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Sputnik-V: भारत में रूसी वैक्सीन के परीक्षण कार्यक्रम को झटका, बड़े पैमाने पर ट्रायल की मंजूरी नहीं

Thu, 08 Oct 2020 12:40 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Vaccine - फोटो : Twitter@RusEmbUSA
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कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण के बीच सभी को कोरोना की कारगर और सुरक्षित वैक्सीन का इंतजार है। भारत में तीन वैक्सीन इस रेस में आगे चल रहे हैं। वहीं, रूस और चीन ने वैक्सीन तैयार कर उसका पंजीकरण भी करा लिया है। रूस की वैक्सीन Sputnik-V पर दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिकों ने सवाल उठाया था। कारण कि इस वैक्सीन का ट्रायल छोटे समूह पर किया गया था और इसके साइडइफेक्ट भी देखे गए थे। फिलहाल यह वैक्सीन तीसरे चरण के ह्यूमन ट्रायल में है। भारत में भी इसका बड़े पैमाने पर ट्रायल होना था, लेकिन डीसीजीआई यानी ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने फार्मा कंपनी डॉ रेड्डीज की प्रयोगशालाओं में रूस के स्पुतनिक-वी वैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण करने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। कारण कि इस वैक्सीन के शुरुआती परीक्षणों को विदेशी आबादी के एक छोटे समूह पर ही इस्तेमाल करते देखा गया है। भारत की डॉ रेड्डीज लैब ने स्पुतनिक वी वैक्सीन के नैदानिक परीक्षणों के साथ-साथ उसके वितरण के लिए रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (RDIF) के साथ साझेदारी की है।

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉक्टर रेड्डीज लैब के मामले को देखने वाली समिति ने कहा, "विस्तृत विचार-विमर्श के बाद, समिति ने सिफारिश की है कि फर्म को विनियामक आवश्यकताओं का पालन करना चाहिए। साथ ही देश में सेल्स मीडियम इम्यून रेस्पॉन्स यानी कोशिका मध्यस्थता प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के लिए उचित निगरानी के साथ चरण वर्तमान प्रस्ताव का दो तिहाई परीक्षण करना चाहिए।"

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मालूम हो कि रूस ने 12 अगस्त को कोविड-19 की पहली प्रभावी वैक्सीन बनाने का दावा कर दुनिया को चौंका दिया था। हालांकि, कई देशों के वैज्ञानिकों के समूह ने वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई, क्योंकि इसे कुछ समय में ही रोल आउट कर दिया गया था। खबरों के मुताबिक, रूस की राजधानी मॉस्को में टीकाकरण के लिए वैक्सीन की पहली खेप उपलब्ध करा भी दी गई है। 

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने इस संबंध में नोटिस जारी कर कहा है कि विदेश में शुरुआती चरण की क्लिनिकल स्टडी में सुरक्षा और प्रतिरक्षा का डाटा काफी छोटा था। भारतीय प्रतिभागियों पर इस वैक्सीन की प्रभावकारिता का कोई इनपुट उपलब्ध नहीं है। सुरक्षा के नजरिए से इस वैक्सीन के प्रभाव के बारे में डॉक्टर और वैज्ञानिक शुरुआत से ही संशय में हैं। 
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डॉक्टर हर्षवर्धन (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
मालूम हो कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने बीते रविवार को ही संकेत दिया था कि भारत ने भारतीय आबादी के बीच बड़े पैमाने पर वैक्सीन के ट्रायल को अनुमति नहीं दी है। उन्होंने कहा था कि भारत सरकार देशवासियों के हित और सुरक्षा को देखते हुए इस संबंध में कोई निर्णय लेगी।
 
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