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कोरोना की वैक्सीन सबसे पहले किनको मिलेगी?

Mon, 29 Jun 2020 02:13 PM IST
योगेश जोशी बीबीसी हिंदी
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120 मेडिकल टीम दुनिया भर के अलग-अलग हिस्सों में रिसर्च में जुटी हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला

पिछले साल चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना वायरस कोविड-19 अब तक दुनिया के 188 देशों में फैल चुका है। इस बीमारी के चपेट में अब तक करीब एक करोड़ लोग आ चुके हैं, जबकि करीब पांच लाख लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन अब तक इस महामारी की रोकथाम के लिए कोई वैक्सीन नहीं बन पाई है।

हालांकि कोविड-19 पर काबू पाने के लिए वैक्सीन बनाने के लिए मौजूदा समय में 120 मेडिकल टीमें दुनियाभर के अलग-अलग हिस्सों में रिसर्च में जुटी हैं, लेकिन अभी तक इस दिशा में उल्लेखनीय कामयाबी नहीं मिली है।

मोटे तौर पर अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर जल्दी से वैक्सीन मिली भी तो भी इस साल के अंत तक ही मिल पाएगी। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख कई बार वैक्सीन बनाए जाने को लेकर नाउम्मीदी भी जाहिर कर चुके हैं।

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वैक्सीन कोरोना वायरस की चपेट में आने से बचा सकती है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

कोरोना वायरस की वैक्सीन इतनी अहम क्यों है?

  • आशंका यह है कि दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा कोरोना वायरस की चपेट में आ सकता है। ऐसे में वैक्सीन इन लोगों को कोरोना वायरस की चपेट में आने से बचा सकती है। कोरोना वायरस की वैक्सीन बन जाने से महामारी एक झटके में खत्म तो नहीं होगी, लेकिन तब लॉकडाउन का हटाया जाना खतरनाक नहीं होगा और सोशल डिस्टेंसिंग के प्रावधानों में ढिलाई मिलेगी।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत कई देशों में डॉक्टर इससे निपटने के लिए वैक्सीन बनाने में जुटे हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
  • वैक्सीन बनाने को लेकर अब तक कितनी प्रगति हुई है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना वायरस के पहले मामले की पुष्टि 31 दिसंबर 2019 को हुई थी। जिस तेजी से वायरस फैला उसे देखते हुए 30 जनवरी 2020 को इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया गया, लेकिन शुरुआती वक्त में इस वायरस के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी और इस कारण इसका इलाज भी जल्द नहीं मिल पाया। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत कई देशों में डॉक्टर इससे निपटने के लिए वैक्सीन बनाने में जुटे हैं लेकिन सवाल यही है कि आखिर इसके तैयार होने में कितना वक्त लगेगा?

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दुनिया भर में 120 जगहों पर कोरोना की वैक्सीन बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

फिलहाल दुनिया भर में 120 जगहों पर कोरोना की वैक्सीन बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इनमें 13 जगहों पर मामला क्लीनिकल ट्रॉयल तक पहुंचा है। इन तेरह जगहों में पांच चीन, तीन अमरीका और दो ब्रिटेन में हैं। जबकि ऑस्ट्रेलिया, रूस और जर्मनी में एक-एक जगहों पर ट्रॉयल चल रहा है।

ब्रिटेन में कोरोना वैक्सीन का इंसानों पर परीक्षण करने की तैयारी शुरू हो गई है। लंदन के इंपीरियल कॉलेज में 300 लोगों पर यह ट्रॉयल किया जाएगा। इंपीरियल कॉलेज लंदन में होने वाले इस ट्रायल का नेतृत्व प्रोफेसर रॉबिन शटोक कर रहे हैं। कहा गया है कि इस वैक्सीन का जानवरों पर किया ट्रॉयल सफल रहा है और यह इससे इम्यूनिटी को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

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ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी में भी 800 लोगों पर ट्रायल शुरु किया जा रहा है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

कोविड-19 को लेकर पहले ह्यूमन ट्रायल में आठ मरीजों के शरीर में एंटीबॉडीज का इस्तेमाल किया गया। ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी में भी 800 लोगों पर ट्रायल शुरु किया जा रहा है। इसके अलावा अस्ट्राजेनेका कंपनी से भी 10 करोड़ वैक्सीन डोज की डील भी की गई है।

इसके अलावा शीर्ष दवा कंपनियां सनफई और जीएसके ने भी वैक्सीन विकसित करने के लिए आपस में तालमेल किया है। ऑस्ट्रेलिया में भी दो संभावित वैक्सीन का नेवलों पर प्रयोग शुरू हुआ है। माना जा रहा है कि इसका इंसानों पर ट्रायल अगले साल तक शुरू हो पाएगा।

लेकिन कोई यह नहीं जानता है कि इनमें से कौन सी कोशिश कारगर होगी।

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किसी भी बीमारी की वैक्सीन विकसित करने में सालों का वक्त लगता है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

किसी भी बीमारी की वैक्सीन विकसित करने में सालों का वक्त लगता है। कई बार दशकों का समय लगता है, लेकिन दुनिया भर के रिसर्चरों को उम्मीद है कि वे कुछ ही महीनों में उतना काम कर लेंगे, जिससे कोविड-19 की वैक्सीन विकसित हो जाएगी।

कोरोना वायरस कोविड 19 को लेकर बेहद तेज गति से काम चल रहा है और टीका बनाने के लिए भी अलग-अलग रास्ते अपनाए जा रहे हैं। ज्यादातर एक्सपर्ट की राय में 2021 के मध्य तक कोविड-19 की वैक्सीन बन जाएगी यानी कोविड-19 वायरस का पता चलने के बाद वैक्सीन विकसित होने में लगने वाला समय 18 महीने माना जा रहा है।

अगर ऐसा हुआ तो यह एक बहुत बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि होगी, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वैक्सीन पूरी तरह कामयाब ही होगी। 

अब तक चार तरह के कोरोना वायरस पाए गए हैं जो इंसानों में संक्रमण कर सकते हैं। इन वायरस के कारण सर्दी-खांसी जैसे लक्षण दिखते हैं और इनके लिए अब तक कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।

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कोविड-19 की वैक्सीन को तैयार करने की तमाम कोशिशें चल रही हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
  • अभी कितना कुछ करना बाकी है?

कोविड-19 की वैक्सीन को तैयार करने की तमाम कोशिशें चल रही हैं, लेकिन अभी भी इस दिशा में काफी कुछ किए जाने की जरूरत है। वैक्सीन तैयार होने के बाद पहला काम इसका पता लगाना होगा कि यह कितनी सुरक्षित है।अगर यह बीमारी से कहीं ज्यादा मुश्किलें पैदा करने वाली हुईं तो वैक्सीन का कोई फायदा नहीं होगा।

क्लीनिकल ट्रायल में यह देखा जाना होता है कि वैक्सीन कोविड-19 को लेकर प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर पा रही है ताकि वैक्सीन लेने के बाद लोग इसकी चपेट में ना आएं। वैक्सीन तैयार होने के बाद भी इसकी अरबों डोज तैयार करने की जरूरत होगी।

वैक्सीन को दवा नियामक एजेंसियों से भी मंजूरी लेनी होगी। ये सब हो जाए तो भी बड़ी चुनौती बची रहेगी, दुनिया भर के अरबों लोगों तक इसकी खुराक पुहंचाने के लिए लॉजिस्टिक व्यवस्थाएं करने का इंतजाम भी करना होगा.।

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कोविड-19 का कोई इलाज मौजूद नहीं है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay

जाहिर है इन सब प्रक्रियाओं को लॉकडाउन थोड़ा धीमा करेगा। एक दूसरी मुश्किल भी है अगर कोरोना से कम लोग संक्रमित होंगे तो भी इसका पता लगाना मुश्किल होगा कि कौन सी वैक्सीन कारगर है।

वैक्सीन की जांच में तेजी लाने का एक रास्ता है कि पहले लोगों को वैक्सीन दी जाए और उसके बाद इंजेक्शन के जरिए कोविड-19 उनके शरीर में पहुंचाया जाए, लेकिन यह तरीका मौजूदा समय में बेहद खतरनाक है क्योंकि कोविड-19 का कोई इलाज मौजूद नहीं है।

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अगर वैक्सीन कारगर हुई तो इसे दुनिया भर की आबादी को देने की जरूरत होगी- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay

कितने लोगों को वैक्सीन देने की जरूरत होगी?

  • वैक्सीन कितना कारगर है, यह जाने बिना इसका पता नहीं चल पाएगा। हालांकि कोविड-19 संक्रमण को रोकने के लिए यह माना जा रहा है कि 60 से 70 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन देने की जरूरत होगी। हालांकि अगर वैक्सीन कारगर हुई तो इसे दुनिया भर की आबादी को देने की जरूरत होगी।

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वायरस से निपटने के लिए जो टीके बने उनमें असली वायरस का ही इस्तेमाल होता आया है- सांकेतिक तस्वीर
  • कैसे बनती है वैक्सीन?

इंसानी शरीर में खून में व्हाइट ब्लड सेल होते हैं जो उसके रोग प्रतिरोधक तंत्र का हिस्सा होते हैं। बिना शरीर को नुकसान पहुंचाए वैक्सीन के जरिए शरीर में बेहद कम मात्रा में वायरस या बैक्टीरिया डाल दिए जाते हैं। जब शरीर का रक्षा तंत्र इस वायरस या बैक्टीरिया को पहचान लेता है तो शरीर इससे लड़ना सीख जाता है।

इसके बाद अगर इंसान असल में उस वायरस या बैक्टीरिया का सामना करता है तो उसे जानकारी होती है कि वो संक्रमण से कैसे निपटे। दशकों से वायरस से निपटने के लिए जो टीके बने उनमें असली वायरस का ही इस्तेमाल होता आया है।

मीजल्स, मम्प्स और रूबेला (एमएमआर यानी खसरा, कण्ठमाला और रुबेला) टीका बनाने के लिए ऐसे कमजोर वायरस का इस्तेमाल होता है जो संक्रमण नहीं कर सकते। साथ ही फ्लू की वैक्सीन में भी इसके वायरस का ही इस्तेमाल होता है।

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वैक्सीन बनाने वाले कुछ डॉक्टर कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड के कुछ हिस्से लेकर उससे नया वैक्सीन तैयार करने की कोशिश में हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

लेकिन कोरोना वायरस के मामले में फिलहाल जो नई वैक्सीन बनाई जा रही है उसके लिए नए तरीकों का इस्तेमाल हो रहा है और जिनका अभी कम ही परीक्षण हो सका है। नए कोरोना वायरस Sars-CoV-2 का जेनेटिक कोड अब वैज्ञानिकों को पता है और अब हमारे पास वैक्सीन बनाने के लिए एक पूरा ब्लूप्रिंट तैयार है।

वैक्सीन बनाने वाले कुछ डॉक्टर कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड के कुछ हिस्से लेकर उससे नया वैक्सीन तैयार करने की कोशिश में हैं। कई डॉक्टर इस वायरस के मूल जेनेटिक कोड का इस्तेमाल कर रहे हैं जो एक बार शरीर में जाने के बाद वायरल प्रोटीन बनाते हैं ताकि शरीर इस वायरस से लड़ना सीख सके।

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माना जा रहा है कि वैक्सीन का ज्यादा उम्र के लोगों पर कम असर होगा- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
  • क्या सभी उम्र के लोग बच पाएंगे?
माना जा रहा है कि वैक्सीन का ज्यादा उम्र के लोगों पर कम असर होगा, लेकिन इसका कारण वैक्सीन नहीं बल्कि लोगों की रोग प्रतरोधक क्षमता से है क्योंकि उम्र अधिक होने के साथ-साथ व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती जाती है।

हर साल फ्लू के संक्रमण के साथ ये देखने को मिलता है। 

 

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सभी दवाओं के दुष्प्रभाव भी होते हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay

सभी दवाओं के दुष्प्रभाव भी होते हैं। बुखार के लिए आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली पैरासेटामॉल जैसी दवा के भी दुष्प्रभाव होते हैं, लेकिन जब तक किसी वैक्सीन का क्लिनिकल परीक्षण नहीं होता, ये जानना मुश्किल है कि उसका किस तरह से असर पड़ सकता है।

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शुरुआती तौर पर वैक्सीन की लिमिटेड सप्लाई ही होगी- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
  • किको मिलेगी सबसे पहले वैक्सीन?

अगर वैक्सीन विकसित हो जाए तो भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि सबसे पहले वैक्सीन किनको मिलेगी? क्योंकि शुरुआती तौर पर वैक्सीन की लिमिटेड सप्लाई ही होगी। ऐसे वैक्सीन किसको पहले मिलेगी, इसको भी प्रायरटाइज किया जा रहा है।

कोविड-19 मरीजों का इलाज करने वाले स्वास्थ्यकर्मी इस सूची में टॉप पर हैं। कोविड-19 से सबसे ज्यादा खतरा बुज़ुर्गों को होता है, ऐसे में अगर यह बुज़ुर्गों के लिए कारगर होती है तो उन्हें मिलनी चाहिए।

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टीका व्यक्ति को बीमारी से बचाता है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
  • जब तक वैक्सीन नहीं बनती तब तक...

ये बात सच है कि टीका व्यक्ति को बीमारी से बचाता है, लेकिन कोरोना वायरस से बचने का सबसे असरदार उपाय है अच्छी तरह साफ-सफाई रखना। सोशल डिस्टेंसिग के प्रावधानों को पालना करना।

आपको यह भी ध्यान रखना है कि अगर आपको कोरोना वायरस संक्रमण हो भी जाता है तो 75 से 80 प्रतिशत मामलों में यह मामूली संक्रमण की तरह ही होता है।

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