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वैक्सीन नहीं बनी तो 2021 में कोरोना का 'हब' बन जाएगा भारत, हर दिन आएंगे 2.87 लाख मामले

Thu, 09 Jul 2020 02:56 PM IST
योगेश जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भविष्य में भारत में कोरोना वायरस के मामलों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोध के अनुसार कोरोना वायरस के मामलों में भविष्य में और भी अधिक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस महामारी का सबसे बुरा दौर अभी आना बाकी है। इस शोध में ये दावा किया जा रहा है कि अगर कोरोना की वैक्सीन या कोई दवाई नहीं बनती है तो भविष्य में भारत में कोरोना वायरस के मामलों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। 

भारत में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या में प्रतिदिन बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। रोजाना हजारों नए मामले सामने आ रहे हैं। भारत विश्व में कोरोना वायरस से सबसे अधिक संक्रमित देशों की सूची में भी तीसरे पायदान पर पहुंच गया है।
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शोध में इस बात का दावा किया जा रहा है कि भारत में 2021 के अंत तक रोजाना 2.87 लाख मामले सामने आएंगे- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
भारत में 2021 के अंत तक रोजाना 2.87 लाख मामले
  • मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोध में इस बात का दावा किया जा रहा है कि भारत में 2021 के अंत तक रोजाना 2.87 लाख मामले सामने आएंगे और भारत दुनिया में कोरोना वायरस से प्रभावित देशों की सूची में पहले पायदान पर पहुंच जाएगा।

 
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शोध के अनुसार प्रतिदिन अमेरिका में  95,400 नए मामले सामने आएंगे- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इन देशों में भी रोजाना आएंगे हजारों नए मामले
  • एक अन्य शोध के अनुसार प्रतिदिन अमेरिका में  95,400, दक्षिण अफ्रीका में 20,600, ईरान में 17,000, इंडोनेशिया में 13,200, ब्रिटेन में 4,200, नाइजीरिया में 4,000 नए मामले सामने आएंगे।

 

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अध्ययन के अनुसार दुनिया के 84 देशों में 2021 के अंत तक 24.9 करोड़ नए मामले आ सकते हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
84 देशों में आएंगे 24.9 करोड़ मामले
  • एक अध्ययन के अनुसार दुनिया के 84 देशों में 2021 के अंत तक 24.9 करोड़ नए मामले आ सकते हैं। कोरोना वायरस से इन देशों में 17.5 लाख लोगों की मौत हो सकती है। शोधकर्ताओं ने बताया कि अगर वैक्सीन नहीं बनी तो कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या में बढ़ोतरी होते रहेगी।

 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोध में सरकार और आम आदमी की इच्छाशक्ति को आधार बनाया गया है
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में कोरोना के संक्रमण का यह आंकड़ा टेस्टिंग पर नहीं, बल्कि संक्रमण को कम करने के लिए सरकार और आम आदमी की इच्छाशक्ति पर आधारित है। इस शोध में शोधकर्ताओं ने सोशल डिस्टेंसिंग के महत्व पर जोर देने की बात की है।  

 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pti
शोधकर्ताओं ने एसईआईआर SEIR (Susceptible, Exposed, Infectious, Recovered) मॉडल का इस्तेमाल किया
  • मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने SEIR (Susceptible, Exposed, Infectious, Recovered) मॉडल की मदद से आंकड़ा जारी किया है। एसईआईआर एक मानक गणितीय मॉडल है, इसका इस्तेमाल महामारी के समय शोधकर्ताओं द्वारा विश्लेषण के लिए किया जाता है।

 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
  • तीन कारकों में किया गया है शोध
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं द्वारा शोध को तीन कारकों में किया गया है।
 
  • पहला- वर्तमान परीक्षण दर और प्रतिक्रिया
  • दूसरा- अगर एक जुलाई से टेस्टिंग में प्रतिदिन 0.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है।
  • तीसरा- यदि टेस्टिंग में कोई बढ़ोतरी नहीं होती है, कोरोना संक्रमित व्यक्ति से संक्रमण फैलने की संभावना आठ प्रतिशत रहती है।
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