फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Alert: देश में हर तीसरी मौत का कारण हृदय रोग, रिपोर्ट में सामने आई अन्य बीमारियों की डरावनी तस्वीर

Sat, 06 Sep 2025 01:42 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • आंकड़े बताते हैं कि हर साल लाखों भारतीय हृदय रोगों के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं और इसमें बड़ी संख्या युवा पीढ़ी की है।
  • भारत में होने वाली सभी मौतों में से एक-तिहाई का कारण हृदय रोग हैं। 
विज्ञापन
हृदय रोग मृत्यु का प्रमुख कारण - फोटो : Freepik.com
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Cardiovascular Diseases & Deaths: भारत में दिल की बीमारियों का खतरा अन्य रोगों की तुलना में सबसे अधिक देखा जा रहा है, ये हर साल होने वाली मौतों का प्रमुख कारण भी है। कुछ दशकों पहले तक हृदय रोगों को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारियों के रूप में जाना जाता था हालांकि अब कम उम्र के, यहां तक कि 20 से भी कम आयु के लोग इसका शिकार हो रहे हैं।

विज्ञापन


आंकड़े बताते हैं कि हर साल लाखों भारतीय हृदय रोगों के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं और इसमें बड़ी संख्या युवा पीढ़ी की भी है। 30-35 साल के युवा जो खुद को फिट और एनर्जेटिक मानते थे, अचानक हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर आपको ऐसी खबरें आए दिन देखने को मिलती होंगी। 

हृदय रोग और इससे मौत के मामलों को लेकर आई एक हालिया रिपोर्ट में भी इस खतरे को लेकर अलर्ट किया गया है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के तहत किए गए सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे की रिपोर्ट में विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि भारत में होने वाली सभी मौतों में से एक-तिहाई का कारण हृदय रोग हैं। दिल की बीमारियां देश में मृत्यु दर का प्रमुख कारण बनी हुए हैं, जो लगभग 31 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार हैं।
विज्ञापन


विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि जिस तरह से लोगों की दिनचर्या, खानपान में गड़बड़ी देखी जा रही है इससे आशंका है कि ये आंकड़े और भी बढ़ सकते हैं।

नॉन कम्युनिकेबल डिजीज और इसका खतरा - फोटो : Freepik.com
नॉन कम्युनिकेबल डिजीज और मृत्यु का बढ़ता खतरा

"मृत्यु के कारणों पर रिपोर्ट: 2021-2023" नामक शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नॉन कम्युनिकेबल डिजीज देश में मृत्यु का प्रमुख कारण हैं, जो सभी मौतों का 56.7 प्रतिशत है। इसके अलावा संचारी रोग, मातृ स्वास्थ्य में दिक्कत, प्रसवकालीन और पोषण संबंधी स्थितियां 23.4 प्रतिशत मौतों का कारण बनती हैं। कोविड से प्रभावित साल 2020-2022 की अवधि में ये आंकड़े क्रमशः 55.7 प्रतिशत और 24.0 प्रतिशत थे।

जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर हृदय रोग और इससे मृत्यु का खतरा बढ़ता देखा जा रहा है। इसके बाद श्वसन संक्रमण 9.3 प्रतिशत, घातक और अन्य नियोप्लाज्म 6.4 प्रतिशत तथा श्वसन रोगों के कारण 5.7 प्रतिशत मौतें होती हैं।

देश में मृत्यु के प्रमुख कारण - फोटो : Freepik.com
और किन कारणों से हो रही हैं मौतें?

हृदय रोगों के चलते 30 से अधिक के आयु वर्ग में सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं, जबकि जानबूझकर चोट पहुंचाना-आत्महत्या के मामले 15-29 आयु वर्ग में मृत्यु का सबसे आम कारण है।

रिपोर्ट में चिह्नित मृत्यु के अन्य कारणों में पाचन संबंधी रोग (5.3 प्रतिशत), अज्ञात कारण से बुखार (4.9 प्रतिशत), मोटर वाहन दुर्घटनाओं के अलावा अनजाने में लगी चोटें (3.7 प्रतिशत), मधुमेह (3.5 प्रतिशत) और जननांग संबंधी रोग (3.0 प्रतिशत) शामिल हैं।

विशेषज्ञों ने कहा, चोट लगने से 9.4 प्रतिशत मौतें होती हैं जबकि अस्पष्ट कारणों से 10.5 प्रतिशत लोगों की जान जा रही है। हालांकि, अस्पष्ट कारणों का अधिकांश हिस्सा अधिक उम्र (70 या उससे अधिक) में देखा जा रहा है।

हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com
क्या कहती है रिपोर्ट?

रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि परिणामों की सावधानीपूर्वक व्याख्या की जानी चाहिए क्योंकि कारणों के गलत वर्गीकरण की संभावना को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता है। अध्ययन से ऐसे निष्कर्ष सामने आए हैं, जिनसे निश्चित रूप से देश में मृत्यु दर की स्थिति और उससे जुड़ी चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, जिस तरह से हृदय रोगों के मामले बढ़ते जा रहे हैं इसको लेकर सभी लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है। 
विज्ञापन

हृदय रोगों को लेकर अलर्ट रहने की आवश्यकता - फोटो : Freepik.com
हृदय स्वास्थ्य को लेकर विशेष देखभाल की जरूरत

हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं, आज का युवा भागदौड़ में इतना उलझ गया है कि नींद पूरी नहीं लेता, खाना वक्त पर नहीं खाता और तनाव को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना चुका है। ऊपर से तली-भुनी चीजें, जंक फूड और स्क्रीन पर घंटों चिपके रहने की आदत ने शरीर को अंदर से खोखला करना शुरू कर दिया है। नतीजा ये कि दिल समय से पहले ही थकने लगता है।

अगर पिछले दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो हृदय रोग से मौत के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों ने कहा है कि सभी लोगों को कम उम्र से ही इस विषय की गंभीरता पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके अलावा जिन लोगों की हृदय रोगों की फैमिली हिस्ट्री रही है, उन्हें और भी सावधानी बरतनी चाहिए।



-----------------------------
नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें