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भविष्य में भी आ सकती हैं समस्याएं.. जो ठीक हो चुके, उनका भी रखना होगा खास ख्याल

Fri, 01 May 2020 06:48 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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coronavirus - फोटो : PTI
बहुरूपिया कोरोना रोज पहचान व लक्षण बदल रहा है। फेफड़ों के बाद ये दूसरे अंगों को भी चपेट में लेने लगा है। ऐसे में  सही पहचान और इलाज तक सतर्क रहने में ही भलाई है। वैज्ञानिकों का मानना है, वायरस की चपेट में आने वालों को आगे भी सतर्क रहना होगा, क्योंकि वायरस शरीर पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। भविष्य में यह छह समस्याएं आ सकती हैं...
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कोरोनावायरस से प्रभावित फेफड़े की 3D तस्वीर - फोटो : Sky News
फेफड़ों में तकलीफ
पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. खालिहा गेट्स का कहना है कि वायरस जितना अधिक फेफड़े को नुकसान पहुंचाएगा, तकलीफ उतनी अधिक होने की संभावना है। सांस संबंधी तकलीफ बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की जरूरत पड़ सकती है।
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डेमो - फोटो : डेमो
लिवर को नुकसान
34 संक्रमितों के लिवर फंक्शन टेस्ट में पता चला कि वायरस से ठीक होने पर भी लिवर के काम की प्रक्रिया बदल चुकी है। ऐसे में पेट में मरोड़ और पाचन में तकलीफ हो सकती है। संक्रमण से मुक्ति के बाद लिवर में तकलीफ पर तुरंत डॉक्टरी सलाह लें।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
हृदय पर असर...
न्यूयॉर्क के लेनॉक्स हिल अस्पताल के विशेषज्ञ डॉ. लेन होरोवित्ज के मुताबिक, तेज बुखार से हृदय की मांसपेशियों को नुकसान हो सकता है। वायरस के कारण हृदय प्रभावित होता हैै। हार्ट अटैक आ सकता है। संक्रमित हृदय रोगी खास ध्यान रखें।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
मांसपेशी को नुकसान
अमेरिका की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के अध्ययन के अनुसार, बिस्तर पर रहने से मरीज की मांसपेशियों की ताकत 3 से 11 फीसदी तक घटती है। 14 से अधिक दिन तक इलाज चलने फिर क्वारंटीन अवधि के कारण कोरोना मरीज को ये खतरा और ज्यादा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
सांस फूलने की समस्या
टेक्सास टेक हेल्थ साइंसेज सेंटर स्कूल ऑफ मेडिसिन के डॉ. स्टीवन बर्क का कहना है कि स्वस्थ हुए मरीज में एक माह बाद भी सांस फूलने की समस्या हो सकती है। इसे ठीक होने में समय लगता है। संभव है कि कुछ लोगों में पूरी जिंदगी ये समस्या रहे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pexels
मानसिक समस्या...
अमेरिकी की यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना की संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. मेलिसा नोलन का कहना है कि सार्स के मरीजों में चिंता और घबराहट जैसी समस्या रही। महामारी मानसिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डालती है। कुछ तनाव व अवसाद में आ जाते हैं। इन लक्षणाें पर डॉक्टरी सलाह लें।
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डॉक्टर हर्षवर्धन - फोटो : ANI
1000 केंद्रों पर जेनेटिक सीक्वेंसिंग 
सीएसआईआर और जैव प्रौद्योगिकी विभाग 1000 स्थानों पर कोरोना की जेनेटिक सीक्वेंसिंग पर काम कर रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बताया, देश में करीब छह टीकों पर काम चल रहा है। इनमें से चार पर काम ठीकठाक आगे बढ़ चुका है। देश में रोज डेढ़ लाख पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्वीपमेंट का निर्माण हो रहा है। उन्होंने बताया कि हम तेजी से स्वदेशी एंटीबॉडी टेस्ट किट का उत्पादन कर रहे हैं। 

अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें...
सिविल सोसायटी संगठनों और स्वयंसेवी संगठनों से वर्चुअल संवाद में हर्षवर्धन ने कहा कि अंतिम जरूरतमंद तक जरूरी संसाधनों की पहुंच सुनिश्चित करने में ही सफलता निहित है।

कुछ हफ्तों में जंग जीतेंगे...
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, वैश्विक महामारी कोरोना के खिलाफ जंग में दूसरे प्रभावित देशों की तुलना में भारत हर मोर्चे पर अच्छा कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कुछ हफ्तों में देश इससे जीतने में सक्षम होगा। 
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