वायु प्रदूषण का सेहत पर असर
- फोटो : Freepik.com
अस्पतालों में बढ़ रहे हैं मरीज
अमर उजाला से बातचीत में इंटेंसिव केयर के डॉक्टर भूपेंद्र मिहिर कहते हैं, खराब वायु गुणवत्ता महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है, विशेष रूप से कमजोर समूहों जैसे बच्चों-बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर इसका और भी असर देखा जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में ओपीडी में श्वसन संबंधी मामलों में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। कई मरीज सांस लेने, फेफड़ों से संबंधित समस्याओं, गले में जलन, थकान और सिरदर्द की शिकायत के साथ अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।
प्रदूषण का बढ़ता हुआ स्तर सिर्फ सांस की दिक्कतों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके कारण हृदय रोग और कैंसर तक का खतरा रहता है जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत है।
बच्चों की सेहत पर वायु प्रदूषण का खतरा
- फोटो : Freepik.com
बच्चों की सेहत पर प्रदूषण का असर
बाल रोग विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों की सेहत के लिए प्रदूषण को साइलेंट किलर माना जाता रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनियाभर में हर साल करीब 6 लाख से ज्यादा बच्चे प्रदूषित हवा की वजह से सांस से जुड़ी बीमारियों का शिकार होते हैं।
भारत में स्थिति और भी चिंताजनक है, यहां दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे बड़े शहरों की हवा बच्चों के फेफड़ों को बुरी तरह से प्रभावित कर रही है।
दिल्ली में प्रदूषण की मार
- फोटो : Adobe Stock
शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर असर
डॉक्टर बताते हैं, बच्चों का शरीर विकासित हो रहा होता है। 3 साल से कम उम्र के बच्चें के फेफड़े और इम्यून सिस्टम पूरी तरह मजबूत नहीं होते। ऐसे में प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण पीए2.5 और सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे जहरीली गैसे श्वसन रोगों के खतरे को कई गुना तक बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
प्रदूषण का असर सिर्फ फेफड़ों पर ही नहीं, बल्कि बच्चों के दिमाग, हृदय और मानसिक विकास पर भी पड़ता है। अध्ययनों में पाया गया है कि ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों में रहने वाले बच्चों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, बार-बार सर्दी-खांसी और तनाव-चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
प्रदूषण के कारण होने वाली समस्याएं
- फोटो : Adobe Stock
बच्चों को प्रदूषण से बचाने के उपाय जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन बच्चों का बचपन लगातार प्रदूषित वातावरण में बीतता है, उनके फेफड़े उम्र के साथ कमजोर होते जाते हैं। इसके अलावा ऐसे बच्चों में आगे चलकर दिल की बीमारी, स्ट्रोक और क्रॉनिक लंग डिजीज का खतरा हो सकता है।
डॉक्टर्स की सलाह है कि बच्चों को प्रदूषण से बचाने के लिए घर और स्कूल दोनों जगह सावधानी बरती जाए। बाहर खेलते समय मास्क पहनाना, प्रदूषण वाले दिनों में आउटडोर गतिविधियों को कम करना और घर में वातावरण को स्वच्छ रखना इन दिनों सभी के लिए जरूरी है।
----------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।