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Vegan Diet: एक महीने में इंफ्लेमेशन-कैंसर और उम्र बढ़ने की रफ्तार हो सकती है कम, बस करना होगा ये काम

Mon, 17 Aug 2026 10:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सिर्फ चार हफ्ते वीगन डाइट यानी मांस, दूध और डेयरी उत्पादों से दूरी बनाने से शरीर में कुछ ऐसे बदलाव दिखे गए हैं, जो सूजन कम करने और जैविक उम्र को धीमी करने वाले हो सकते हैं। अध्ययन में वीगन डाइट लेने वालों के डीएनए में भी बदलाव देखे गए।
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वीगन डाइट को लेकर अध्ययन में बड़ा खुलासा - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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डाइट में सुधार का हमारी सेहत पर सीधा असर होता है। चीनी-नमक और प्रोसेस्ड चीजों के ज्यादा सेवन को जहां शरीर में इंफ्लेमेशन बढ़ाने वाला पाया गया है, वहीं कई अध्ययन प्लांट बेस्ड डाइट अपनाने की सलाह देते रहे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं, पौधों पर आधारित खान-पान की आदत हमें कई तरह की बीमारियों से बचाए रखने में मददगार हो सकती है। यही कारण है कि दुनियाभर लोगों का झुकाव वीगन डाइट की ओर देखा जा रहा है। पर क्या वीगन डाइट वास्तव में सेहत के लिए लाभदायक है?

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अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि वीगन डाइट वेट लॉस का सबसे असरदार तरीका हो सकता है, जबकि एक अन्य रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बताया था कि इस तरह की डाइट को अपनाने वाले लोगों में विटामिन-बी12 सहित कई प्रकार के पोषक तत्वों की कमी होने का खतरा हो सकता है।

इसी क्रम में अब एक नए अध्ययन में शोधकर्ताओं का कहना है कि वीगन डाइट सिर्फ चार हफ्ते में आपकी सेहत में चमत्कारी बदलाव कर सकती है, इतना ही नहीं वीगन डाइट लेने वालों के डीएनए में भी सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं। इससे कैंसर से जुड़ी प्रक्रियाओं वाली कुछ जीन की गतिविधि कम हुई, साथ ही इससे कोलेस्ट्रॉल और इंसुलिन प्रतिक्रिया में भी काफी सुधार देखा गया।
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तो क्या अब समय आ गया है कि शरीर को स्वस्थ रखने और दुनियाभर में तेजी से बढ़ती क्रॉनिक बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए वीगन डाइट अपनाना शुरू कर देना चाहिए? आइए इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं।

वीगन डाइट लेने वालों की सेहत पर इसका असर - फोटो : Freepik.com
एक महीने में वीगन डाइट का सेहत पर असर

क्या सिर्फ चार हफ्ते खाने की प्लेट में बदलाव करने से शरीर के अंदर की कहानी बदल सकती है? सुनने में यह बात थोड़ी हैरान करने वाली लगती है, लेकिन अध्ययन ने इसी सवाल को लेकर कुछ दिलचस्प संकेत दिए हैं।

शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया कि अगर हम सिर्फ एक महीने के लिए मांस, दूध और दूसरे डेयरी उत्पादों को छोड़कर पूरी तरह वीगन डाइट अपना लेते हैं, तो उसके शरीर में ऐसे बदलाव दिखाई दे सकते हैं जो कई बीमारियों की जड़ माने जाने वाले इंफ्लेमेशन को कम करने के साथ जैविक उम्र बढ़ने की रफ्तार को धीमा कर सकता है।
 
  • एक महीने तक इस तरह की डाइट लेने वाले प्रतिभागियों के खून के सैंपल और  डीएनए की जांच की गई तो इसके परिणाम काफी आश्चर्यजनक रहे। 
  • वीगन डाइट लेने वाले लोगों में ऐसे संकेत मिले जो बताते हैं कि इससे शरीर की बीमारियों से लड़ने क्षमता में तो सुधार हुआ ही साथ ही शरीर में सूजन से जुड़ी गतिविधियां भी कम हुईं। 
  • इतना ही नहीं कुछ ऐसे जीन की गतिविधि में भी बदलाव देखा गया जो कैंसर से जुड़ी प्रक्रियाओं, कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन के इस्तेमाल और डीएनए की मरम्मत से संबंधित होती हैं।

वीगन डाइट का सेहत पर देखा गया बेहतर असर - फोटो : Adobe Stock
इस अध्ययन में शोधकर्ता यह समझना चाहते थे कि क्या खाने की आदत बदलने से बहुत कम समय में शरीर के अंदर कोशिकाओं के स्तर पर बदलाव शुरू हो सकते हैं?

अध्ययन में पाया गया कि वीगन डाइट लेने वाले लोगों में ऐसे जैविक संकेत मिले जो सेहत के लिए बहुत लाभकारी हो सकते हैं। इसमें वीगन डाइट का संबंध शरीर में उन जीन्स की गतिविधियों में कमी से पाया गया, जो कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। इसके अलावा, कुछ ऐसे आनुवंशिक बदलाव भी दिखे जो जैविक उम्र बढ़ने की रफ्तार को कम करने में मददगार हो सकते हैं।

अध्ययन में क्या पता चला?

मेडकॉम जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 48 वयस्कों को दो समूहों में बांटा। एक समूह को एक महीने तक वीगन डाइट दी गई, जबकि दूसरे समूह को मांस से भरपूर डाइट दी गई। दोनों ग्रुप की डाइट में लगभग समान मात्रा में कैलोरी रखी गई थी। इसका मकसद यह समझना था कि अगर शरीर में कोई बदलाव दिखाई दे तो वह सिर्फ वजन कम होने की वजह से न हो।
 
  • अध्ययन शुरू होने से पहले और एक महीने बाद सभी प्रतिभागियों के खून के सैंपल लिए गए। इसके बाद वैज्ञानिकों ने उनके डीएनए में होने वाले बदलावों की जांच की।
  • नतीजों में पाया गया कि वीगन डाइट लेने वालों में शरीर में सूजन बढ़ाने वाली कुछ कोशिकाओं की संख्या कम हुई। वहीं ऐसी कोशिकाओं की संख्या बढ़ी, जो इम्यून सिस्टम को संतुलित रखने में मदद करती हैं।
  • मांसहार या डेयरी उत्पाद न लेने का संबंध कुछ ऐसे जीन की गतिविधि कम होने में भी दिखा जो कैंसर से जुड़ी प्रक्रियाओं को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
  • शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बेहतर रखने, इंसुलिन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया सुधारने और डीएनए की मरम्मत वाले जीन की गतिविधियों में सुधार देखा गया।
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वीगन डाइट का बायोलॉजिकल एज पर असर - फोटो : Adobe Stock
वीगन डाइट से शरीर की उम्र भी धीमी हुई

वीगन डाइट को लेकर एक महीने के अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 'बायोलॉजिकल एज क्लॉक' का इस्तेमाल करके ये भी जाना कि इस डाइट से  शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। 'बायोलॉजिकल एज क्लॉक' की मदद से डीएनए के बदलावों के आधार पर यह अनुमान लगाया जाता है कि शरीर अंदर से कितनी तेजी से बूढ़ा हो रहा है।

अगर किसी व्यक्ति की जैविक उम्र उसकी वास्तविक उम्र से ज्यादा हो, तो यह भविष्य में कई बीमारियों का जोखिम बढ़ने का संकेत हो सकता है।

क्या कहते हैं शोधकर्ता?

शोधकर्ताओं ने खुद माना है कि यह अध्ययन छोटा था, इसलिए यह साबित करने के लिए कि वीगन डाइट वास्तव में लंबे समय में बीमारियों का जोखिम कम करती है या नहीं, हमें और ज्यादा लोगों पर और लंबे समय तक अध्ययन करने की जरूरत है।

अध्ययन के सह- लेखक डॉ. मैक्स स्टोर्ज कहते हैं, यह शोध बताता है कि हमारा खानपान शरीर में कोशिकाओं और जीन के स्तर पर होने वाली प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है। अब अगला सवाल यह समझना है कि डीएनए में दिखाई देने वाले ये बदलाव कितने समय तक बने रहते हैं और क्या ये वास्तव में लंबे समय में स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।

वीगन डाइट को पहले से कई तरह से फायदेमंद बताया जाता रहा है, पर विटामिन बी12 और कुछ पोषक तत्वों की कमी को लेकर चिंताएं हैं जिसपर भी ध्यान देना जरूरी है। अपनी सेहत के हिसाब से वीगन डाइट चुनने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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स्रोत:
A Vegan Diet Epigenetically Modulates Inflammatory Pathways and Biological Aging: Genome‐Wide DNA Methylation Analysis of a One‐Month Isocaloric Vegan Versus Meat‐Rich Dietary Intervention


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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