अकेलेपन के कारण अल्जाइमर-डिमेंशिया का खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दुनिया का हर छठा व्यक्ति अकेलेपन का शिकार है, ये स्थिति खामोश महामारी का रूप लेती जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आमतौर पर अकेलेपन के बारे में लोग बहुत कम सोचते हैं, इस बारे में लोग कम बातचीत करते हैं। हालांकि अध्ययन की रिपोर्ट से पता चलता है कि जीवन के शुरुआती दिनों में अगर बच्चा अकेलेपन का शिकार है, उसे माता-पिता का साथ नहीं मिलता या दोस्त नहीं है तो ये स्थिति दिमाग के आकार में परिवर्तन ला सकती है। इतना ही नहीं, अकेलेपन के कारण दिमागी सेहत पर नकारात्मक असर होता ही है, साथ ही भविष्य में अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया का जोखिम
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अध्ययन में क्या पता चला?
चाइना हेल्थ एंड रिटायरमेंट लॉन्गिट्यूडिनल अध्ययन के विशेषज्ञों की टीम ने पाया कि जिन लोगों ने बचपन में अकेला महसूस किया, उनमें बड़े होने पर डिमेंशिया का खतरा काफी ज्यादा था।
जामा नेटवर्क में प्रकाशित इस अध्ययन में टीम ने पाया कि इस ग्रुप वाले लोगों में कॉग्निटिव गिरावट यानी दिमागी क्षमता में कमी भी तेजी से महसूस हुई। जैसे-जैसे वे 50-60 की उम्र में पहुंचे, अपने दूसरे साथियों की तुलना में इन लोगों में अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया के लक्षण तेजी से विकसित होने लगे।
शोधकर्ता कहते हैं, उम्र के साथ मानसिक क्षमता प्राकृतिक तौर पर कमजोर होती जाती है। याददाश्त धीमी हो जाती है और एक साथ कई चीजों पर फोकस कर पाना मुश्किल हो जाता है। जब ये गिरावट बहुत तेजी से होने लगती है, तो इसे अल्जाइमर-डिमेंशिया रोग जैसी स्थितियों जैसा माना जाता है, जो दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और जरूरी नेटवर्क को बाधित करता है।
डिमेंशिया का कोई इलाज भी नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि शारीरिक गतिविधि, दिमागी कसरत और सोशल कॉन्टैक्ट बनाए रखने से इसके लक्षणों को कम करने और मस्तिष्क की क्षमता में गिरावट को कम किया जा सकता है।
ब्रेन हेल्थ की समस्याएं
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दिमागी क्षमता पर भी पड़ता है असर
विशेषज्ञों की टीम ने इस अध्ययन के लिए बचपन से 60 की उम्र तक के प्रतिभागियों के डेटा का अध्ययन किया। प्रतिभागियों की दिमागी क्षमता पर ध्यान रखा गया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन बच्चों को अकेलेपन की समस्या थी या फिर परिवार-दोस्तों से भावनात्मक सहायता नहीं मिली उनमें उम्र बढ़ने के साथ आत्मविश्वास की कमी, पढ़ाई में गिरावट, भावनात्मक अस्थिरता, सामाजिक कौशल में कमी और व्यवहारिक समस्याएं बढ़ गई हैं। लंबे समय में यह स्थिति डिमेंशिया रोग को बढ़ाने वाली पाई गई।
अकेलेपन के कारण होने वाली दिक्कतें
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अकेलेपन का शारीरिक सेहत पर असर
साल 2023 में डब्ल्यूएचओ ने अकेलेपन की बढ़ती समस्या पर एक अंतरराष्ट्रीय आयोग का गठन भी किया था।
अकेलेपन के कारण स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभावों पर नजर डालें तो पता चलता है कि वृद्ध वयस्कों में, अकेलेपन के कारण डिमेंशिया जैसी गंभीर समस्या विकसित होने का जोखिम 50% जबकि कोरोनरी आर्टरी रोग या स्ट्रोक होने का जोखिम 30% तक बढ़ जाता है। ये युवाओं के जीवन को भी प्रभावित कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, 5% से 15% किशोर अकेलेपन का अनुभव करते हैं। अफ्रीका में 12.7%, जबकि यूरोप में यह आंकड़ा 5.3% है।
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स्रोत
Childhood Loneliness and Cognitive Decline and Dementia Risk in Middle-Aged and Older Adults
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