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क्या सितंबर में खत्म हो जाएगा कोरोना वायरस? जानें ऐसे ही जरूरी सवालों पर विशेषज्ञ की राय

Sat, 22 Aug 2020 11:11 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वैक्सीन का इंतजार भारत समेत पूरी दुनिया को है। रूस के दावे के मुताबिक, उसने तो वैक्सीन बना ली है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत कई देश उसकी वैक्सीन पर संदेह जता रहे हैं। इधर भारत भी वैक्सीन बनाने के करीब पहुंच चुका है। दावा किया जा रहा है कि भारत को इस साल के अंत तक वैक्सीन मिल जाएगी। हालांकि उससे पहले ही सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं कि सितंबर में कोरोना वायरस खत्म हो जाएगा। आइए जानते हैं इस बारे में विशेषज्ञ क्या कहते हैं। 

क्या सितंबर में वायरस खत्म हो जाएगा? 

दिल्ली एम्स के डॉ. नीरज निश्चल इस बारे में कहते हैं, 'सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफॉर्म की खबर पर विश्वास न करें। अगर किसी को कोई भी जानकारी चाहिए तो सरकार की वेबसाइट पर जाएं। एम्स, आईसीएमआर, स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर सही जानकारी उपलब्ध है। आप प्रसार भारती के किसी भी प्लेटफॉर्म पर विश्वसनीय जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। वायरस कब खत्म होगा, इस बारे में अभी किसी ने पुख्ता रूप से कुछ नहीं बताया है।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या वैक्सीन आने के बाद सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी नहीं रहेगी? 
  • डॉ. नीरज निश्चल बताते हैं, 'सभी लोग वैक्सीन का इंतजार कर रहे हैं। अब वैक्सीन आने के बाद ही पता चलेगा कि वो कितनी प्रभावी होगी। ऐसा नहीं है कि वैक्सीन आते ही वायरस खत्म हो जाएगा। वैक्सीन से खुद को बचा सकते हैं, लेकिन वायरस को मार नहीं सकते। वैक्सीन से केवल बीमारी को कंट्रोल कर सकते हैं।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या वायरस से पूरी तरह से ठीक होने में समय लग सकता है? 
  • डॉ. नीरज निश्चल के मुताबिक, 'वायरस से ठीक होने के बाद ही लोगों को अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा रहा है। जो लोग गंभीर रूप से संक्रमित हुए, उनके फेफड़ों में इंफेक्शन हुआ, उन्हें लेकर थोड़ा संदेह है। कई लोगों में ठीक होने के बाद भी कुछ परेशानी सामने आई है। ऐसे लोग पूरी तरह कब तक ठीक होंगे, यह छह महीने या एक साल बाद ही पता चलेगा। इसके अलावा कोविड वार्ड में कई दिन रहने से मानसिक प्रभाव भी पड़ता है, उससे उबरने में भी समय लग सकता है।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
दूसरे देशों की तुलना में हमारे देश में मृत्यु दर कम कैसे है? 
  • डॉ. नीरज निश्चल बताते हैं, 'जब तक वायरस भारत में आया, उससे पहले कई देशों में फैल चुका था। केंद्र सरकार ने जब लॉकडाउन किया, उस बीच हमने बहुत कुछ दूसरे देशों से सीख लिया। जिस तरह की लापरवाही से दूसरे देशों में मृत्यु दर बढ़ी, वैसी गलती हमारे देश ने नहीं की। इसके अलावा जो इम्यूनिटी के बारे में कहा जा रहा है, वो भी एक कारण हो सकता है। हम वायरस को भी अब पहचान गए हैं, ये कैसे रिएक्ट करता है। उसी के आधार पर मरीज को अस्पताल में भर्ती किया जाता है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
आस-पास कोरोना का मरीज होने पर लोग परेशान हो जाते हैं, उनके लिए क्या कहेंगे? 
  • डॉ. नीरज निश्चल के मुताबिक, 'अगर आस-पास कोई कोरोना का मरीज है तो उन्हें अलग-थलग न करें। उनसे बातचीत बंद न करें। पास नहीं जा सकते तो वीडियो कॉल करें। इससे मरीज भी मानसिक तौर पर मजबूत होता है और जल्दी ठीक होता है।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कुछ लोगों ने एंटी मास्क कैंपेन शुरू कर दिया है, उनके लिए क्या कहेंगे? 
  • डॉ. नीरज निश्चल कहते हैं, 'जब से वायरस आया है, तब से देखा जा रहा है कि वायरस से खुद को सुरक्षित रखने में सबसे ज्यादा प्रभावी मास्क ही है। ऐसे में जो लोग एंटी मास्क कैंपेन चला रहे हैं, उन्हें ऐसा लगता है कि मास्क लगाने से दम घुट जाएगा, सांस नहीं ले पाएंगे या फ्रेश ऑक्सीजन नहीं लेने से सेहत खराब हो जाएगी, ये सभी अफवाहे हैं। वायरस अभी भी मौजूद है, लापरवाही करने या ऐसी बातों में पड़ने से खुद की और परिवार की जान खतरे में डाल सकते हैं।' 
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