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Coronavirus: कोरोना संक्रमित होने पर फेफड़ों पर क्या प्रभाव पड़ता है? जानिए इसके बारे में सबकुछ

Fri, 09 Oct 2020 04:50 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दुनियाभर के 180 से भी ज्यादा देशों में कोरोना का संक्रमण फैल चुका है। इसकी चपेट में आए लोगों की संख्या तीन करोड़ 67 लाख से ज्यादा हो चुकी है जबकि अब तक इस महामारी से 10 लाख 66 हजार से भी अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। पहले ऐसा माना जा रहा था कि कोरोना से ठीक होने के बाद व्यक्ति दोबारा संक्रमित नहीं हो सकता, लेकिन यह संभावना गलत साबित हुई। दुनियाभर में कई लोग कोरोना से दोबारा संक्रमित हुए हैं। इसके अलावा जो लोग ठीक हो गए हैं, उनमें भी कई तरह की परेशानियां सामने आई हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि कोरोना वायरस इंसान के फेफड़ों पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है। आइए जानते हैं इसके गंभीर प्रभावों के बारे में...
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, कोरोना वायरस इंसान के मुंह, नाक और आंखों के जरिए शरीर में प्रवेश करता है और उसके बाद वह फेफड़ों तक भी पहुंच जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर एक बार कोरोना वायरस इंसान के फेफड़ों तक पहुंच जाता है तो वह उसे काफी नुकसान पहुंचाता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोरोना वायरस के कारण फेफड़ों में सफेद दाग पड़ जाते हैं और ऑक्सीजन का प्रवाह भी बाधित हो जाता है। ऐसे में सांस लेने में कठिनाई की वजह से लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कुछ दिनों पहले चीन के वुहान से एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें बताया गया था कि वहां कोरोना से संक्रमित होकर ठीक होने वाले जितने भी मरीज हैं, उनमें से ज्यादातर लोगों के फेफड़ों की हालत बहुत खराब है। बताया गया कि ठीक हो चुके मरीजों में 90 फीसदी के फेफड़े लगभग खराब हो चुके हैं। उनके फेफड़ों का वेंटिलेशन और गैस एक्सचेंज फंक्शन काम नहीं कर रहा है।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हाल ही में किए गए एक शोध के मुताबिक, कोरोना से ठीक हुए लोगों के फेफड़ों को वायरस के कारण स्थायी क्षति भी पहुंच सकती है, लेकिन अब तक हुए रिसर्च में यह पता नहीं चल पाया है कि क्षतिग्रस्त फेफड़ों की हालत कब तक ठीक हो पाती है। ऐसा माना जा रहा है कि इसमें छह महीने से लेकर एक साल तक का भी समय लग सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब कोरोना वायरस इंसान के फेफड़ों तक पहुंचता है तो वह फेफड़ों को छोटे-छोटे एयरसैक यानी वायुकोष बना देता है। इन्हीं वायुकोष में जब पानी जमने लगता है तो सांस लेने में तकलीफ होती है और इंसान लंबी सांस नहीं ले पाता है। ऐसी स्थिति में मरीज को सांस लेने के लिए वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सिगरेट पीने वालों को कोरोना हुआ तो क्या होगा? 

जो लोग सिगरेट पीते हैं, अगर वो कोरोना से संक्रमित हुए तो क्या हो सकता है, इसको लेकर हाल ही में एक शोध हुआ है। इस शोध में खुलासा किया गया था कि इंसान के फेफड़ों को लगातार 25 साल तक सिगरेट पीने से जितना नुकसान नहीं होता, उतना कोरोना वायरस महज एक महीने में नुकसान पहुंचा सकता है। 
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