लॉकडाउन के बीच बच्चों के मानसिक स्वास्थ का ख्याल रखना अहम है। बंगलुरू स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेस के वैज्ञानिकों और चिकित्स्कों ने अभिभावकों को बच्चों की देखभाल के लिए छह बिंदु तैयार किए हैं। अगर इनका पालन किया जाए तो बच्चे इन कठिन दिनों में घर के भतीर खुश रहेंगे और मन स्वस्थ रहेगा।
इस समय बच्चों के हर सवाल का जवाब आपको देना होगा। उनकी हर बात सुननी होगी। अगर वे कोरोना वायरस के बारे में जानना चाहते हैं तो उन्हें बताएं। उनके साथ अच्छा समय बिताएं। कहानियां सुनाएं और प्यार करें। घर-परिवार और दूर के रिश्तेदारों के बारे में बताएं और उनके सवालों का जवाब दें। इससे वे खुश रहेंगे।
लॉकडाउन के बीच बच्चे चिंतित हो सकते हैं। उनके भाव और व्यवहार को समझें और उस बारे में बात करें। बच्चे पर अपना फैसला न थोपें। वायरस के बारे में जानना चाहता है तो उनके सवालों को नजरअंदाज न करें। इससे उनकी चिंता और बढ़ेगी। उनको बताएं कि जब वे सभी नियमों का पालन करेंगे तो हालात ठीक हो जाएंगे।
बच्चों को उनके दोस्तों से फोन या वीडियो कॉल के जरिये बात कराते रहें। रिश्तेदारों से बात कराएं जिनके साथ वे अच्छा महसूस करते हैं। तकनीक के जरिये बच्चों के दोस्तों को आपस में जोड़ें और साथ में कोई खेल भी खेल सकते हैं।
बच्चों को घर के भीतर ही व्यस्त रखना होगा और खेलने दें। पहेली सुलझाने में उनकी मदद करें। बच्चों को डांस, योग के बारे में जानकारी दें, सिखाएं। कोशिश करें कि आपके साथ वो घर का भी कुछ काम करें। उन्हें कुछ अच्छी बातें बताएं।
स्कूल और ट्यूशन दोनों बंद हैं। घर पर ही बच्चों को पढ़ने और पढ़ाने का समय तय करें। ऐसा न होने दें कि स्कूल बंद है तो पढ़ाई नहीं होगी। इससे बच्चे को दोबारा स्कूल जाने पर तकलीफ होगी। उन्हें पढ़ाई से जुड़े छोटे-छोटे काम देते रहें।
(दिक्कत हो तो संपर्क करें : आपको या बच्चे को मानसिक परेशानी है तो कोविड-19 साइको-सोशल टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 080-46110007 पर मदद ले सकते हैं।
(स्रोत : नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज)