फिलहाल कंपनी के चेयरमैन लिऊ ने इस वैक्सीन के दो डोज लिए हैं और उनका कहना है कि इस वैक्सीन के कोई 'साइडइफेक्ट नहीं है।' 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मॉडर्ना की वैक्सीन

अगस्त में मॉडर्ना ने कहा था कि कोरोना महामारी के मद्देनजर कुछ उपभोक्ताओं को वो वैक्सीन 33 से 37 डॉलर (लगभग 2,500 रुपये) तक की कम कीमत में उपलब्ध कराएगी। कैम्ब्रिज में मौजूद इस कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीफन बान्सेल ने कहा था कि महामारी के दौरान वैक्सीन की कीमत जितनी हो सकेगी, उतनी कम रखी जाएगी। उन्होंने कहा, 'कंपनी मानती हैं कि महामारी के मुश्किल दौर में सभी को वैक्सीन मिलनी चाहिए और इसके लिए कीमत आड़े नहीं आनी चाहिए।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
फाइजर की वैक्सीन

इस साल जुलाई में अमरेकी सरकार ने कोरोना वैक्सीन के लिए फाइजर और बायोएनटेक कंपनी के साथ 1.97 अरब डॉलर का करार किया था। फायर्सफार्मा में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, एसवीबी लीरिंक के विश्लेषक ज्योफ्री पोर्जेस के मुताबिक, फाइजर और बायोएनटेक का कहना था कि वो अपनी एमआरएनए आधारित कोरोना वैक्सीन अमेरिकी सरकार को 19.50 डॉलर प्रति डोज (1,500 रुपये) के हिसाब से बेचने वाले हैं, जिसमें उन्हें 60 से 80 फीसदी तक का लाभ हो सकता है। 

व्यक्ति को इस वैक्सीन के दो शुरुआती डोज और एक बूस्टर डोज की जरूरत होगी और इसके लिए आम व्यक्ति को 40 डॉलर (करीब 2,900 रुपये) तक देने पड़ सकते हैं। वहीं टीकाकरण कार्यक्रम के तहत इसकी कीमत करीब 20 डॉलर (करीब 1450 रुपये) तक हो सकती है। 
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