वीगन डाइट लेने वालों की सेहत पर इसका असर
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एक महीने में वीगन डाइट का सेहत पर असर
क्या सिर्फ चार हफ्ते खाने की प्लेट में बदलाव करने से शरीर के अंदर की कहानी बदल सकती है? सुनने में यह बात थोड़ी हैरान करने वाली लगती है, लेकिन अध्ययन ने इसी सवाल को लेकर कुछ दिलचस्प संकेत दिए हैं।
शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया कि अगर हम सिर्फ एक महीने के लिए मांस, दूध और दूसरे डेयरी उत्पादों को छोड़कर पूरी तरह वीगन डाइट अपना लेते हैं, तो उसके शरीर में ऐसे बदलाव दिखाई दे सकते हैं जो कई बीमारियों की जड़ माने जाने वाले इंफ्लेमेशन को कम करने के साथ जैविक उम्र बढ़ने की रफ्तार को धीमा कर सकता है।
- एक महीने तक इस तरह की डाइट लेने वाले प्रतिभागियों के खून के सैंपल और डीएनए की जांच की गई तो इसके परिणाम काफी आश्चर्यजनक रहे।
- वीगन डाइट लेने वाले लोगों में ऐसे संकेत मिले जो बताते हैं कि इससे शरीर की बीमारियों से लड़ने क्षमता में तो सुधार हुआ ही साथ ही शरीर में सूजन से जुड़ी गतिविधियां भी कम हुईं।
- इतना ही नहीं कुछ ऐसे जीन की गतिविधि में भी बदलाव देखा गया जो कैंसर से जुड़ी प्रक्रियाओं, कोलेस्ट्रॉल, इंसुलिन के इस्तेमाल और डीएनए की मरम्मत से संबंधित होती हैं।
वीगन डाइट का सेहत पर देखा गया बेहतर असर
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इस अध्ययन में शोधकर्ता यह समझना चाहते थे कि क्या खाने की आदत बदलने से बहुत कम समय में शरीर के अंदर कोशिकाओं के स्तर पर बदलाव शुरू हो सकते हैं?
अध्ययन में पाया गया कि वीगन डाइट लेने वाले लोगों में ऐसे जैविक संकेत मिले जो सेहत के लिए बहुत लाभकारी हो सकते हैं। इसमें वीगन डाइट का संबंध शरीर में उन जीन्स की गतिविधियों में कमी से पाया गया, जो कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। इसके अलावा, कुछ ऐसे आनुवंशिक बदलाव भी दिखे जो जैविक उम्र बढ़ने की रफ्तार को कम करने में मददगार हो सकते हैं।
अध्ययन में क्या पता चला?
मेडकॉम जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 48 वयस्कों को दो समूहों में बांटा। एक समूह को एक महीने तक वीगन डाइट दी गई, जबकि दूसरे समूह को मांस से भरपूर डाइट दी गई। दोनों ग्रुप की डाइट में लगभग समान मात्रा में कैलोरी रखी गई थी। इसका मकसद यह समझना था कि अगर शरीर में कोई बदलाव दिखाई दे तो वह सिर्फ वजन कम होने की वजह से न हो।
- अध्ययन शुरू होने से पहले और एक महीने बाद सभी प्रतिभागियों के खून के सैंपल लिए गए। इसके बाद वैज्ञानिकों ने उनके डीएनए में होने वाले बदलावों की जांच की।
- नतीजों में पाया गया कि वीगन डाइट लेने वालों में शरीर में सूजन बढ़ाने वाली कुछ कोशिकाओं की संख्या कम हुई। वहीं ऐसी कोशिकाओं की संख्या बढ़ी, जो इम्यून सिस्टम को संतुलित रखने में मदद करती हैं।
- मांसहार या डेयरी उत्पाद न लेने का संबंध कुछ ऐसे जीन की गतिविधि कम होने में भी दिखा जो कैंसर से जुड़ी प्रक्रियाओं को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
- शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बेहतर रखने, इंसुलिन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया सुधारने और डीएनए की मरम्मत वाले जीन की गतिविधियों में सुधार देखा गया।
वीगन डाइट का बायोलॉजिकल एज पर असर
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वीगन डाइट से शरीर की उम्र भी धीमी हुई
वीगन डाइट को लेकर एक महीने के अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 'बायोलॉजिकल एज क्लॉक' का इस्तेमाल करके ये भी जाना कि इस डाइट से शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। 'बायोलॉजिकल एज क्लॉक' की मदद से डीएनए के बदलावों के आधार पर यह अनुमान लगाया जाता है कि शरीर अंदर से कितनी तेजी से बूढ़ा हो रहा है।
अगर किसी व्यक्ति की जैविक उम्र उसकी वास्तविक उम्र से ज्यादा हो, तो यह भविष्य में कई बीमारियों का जोखिम बढ़ने का संकेत हो सकता है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
शोधकर्ताओं ने खुद माना है कि यह अध्ययन छोटा था, इसलिए यह साबित करने के लिए कि वीगन डाइट वास्तव में लंबे समय में बीमारियों का जोखिम कम करती है या नहीं, हमें और ज्यादा लोगों पर और लंबे समय तक अध्ययन करने की जरूरत है।
अध्ययन के सह- लेखक डॉ. मैक्स स्टोर्ज कहते हैं, यह शोध बताता है कि हमारा खानपान शरीर में कोशिकाओं और जीन के स्तर पर होने वाली प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है। अब अगला सवाल यह समझना है कि डीएनए में दिखाई देने वाले ये बदलाव कितने समय तक बने रहते हैं और क्या ये वास्तव में लंबे समय में स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।
वीगन डाइट को पहले से कई तरह से फायदेमंद बताया जाता रहा है, पर विटामिन बी12 और कुछ पोषक तत्वों की कमी को लेकर चिंताएं हैं जिसपर भी ध्यान देना जरूरी है। अपनी सेहत के हिसाब से वीगन डाइट चुनने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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स्रोत:
A Vegan Diet Epigenetically Modulates Inflammatory Pathways and Biological Aging: Genome‐Wide DNA Methylation Analysis of a One‐Month Isocaloric Vegan Versus Meat‐Rich Dietary Intervention
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