अनजान शहर में जिंदगी की नई शुरुआत हुई, तो समस्याएं भी शुरू हुईं। बच्चों के लिए स्कूल कहां हो? टीचर कैसे मिले? स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां और साथ में उनके खेलने-कूदने के साधन। ऐसे में अब ऑनलाइन मिल रही सलाह वरदान की तरह लग रही है।
पहले बच्चों की देखभाल के लिए घर में बड़े-बुजुर्ग होते थे। उनके अनुभव का असर बच्चों के विकास पर पड़ता था, मगर अब कामकाज की वजह से लोग घर से दूर रहने लगे हैं। संयुक्त परिवार रहा नहीं और एकल परिवार में भी सिर्फ पति-पत्नी और बच्चा। माता-पिता कामकाजी हैं, तो बच्चों की परवरिश की चिंता रहती ही है। परवरिश से जुड़ी सलाह तो सखी-सहेलियां भी देती हैं, मगर आज हर कोई व्यस्त है और हर किसी पर आंख बंद कर भरोसा भी नहीं कर सकते। दादी-नानी अनुभव के टिप्स देती थीं, मगर एकल परिवार की वजह से अब इससे भी हम वंचित होते जा रहे हैं। बच्चों की परवरिश में अगर बड़े-बुजुर्ग दखल देना चाहें, तो आज की पीढ़ी को उन पर भरोसा ही कहां है? अनजान शहर में जिंदगी की नई शुरुआत हुई, तो समस्याएं भी शुरू हुईं। ऐसे में अब ऑनलाइन मिल रही सलाह वरदान की तरह लग रही है। आभासी दुनिया के काउंसलर हर तरह से आपकी मदद करने को तैयार हैं।
पिछले कुछ सालों में ऑनलाइन पेरेंटिंग एक नए प्रोफेशन की तरह उभर कर आया है। जहां बड़े-बड़े प्रोफेशनल्स आपकी मदद के लिए आगे आ रहे हैं। आपके बच्चे को भरपूर पोषण मिले, क्लास का होमवर्क कराने से लेकर उनकी स्कूलिंग तक के लिए ये मदद के लिए तैयार हैं। तमाम वेबसाइट्स, ब्लॉगर्स और मोबाइल एप्लिकेशंस हैं, जो बच्चों की परवरिश में मदद कर पेरेंट्स और बच्चों के बीच बॉडिंग बढ़ा रहे हैं। बेशक बच्चों के लिए दादी-नानी किसी काउंसलर से कम नहीं थीं और उनकी जगह कोई और नहीं ले सकता, लेकिन वक्त की मांग को देखते हुए प्रोफेशनल काउंसलर ने ली है। बच्चों से जुड़ा कोई भी सवाल आप इनसे ऑनलाइन पूछ सकती हैं और ऑनलाइन जवाब पा सकती हैं। इतना ही नहीं, ऐसे भी तमाम ऐप हैं, जिन्हें मोबाइल में डाउनलोड करने के बाद आप अपने बच्चे की रोजाना की एक्टिविटी जान सकती हैं या उन्हें किसी एक्टिविटी से जोड़ सकती हैं।
टिफिन एट्सेटरा
Tiffin etc.
स्वाद से भरपूर पोषणयुक्त भोजन बच्चों के केवल स्वाद संबंधी जरूरतों को ही पूरा नहीं करता, बल्कि उनके विकास के लिए जरूरी है। बच्चों को सही पोषण देने के लिए पेरेंट्स हर संभव कोशिश करते हैं, मगर बच्चों को बाहर की चीजें पसंद आती हैं। बच्चों के लिए वे रुचिकर भोजन बनाना तो चाहते हैं, मगर समय की कमी की वजह से वे ऐसा नहीं कर पाते हैं। खाने की रुचि कम होने की एक वजह यह भी है कि उनका खाना सुबह छह बजे पैक होता है, जो खाने के वक्त तक ठंडा हो चुका होता है। इस वजह से वे अनहेल्दी फूड खाने की तरफ आकर्षित होते हैं। इसी काम को आसान बनाने के लिए नीति सरीन ने ‘टिफिन एट्सेटरा’ नाम से एक स्टार्टअप शुरू किया है, जो स्कूलों में बच्चों को हेल्दी टिफिन उपलब्ध्ा करवाती हैं। हालांकि यह सर्विस दिल्ली और एनसीआर के कुछ खास स्कूलों में ही उपलब्ध है, मगर यह बात तय है कि कुछ लोग इस दिशा में भी सोचने लगे हैं। इस सर्विस से पेरेंट्स की चिंता अब कम हो सकती है।
टिफिन एट्सेटरा की फाउंडर नीति सरीन कहती हैं, ‘मेरे दो छोटे-छोट बच्चे थे। उनके खाने को लेकर अलग-अलग तरह की प्राथमिकताएं थीं। मैं चाहती थ्ाी कि उनके खाने में उनकी पसंद की सारी चीजें हों, मगर पोषकता से मैं कोई समझौता नहीं करना चाहती थी। पसंद के हिसाब से हर खाने में पोषकता सुनिश्चित करना एक चुनौती थी कि वे उनकी पोषण संबंधी जरूरत के मुताबिक हों और थोड़ा रचनात्मक तरीके के भी हों, ताकि उन्हें वे पसंद करें। इसके बाद, मैं नियमित रूप से पेरेंटिंग मैग्जीन में अपने भोजन तैयार करने संबंधी निपुणता के बारे में लिखने लगी कि कैसे बच्चों के लिए नियमित रूप से रुचिपूर्ण भोजन तैयार किया जाए। और इस प्रकार यह विचार मेरे दिमाग में आया कि इस दिशा में एक कंपनी का संचालन किया जाए आैर यही से आइडिया आया कि स्कूलों में बच्चों को हेल्दी फूड उपलब्ध करवाया जाए। आज हम जिन स्कूलों में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की सुविधा मुहैया करा रहे हैं, उन बच्चों के माता-पिता बहुत खुश हैं। उनको खुशी है कि उनके बच्चों को स्कूल में पोषण से भरपूर, ताजा और अच्छी तरह से पकाया गया भोजन प्राप्त होता है। यहां कुछ स्कूल हैं, जो इस तरह की सुविधा मुहैया कराते हैऔर उनकी इस सुविधा से बच्चों के माता-पिता खुश होते हैं।’ टिफिन एट्सेटरा पिछले दो दशक से पोषकयुक्त भोजन की सुविधा मुहैया करा रहा है। 2000 टिफिन प्रतिमाह से शुरुआत करने वाली यह कंपनी, अब 8 शैक्षणिक संस्थाओं में प्रतिमाह एक लाख टिफिन फूड उपलब्ध कराते हैं। जो पिछले वर्ष के मुकाबले 40 प्रतिशत ज्यादा है।
बेबीचक्र
Babychakra
आपके बच्चे के लिए कौन-सा प्रोडक्ट बेहतर है? कौन-सा डे केयर सही है? बीमार होने पर बच्चे को किस हॉस्पिटल में ले जाना चाहिए? पेरेंटिंग आैर प्रेग्नेंसी से संबंधित कोई भी सवाल हो, आपको ‘बेबीचक्र’ पर हर सवाल का जवाब मिलेगा। जिन महिलाओं के पास परिवार में कोई यह सब बताने वाला नहीं होता है, तो उन्हें 'बेबीचक्र' से काफी सहूलियत होती है। बच्चे के लिए बेस्ट डॉक्टर्स, हॉस्पिटल, प्ले स्कूल, एक्टिविटी सेंटर और भी तमाम तरह की चीजें खोजने और वहां तक जाने में पेरेंट्स की मदद करती है यह वेबसाइट। ‘बेबीचक्र’ की संस्थापक नैय्या सग्गी कहती हैं, 'पेरेंटिंग का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने का हमारा मकसद माता-पिता के लाइफ को आसान बनाना है। खासतौर से कामकाजी मांओं की। एकल परिवार आैर उस पर से दोनों का वर्किंग होना, इसका सबसे ज्यादा असर बच्चांे के संपूर्ण विकास पर पड़ता है। कुछ मांआें को जानकारी भी नहीं होती कि उनके बच्चे के लिए क्या जरूरी है आैर क्या नहीं? परवरिश्ा से संबंधित कई ऐसे सवाल हैं, जिनके बारे में महिलाएं जानना चाहती हैं आैर वे अपने सवाल यहां पूछती भी हैं। जैसे-बच्चे को बुखार है, उल्टियां हो रही हैं, तो क्या करें? बच्चको खाने में क्या दें? मालिश कैसे की जाए? इस तरह के सवाल पूछे जाते हैं, जिनका जवाब विशेषज्ञों द्वारा दिया जाता है। इसके लिए हम किसी से कोई फीस नहीं लेते हैं। महिलाएं बच्चे से ही नहीं, प्रेग्नेंसी के दौरान खुद से जुड़े सवाल और परेशानियां भी यहां शेयर करती हैं। देश-विदेश की करीब एक मिलियन से ज्यादा मांएं हर महीने इस प्लेटफॉर्म से जुड़कर अपने अनुभव शेयर करती हैं। बच्चे की परवरिश और प्रेग्नेंसी के दौरान के अनुभव को वह यहां बांटती हैं। साथ ही बेबी की परवरिश से जुड़े घरेलू नुस्खे बताती हैं।'
OckyPocky
आज के मॉडर्न बच्चे चलने से पहले गैजेट्स को हैंडल करना सीख लेते हैं। फोन से खेलना, पूरे दिन वीडियो देखना, ये आज के बच्चों में आम बात है। कुछ पेरेंट्स तो खुद की परेशानी को कम करने के लिए उन्हें फोन आदि दे देते हैं, ताकि उनके बच्चे व्यस्त रहें। हालांकि, बच्चे की इस आदत को लेकर कुछ पेरेंट्स ज्यादा चिंतित भी होते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि बच्चे को कैसे समझाएं? अब जब बच्चे गैजेट्स को लेकर इतने दीवाने हो गए हैं, तो क्यों न इसी माध्यम से उन्हें सही दिशा दें। आपके बच्चे के स्क्रीन से इस लगाव को पोजिटिव स्तर पर मोड़ने के लिए एक नया प्लेटफॉर्म है OckyPocky। आप अपने बच्चे को हेल्दी तरीके से पढ़ना सीखा सकती हैं। दरअसल, यह एक मोबाइल ऐप है, जिसमें आपके और आपके बच्चे को सीखाने के लिए कई सारे वीडियो के कलेक्शन हैं। प्री स्कूल जाने से पहले के स्टेप के लिए जो चीजें बच्चों को सीखनी चाहिए, उसे वीडियो के रूप में देखकर बच्चे बहुत कुछ सीख सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म को स्टार्ट करने वाले अमित अग्रवाल का कहना है कि मैं चाहता था कि जो बच्चे मोबाइल आदि पर गेम खेलना पसंद करते हैं, उनके लिए यहां कुछ ऐसा होना चाहिए, जिससे वे कुछ सीख भी सकें। इसलिए मैंने इस लर्निंग ऐप का निर्माण किया। यहां नर्सरी की कुछ कविताएं हैं, प्रेरक कहानियां हैं, जिसे बच्चे आसानी से कुछ सीख सकते हैं। यही नहीं, आपका बच्चा कितनी देर तक स्क्रीन पर रहे, यह टाइम भी आप सेट कर सकती हैं। कुछ वीडियो को डाउनलोड करके आप आॅफलाइन भी देख्ा सकती हैं।’ यह ऐप दो से छह साल तक की उम्र के बच्चे के तैयार किया गया है।
Health set go
ज्यादातर समय हमारा ध्यान बच्चों की पढ़ाई या उनके अन्य एक्टिविटीज पर ही रहता है। इस क्रम में हम उसकी फिटनेस पर ध्यान नहीं देते। ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं होता कि बढ़ते बच्चों के शारीरिक आैर मानसिक विकास के लिए किस तरह का न्यूट्रीशन चाहिए? रोजाना उन्हें कितनी कैलोरी की जरूरत है? पेरेंट्स की इन्हीं जिज्ञासा को दूर करने के लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल है ‘हेल्थसेटगो’। यह एक नया उद्यम है, जो 100 से ज्यादा स्कूलों के साथ कार्य कर रहा है और एक ऑनलाइन ट्रेकर की मदद से सभी छात्रों को फ्री में उनके स्वास्थ्य की गहराई से जांच उपलब्ध कराता है। यहां माता पिता बच्चे के शारीरिक स्वास्थ्य की देख-रेख कर सकते हैं। हेल्थसेटगो माता-पिता और खासकर माताओं को बच्चों का अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।
Plowns
हर बच्चा रोज कुछ-न-कुछ नई चीजें करता रहता है। जिनमें ड्रॉइंग करना (चित्रकारी बनाना), लिखना और कुछ-न-कुछ याद करना शामिल है। लेकिन कुछ समय बाद बच्चे इन चीजों को भूल जाते हैं। यहां तक कि अध्यापकों और परिवार के सदस्यों को भी पता नहीं रहता कि उनका बच्चा इन सब चीजों में निपुण भी है। अगर आप अपने बच्चे से जुड़ी कोई मेमोरी सुरक्षित करना चाहती हैं, तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म प्लाउन्स (Plowns) की मदद ले सकती हैं। यहां दुनिया भर की माताओं को एक साथ आने का मंच मिलता है और उनके बच्चे द्वारा बनाए गई अनोखी चीजों को डिजिटल रूप से एकत्रित करने का मौका मिलता है। इसका उद्देश्य रोजाना प्रशंसा के माध्यम से बच्चों में गर्व और आत्म-विश्वास भरना है। यही नहीं बच्चों को पढ़ाने के लिए कुछ लर्निंग वेबसाइट्स भी हैं, जिसकी मदद पेरेंट्स लेने लगे हैं, जैसे Nayi dish, flintobox, smartivity, MyCity4Kids' आदि। स्कूल कनेक्ट्स के अलावा जस्ट दाखिला (justdakhila) वेबसाइट भी है, जहां एडमिशन संबंधी जानकारी मिलती है।
देखा जाए, तो शायद एकांकी परिवार होने के कारण वर्किंग पेरेंट्स की टेक्नोलॉजी पर निर्भरता बढ़ गई है। या यों कहें कि यह निर्भरता मजबूरी बन गई है। ऐसे में पेरेंटिंग के लिए ऑनलाइन गाइडलाइंस मिलना काफी राहत भरा है। इसमें इमोशंस का भी इनवॉल्वमेंट रहता है और पर्सनल लेवल पर खुद उसमें शरीक रहते हैं।