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Cancer: अगले 20 साल में कैंसर लेगा विकराल रूप, 80% तक बढ़ सकते हैं मौत के मामले

Fri, 07 Mar 2025 01:27 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हर 5 में से एक व्यक्ति को उसके जीवनकाल में कैंसर विकसित होने का जोखिम देखा जा रहा है। लगभग नौ में से एक पुरुष और 12 में से एक महिला की इस बीमारी के कारण मौत हो जाती है।
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कैंसर के बढ़ते मामले चिंताजनक - फोटो : Amarujala.com
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विस्तार
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कैंसर के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। वयस्कों से लेकर बुजुर्ग तक सभी इस गंभीर और जानलेवा रोग का शिकार हो रहे हैं। कैंसर के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत भी हो रही है जिसने स्वास्थ्य क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि साल 2023 में कैंसर के करीब दो करोड़ नए मामले सामने आए वहीं करीब 97 लाख लोगों की मौत हो गई। फेफड़े, स्तन, कोलोरेक्टल, प्रोस्टेट और पेट के कैंसर के मामले सबसे आम देखे गए। कैंसर के निदान के बाद अगले 5 वर्षों के भीतर जीवित रहने वाले लोगों की अनुमानित संख्या 5.35 करोड़ थी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हर 5 में से एक व्यक्ति को उसके जीवनकाल में कैंसर विकसित होने का जोखिम देखा जा रहा है। लगभग नौ में से एक पुरुष और 12 में से एक महिला की इस बीमारी के कारण मौत हो जाती है।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हृदय रोगों को बाद कैंसर दुनिया में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। इसका खतरा बढ़ता ही जा रहा है। जिसको लेकर कम उम्र से ही सभी लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है।

कैंसर का बढ़ता जोखिम - फोटो : Freepik.com
कैंसर के मामले औऱ मृत्य के आंकड़े बढ़ने की आशंका

अध्ययनों से पता चलता है कि जिस तरह से साल-दर-साल इस रोग का जोखिम बढ़ता जा रहा है, इससे अगले 20 साल और भी चुनौतियां बढ़ाने वाले हो सकते हैं। वैज्ञानिकों की टीम ने अभी की दर को देखते हुए अनुमान लगाया है कि साल 2045 तक कैंसर के मामले 50 प्रतिशत और मौत की संख्या 80 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। 

साल 2022 में भारत में 9.16 लाख लोगों की मौत कैंसर से हुई, वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि अगले दो दशकों यानी 2045 तक यह संख्या बढ़कर 17 लाख हो सकती है, जिसका मतलब है कि बीस सालों में मौतों की संख्या 80.0 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।


(ये भी पढ़िए- कैंसर की गिरफ्त में युवा आबादी, सामने आए पिछले 30 साल के डरा देने वाले आंकड़े)

सभी उम्र के लोग हो रहे हैं कैंसर का शिकार - फोटो : Adobe Stock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में पुणे स्थित एक निजी अस्पताल में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ अखिल सचान कहते हैं, कुछ दशकों पहले की तुलना में अब समय पर कैंसर का निदान और उपचार आसान हो गया है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी अधिकतर मरीजों में कैंसर का निदान आखिर के चरणों में हो पाता है जहां से रोग का इलाज और जान बचने की संभावना कम हो जाती है। 

डॉक्टर कहते हैं, इस रोग के मामले में अच्छी बात बस यह है कि अगर इसका शुरुआती स्टेज में पता चल जाए तो कैंसर के 70-80 फीसदी मामलों को रोका जा सकता है। समय पर निदान होने और उपाचार शुरू होने से कैंसर के शरीर में बढ़ने से रोकने में भी मदद मिल सकती है। 

कैंसर की समय पर करें पहचान - फोटो : Freepik.com
कैंसर के लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी

डॉ अखिल कहते हैं, कैंसर के जोखिमों को देखते हुए सभी लोगों को डॉक्टर की सलाह पर नियमित अंतराल पर शरीर की जांच जरूर करानी चाहिए। कैंसर के लक्षणों के बारे में जानना और समय रहते इसका पहचान जरूरी है। आपका शरीर स्वयं ही इसका संकेत देता है जिसे बिल्कुल अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देना और समय रहते इसका निदान कराना आपको जानलेवा रोग से बचाने वाला हो सकता है। 
  • भोजन को निगलने में परेशानी हो या लगातार अपच रहे। 
  • शरीर का कोई घाव जो ठीक ही नहीं हो रहा हो।
  • शरीर के किसी भी हिस्से से बिना वजह खून बहता हो।
  • शरीर मे कहीं भी गांठ महसूस हो।
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कैंसर से बचाव के लिए वैक्सीनेशन - फोटो : Freepik.com
सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए कराएं टीकाकरण

अध्ययनों की रिपोर्ट से पता चलता है कि सर्वाइकल कैंसर दुनियाभर में महिलाओं में कैंसर से होने वाली मृत्यु का चौथा प्रमुख कारण है। अच्छी बात ये है कि कुछ प्रकार की सावधानियां बरतकर और टीकाकरण के माध्यम से इससे बचाव किया जा सकता है।

इसी को लेकर सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में एचपीवी वैक्सीन की दर बढ़ाने पर जोर दिया है, जिससे इस घातक कैंसर के प्रसार को कम करके वैश्विक स्तर पर सर्वाइकल कैंसर से मौत के मामलों में कमी लाई जा सके। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



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स्रोत और संदर्भ
Global cancer burden growing, amidst mounting need for services


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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