पैंगोलिन की खाल एशिया में पारंपरिक चीनी दवाएं बनाने में इस्तेमाल की जाती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, चीन और दक्षिणपूर्व एशिया के जंगलों में पाए जाने वाले पैंगोलिनों पर अतिरिक्त नजर रखने की जरूरत है ताकि कोरोना वायरस के फैलने में उनकी भूमिका और भविष्य में संक्रमण के खतरे के बारे में पता लगाया जा सके। कुछ वैज्ञानिकों का ऐसा मानना भी है कि चमगादड़ कोरोना वायरस के मूल स्रोत हो सकते हैं और किसी अन्य जीव के माध्यम से यह वायरस इंसानों तक पहुंचा।
जॉन होपकिंस यूनिवर्सिटी में हुई एक रिसर्च में बताया गया है कि यह वायरस कोई जिंदा जीव नहीं है, बल्कि एक प्रोटीन मॉलीक्यूल (डीएनए) है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह वायरस फैट या वसा की परत से घिरा होता है, जो कि आंख, नाक या बुक्कल म्यूकोसा (एक तरह का मुख कैंसर) की सेल्स द्वारा अवशोषित होने के बाद इनके जेनेटिक कोड को बदल देता है। यह इन्हें आक्रामक और मल्टीप्लायर सेल्स में तब्दील कर देता है। प्रोटीन मॉलीक्यूल होने के कारण यह मरता नहीं है, बल्कि क्षय हो जाता है।
ऐसे में एक संभावना इसके कायमेरा होने की भी जताई जा रही है। दो वायरसों से मिलकर विकसित हुए वायरस को कायमेरा कहा जाता है। कायमेरा में दोनों प्राइमरी वायरस के गुण हो सकते हैं। यह पूरी तरह किसी वायरस से मैच नहीं करता है। कोरोना के बारे में भी यह संभावना जताई जा रही है कि दो अलग-अलग वायरसों ने एक बार में किसी एक जीव को इंफेक्ट किया हो और फिर दोनों वायरसों के मिलने से तीसरे वायरस यानी कायमेरा बना हो।
चमगादड़ों में पाया जाने वाले कोरोना वायरस का जीनोम नए कोरोना वायरस से 96 फीसदी मेल खाते हैं, जबकि पैंगोलिन में पाए जाने वाले जीनोम 99 फीसदी मेल खाते हैं। पैंगोलिन में कई तरह के ऐसे ही वायरस पाए गए। बताया जा रहा है कि चमगादड़ कोरोना वायरस के रिजरवॉयर (reservoir)हो सकते हैं। यानी उनमें यह वायरस लंबे समय तक मौजूद रह सकता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि यह वायरस लोगों में संक्रमण के लक्षण दिखाए बिना भी तेजी से दूसरे में फैल जाता है।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, नया कोराना वायरस एक क्रमिक विकास का नतीजा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब संक्रमित जानवर इंसान के संपर्क में आया तो उसमें यह बीमारी फैल गई। चीन के वाइल्ड लाइफ और मांस मार्केट के कामगारों में सबसे पहले इस बीमारी के फैलने की कड़ी को इससे जोड़ कर देखा जा रहा है।
जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन के प्रोफेसर एंड्रयू कनिंगम का कहना है कि वैज्ञानिक कोरोना संक्रमित मरीज के शरीर में जब इस नए वायरस को और ज्यादा बेहतर तरीके से समझ पाएंगे, तभी चीन में चमगादड़ों या पैंगोलिन से इसके फैलने को लेकर स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्स कोरोना वायरस-2, चमगादड़ और पैंगोलिन दोनों में पाए जानेवाले वायरस से मिलकर तैयार हुआ एक तीसरा वायरस हो सकता है। इन दोनों में पाए जानेवाले वायरसों ने किसी अन्य जीव को एक साथ संक्रमित किया हो और अपने इस तीसरे रूप को विकसित किया हो। हालांकि अबतक उस तीसरे जीव की पहचान नहीं हो पाई है।