फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Alert: सफल इलाज के बाद भी वर्षों तक शरीर में छिपा रह सकता है ये कैंसर, सभी महिलाएं जरूर दें ध्यान

Thu, 09 Jan 2025 07:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या आप जानते हैं कि कुछ कैंसर आपके शरीर में बिना लक्षण पैदा किए भी सालों-साल तर बने रह सकते हैं।  ये सुनकर आपको जरूर डरावना लग सकता है, लेकिन वास्तविकता यही है। आइए इस बारे में जानते हैं।
विज्ञापन
स्तन कैंसर का जोखिम - फोटो : Freepik.com
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कैंसर वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर बीमारी है, जिसका जोखिम हर उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। ये दुनियाभर में मृत्यु का प्रमुख कारण भी है। भारत में भी कैंसर और इससे मौत के मामलों में पिछले कुछ दशकों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, भारत में कैंसर से मौत का खतरा अधिक होने का एक बड़ा कारण इसका समय पर निदान न हो पाना है। ज्यादातर मामलों में कैंसर का पता ही तब चल पाता है जब ये लास्ट स्टेज में पहुंच जाता है। यहां से कैंसर का इलाज और रोगी के बचने की संभावना दोनों ही कठिन हो जाती है।

विज्ञापन


स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों कैंसर के लक्षणों पर ध्यान देते रहना चाहिए। अगर आपके परिवार में पहले से किसी को कैंसर रहा हो तो अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। पर क्या आप जानते हैं कि कुछ कैंसर आपके शरीर में बिना लक्षण पैदा किए भी सालों-साल तर बने रह सकता हैं?

आइए इस कैंसर के बारे में जानते हैं।

स्तन कैंसर का पता लगाने के लिए अध्ययन - फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?

हाल ही में किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि सफल उपचार के बाद भी एक प्रकार का कैंसर आपके शरीर में सालों तक शरीर में छिपा रह सकता है। ये सुनकर आपको जरूर डरावना लग सकता है, लेकिन वास्तविकता यही है।

अमेरिका स्थित मिशिगन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर डॉ. गैरी ल्यूकर के नेतृत्व में कैंसर को लेकर किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि स्तन कैंसर के कई मामले ऐसे देखे गए हैं जिसमें कैंसर के सेल्स लंबे समय से शरीर में मौजूद थे।

जर्नल ऑफ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन में प्रकाशित शोध में विशेषज्ञों ने बताया कि ये 'स्लीपर कैंसर सेल्स' शरीर में सालों तक निष्क्रिय रह सकती हैं और कुछ वर्षों बाद स्तन कैंसर के फिर से उभरने का कारण बन सकती हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि ये अध्ययन इस तरफ ध्यान आकर्षित करता है कि इलाज के दौरान ऐसे तरीके अपनाएं जाएं कि कैंसर सेल्स दोबारा न विकसित होने पाएं। 

ब्रेस्ट कैंसर का खतरा - फोटो : Freepik.com
इलाज के बाद भी शरीर में छिपे रह सकते हैं सेल्स

अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि आमतौर पर माना जाता रहा है कि कैंसर के सफल उपचार का मतलब है कि हमारा शरीर इस बीमारी से मुक्त हो गया है, हालांकि एस्ट्रोजन रिसेप्टर-पॉजिटिव ब्रस्ट कैंसर के मामले में, यह उतना सरल नहीं है जितना दिखता है। ये कैंसर कोशिकाएं बोन मैरो के अंदर वर्षों और यहां तक कि दशकों तक छिपी रह सकती हैं और फिर से उभर सकती हैं।

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि चिकित्सा प्रगति और अधिक जागरूकता के बावजूद युवा महिलाओं में स्तन कैंसर बढ़ रहा है। इस बीच ये जानकारी और भी चिंता बढ़ाने वाली है। अध्ययनकर्ताओं ने कहा, इसकी रोकथाम को लेकर विस्तृत शोध की आवश्यकता है।
विज्ञापन

कैंसर से बचाव - फोटो : Freepik.com
ब्रेस्ट कैंसर और इसका खतरा

स्तन कैंसर दुनियाभर में महिलाओं में होने वाले आम कैंसर में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा एकत्र किए गए 2022 के आंकड़े बताते हैं कि हर साल लगभग 30% महिलाओं में स्तन कैंसर का निदान किया जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में, यह अनुमान है कि अकेले 2024 में लगभग 3.10 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और मृत्यु दर बहुत अधिक है, जिससे यह महिलाओं में मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण बन गया है। इसके लक्षणों पर सभी महिलाओं को कम उम्र से ही ध्यान देते रहना चाहिए।

कैंसर के शुरुआती लक्षणों पर दें ध्यान

डॉक्टर बताते हैं, कैंसर के शुरुआती चरण में लक्षण बहुत स्पष्ट दिखाई दें ये जरूरी नहीं है। बीमारी के गंभीर होने पर कई लक्षण एक साथ दिखाई देते हैं। 20 से अधिक उम्र की महिलाओं को शरीर में होने वाले बदलावों के लिए अक्सर खुद की जांच करना जरूरी है। अगर आपके स्तन में कोई गांठ है, डिस्चार्ज होता रहता है या अक्सर कुछ असहजता होती है तो इस बारे में किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लें। 



--------------
स्रोत और संदर्भ
Breast cancers that disseminate to bone marrow acquire aggressive phenotypes through CX43-related tumor-stroma tunnels


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें