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पैंगोलिन, चमगादड़ या किसी और जानवर से फैला कोरोना वायरस? यहां जानें अबतक हुए शोधों का निचोड़

सार

दुनियाभर में तबाही मचा रहे कोरोना वायरस के ऑरिजिन को लेकर कई शोध हुए हैं और आगे भी हो रहे हैं। कुछ शोध में चमगादड़ तो कुछ में पैंगोलिन के शरीर में मिले वायरस के जीनोम से कोरोना के जीनोम में समानता पाई गई है। एक तीसरी संभावना यह जताई जा रही है कि कोरोना दो तरह के वायरसों के मेल से बना तीसरा रूप हो सकता है।
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Coronaindia - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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चीन के वुहान से दुनियाभर में फैले कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। इस वायरस के ऑरिजिन(Origin) और इसके वाहक को लेकर वैज्ञानिक शोध में लगे हैं। इस वायरस को फैलाने को लेकर अमेरिका और चीन एक-दूसरे पर आरोप मढ़ चुके हैं। हालांकि कैलिफोर्निया में जेनेटिक सिक्वेंसेस को लेकर हुए एक रिसर्च में इस संभावना से इनकार किया जा चुका है कि इसे प्रयोगशाला में तैयार किया जा सकता है।

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इसके साथ ही चीन को लेकर चल रही 'कॉन्सपिरेसी-थ्योरी' को भी चुनौती मिली है। कुछ वैज्ञानिक इस बात को लेकर स्पष्ट हैं कि दुनियाभर में तबाही मचाने वाला यह सार्स कोरोना वायरस-2 जानवरों से ही इंसान में आया है। इसको लेकर आगे की रिसर्च जारी है, ताकि इसके बढ़ते संक्रमण को रोका जा सके।

शुरुआत में कोरोना वायरस के चमगादड़ से इंसानों में आने की बात कही जा रही थी। कुछ समय बाद सार्स कोरोना वायरस-2 के जीनोम काफी हद तक चमगादड़ में पाए जानेवाले कोरोना से मिलने की बात तो प्रमाणित हुई, लेकिन यह बिल्कुल मेल नहीं खाता है। अभी हाल ही में प्रतिष्ठित मेडिकल रिसर्च जर्नल नेचर में प्रकाशित शोध में शोधकर्ताओं ने यह दावा किया था कि चीन में तस्करी कर लाए गए जानवर पैंगोलिन में कोरोना से मेल खाते वायरस मिले हैं। 
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स्तनपाई जीव पैंगोलिन की चीन में मांस और पारंपरिक दवाओं में इस्तेमाल को लेकर सबसे ज्यादा अवैध तस्करी होती है। नेचर जर्नल में प्रकाशित शोध में शोधकर्ताओं ने कहा है कि उनका जेनेटिक डेटा दिखाता है कि ऐसे जानवरों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी और बाजार में इसकी बिक्री और तस्करी पर कड़ी पाबंदी लगनी चाहिए। चींटिया खाने वाले इस स्तनपायी जीव पैंगोलिन की तस्करी के कारण ही यह विलुप्त होने की कगार पर है। 

पैंगोलिन - फोटो : Social Media
पैंगोलिन की खाल एशिया में पारंपरिक चीनी दवाएं बनाने में इस्तेमाल की जाती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, चीन और दक्षिणपूर्व एशिया के जंगलों में पाए जाने वाले पैंगोलिनों पर अतिरिक्त नजर रखने की जरूरत है ताकि कोरोना वायरस के फैलने में उनकी भूमिका और भविष्य में संक्रमण के खतरे के बारे में पता लगाया जा सके। कुछ वैज्ञानिकों का ऐसा मानना भी है कि चमगादड़ कोरोना वायरस के मूल स्रोत हो सकते हैं और किसी अन्य जीव के माध्यम से यह वायरस इंसानों तक पहुंचा। 

जॉन होपकिंस यूनिवर्सिटी में हुई एक रिसर्च में बताया गया है कि यह वायरस कोई जिंदा जीव नहीं है, बल्कि एक प्रोटीन मॉलीक्यूल (डीएनए) है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह वायरस फैट या वसा की परत से घिरा होता है, जो कि आंख, नाक या बुक्कल म्यूकोसा (एक तरह का मुख कैंसर) की सेल्स द्वारा अवशोषित होने के बाद इनके जेनेटिक कोड को बदल देता है। यह इन्हें आक्रामक और मल्टीप्लायर सेल्स में तब्दील कर देता है। प्रोटीन मॉलीक्यूल होने के कारण यह मरता नहीं है, बल्कि क्षय हो जाता है। 

चमगादड़ - फोटो : Pixabay
ऐसे में एक संभावना इसके कायमेरा होने की भी जताई जा रही है। दो वायरसों से मिलकर विकसित हुए वायरस को कायमेरा कहा जाता है। कायमेरा में दोनों प्राइमरी वायरस के गुण हो सकते हैं। यह पूरी तरह किसी वायरस से मैच नहीं करता है। कोरोना के बारे में भी यह संभावना जताई जा रही है कि दो अलग-अलग वायरसों ने एक बार में किसी एक जीव को इंफेक्ट किया हो और फिर दोनों वायरसों के मिलने से तीसरे वायरस यानी कायमेरा बना हो। 

चमगादड़ों में पाया जाने वाले कोरोना वायरस का जीनोम नए कोरोना वायरस से 96 फीसदी मेल खाते हैं, जबकि पैंगोलिन में पाए जाने वाले जीनोम 99 फीसदी मेल खाते हैं। पैंगोलिन में कई तरह के ऐसे ही वायरस पाए गए। बताया जा रहा है कि चमगादड़ कोरोना वायरस के रिजरवॉयर (reservoir)हो सकते हैं। यानी उनमें यह वायरस लंबे समय तक मौजूद रह सकता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि यह वायरस लोगों में संक्रमण के लक्षण दिखाए बिना भी तेजी से दूसरे में फैल जाता है। 
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सार्स कोरोना वायरस-2 - फोटो : Pixabay
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, नया कोराना वायरस एक क्रमिक विकास का नतीजा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब संक्रमित जानवर इंसान के संपर्क में आया तो उसमें यह बीमारी फैल गई। चीन के वाइल्ड लाइफ और मांस मार्केट के कामगारों में सबसे पहले इस बीमारी के फैलने की कड़ी को इससे जोड़ कर देखा जा रहा है।

जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन के प्रोफेसर एंड्रयू कनिंगम का कहना है कि वैज्ञानिक कोरोना संक्रमित मरीज के शरीर में जब इस नए वायरस को और ज्यादा बेहतर तरीके से समझ पाएंगे, तभी चीन में चमगादड़ों या पैंगोलिन से इसके फैलने को लेकर स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। 

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्स कोरोना वायरस-2, चमगादड़ और पैंगोलिन दोनों में पाए जानेवाले वायरस से मिलकर तैयार हुआ एक तीसरा वायरस हो सकता है। इन दोनों में पाए जानेवाले वायरसों ने किसी अन्य जीव को एक साथ संक्रमित किया हो और अपने इस तीसरे रूप को विकसित किया हो। हालांकि अबतक उस तीसरे जीव की पहचान नहीं हो पाई है।

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