शरीर का फैट कई प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभावों से जुड़ा होता है, जिसमें हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है, टाइप -2 मधुमेह और सांस लेने में समस्या होती है। हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार शरीर के फैट के और दिमाग के बीच एक पेचीदा लिंक होता है, जो किसी भी मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति के लिए बेहद हानिकारक है।
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human mind
न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 10,000 लोगों के दिमाग का विश्लेषण किया। अध्ययन में, वैज्ञानिकों ने 2006 और 2010 के बीच बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) माप के साथ-साथ कमर से कूल्हों के अनुपात की तुलना की। वैज्ञानिकों ने पाया कि पतले लोगों की तुलना में मोटे लोगों का बीएमआई और कमर-से-कूल्हे तक का अनुपात दोनों की काफी ज्यादा था। साथ ही उनके दिमाग में ग्रे मैटर की मात्रा भी कम थी।
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दरअसल, हमारे दिमाग के टिश्यू दो भागों में बाटे होते हैं: वाइट मैटर और ग्रे मैटर। ग्रे मैटर में मांसपेशियों के नियंत्रण से जुड़े दिमाग के क्षेत्र और देखने और सुनने, यादाश्त, भावनाओं, निर्णय लेने और आत्म-नियंत्रण जैसी चीजें शामिल हैं। साथ ही, मोटापा दिमाग के इस हिस्से पर असर डाल रहा है।
बीएमआई के साथ-साथ कमर-से-कूल्हे के अनुपात को देखने से यह साफ होता है कि दिमाग को प्रभावित करने में कई तरह के फैट की भूमिका हो सकती है। बीएमआई शरीर के फैट की एक सामान्य रीडिंग है। शरीर में जमा हुआ फैट का अधिक हानिकारक प्रभाव होता है क्योंकि ये लीवर, पेट और आंतों जैसे अंगों को घेरता है जिससे हृदय रोग से लेकर गठिया जैसी बीमारी हो सकती है। हाल ही में एक डाटा में प्रकाशित हुआ है कि शारीरिक गतिविधि जैसे एक्सरसाइज और योग से दिमाग के ग्रे मैटर को कैसे बढ़ाया जा सकता है।