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स्तनपान कराती महिला की तस्वीर पर बहस क्यों?

Tue, 06 Mar 2018 10:03 AM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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lifestyle - फोटो : GRIHALAKSHMI MAGAZINE
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केरल में प्रकाशित होने वाली गृहलक्ष्मी मैगजीन के कवर पर मॉडल गिलु जोसफ बच्चे को छाती से लगाए कैमरे की ओर देख रही हैं। इस तस्वीर के साथ लिखा है, "माएं केरल से कह रही हैं - घूरो मत, हम स्तनपान कराना चाहती हैं।" माना जा रहा है कि पहली बार किसी भारतीय मैगजीन ने किसी महिला की स्तनपान कराने की तस्वीर को कवर फोटो बनाया है लेकिन ये मॉडल खुद मां नहीं है, इस बात ने असहज स्थिति पैदा कर दी है और बहस छेड़ दी है।

गृहलक्ष्मी के संपादक ने कहा कि मैगजीन माओं की सार्वजनिक जगहों पर स्तनपान कराने की जरूरत के प्रति लोगों को जागरूक करना चाहती थी। मोंसी जोसफ ने बीबीसी से कहा, "एक महीने पहले, एक आदमी ने स्तनपान कराती अपनी पत्नी की तस्वीर फेसबुक पर शेयर की थी। वो चाहता था कि सार्वजनिक जगहों पर मांओं को स्तनपान कराने देने को लेकर बहस छिड़े लेकिन एक सकारात्मक बहस छिड़ने के बजाए उस महिला की पुरुषों और महिलाओं ने साइबर बुलिंग कर दी इसलिए हमने फैसला किया कि स्तनपान के इस मुद्दे को हम अपने ताजा अंक में उठाएंगे।"

भारत में पारंपरिक साड़ी पहनने वाली कई महिलाएं सार्वजनिक जगहों पर स्तनपान कराती हैं, वो ब्लाउज़ की मदद से ऐसा कर पाती हैं लेकिन जो महिलाएं साड़ी नहीं पहनना चाहतीं, उनके पास ये विकल्प नहीं होता। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर मैगजीन और मॉडल के समर्थन में पोस्ट किया है।

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लेकिन स्तनपान कराने वाली असल मां के बजाए एक मॉडल को फिचर करने के चलते इस अभियान को आलोचना का सामना भी करना पड़ रहा है। ब्लॉगर अंजना नायर ने एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा, "बच्चे को स्तनपान कराती असल मां को अंदर के पन्नों में जगह देने और एक मॉडल को बच्चे और वस्त्रहीन स्तनों के साथ कवर पर पेश करने का फैसला, सस्ती सनसनी और शोषण है।"

लेकिन गिलु जोसफ ने मैगजीन पर पोस करने के अपने फैसले का बचाव किया है। उन्होंने बीबीसी से कहा, "मुझे पता था कि इसके लिए मुझे बहुत आलोचना झेलनी पड़ेगी, लेकिन मैंने उन मांओं के लिए खुशी से ये फैसला लिया जो गर्व और आजादी से स्तनपान कराना चाहती हैं।"

एक मैगजीन ने उनके हवाले से कहा, "अगर आप अपने बच्चों को दूध पिलाते हैं तो कौनसा भगवान नाराज होगा?" केरल के जाने-माने लेखक पॉल जकारिया ने बीबीसी से कहा कि उन्हें लगता है कि ये कवर "पाथ-ब्रेकिंग कदम" था।

"इससे सार्वजनिक जगहों पर स्तनपान कराने को लेकर कोई क्रांति तो नहीं आएगी, लेकिन ये एक अहम कदम है। मुझे उम्मीद है कि इसके लिए हमेशा की तरह संपादक को माफी नहीं मांगनी पड़ेगी।" सार्वजनिक जगहों पर स्तनपान कराना दुनिया भर में एक विवादास्पद मुद्दा है।

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स्टॉकलेंड में एक सर्वे बताता है कि एक चौथाई से अधिक माओं ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक जगहों पर स्तनपान कराने में "असहज" महसूस हुआ। पिछले साल एक स्टडी से पता चला कि ब्रिटेन में स्तनपान कराने की दर दुनिया में सबसे कम थी।

सिर्फ 200 में से एक महिला - या 0.5% - एक साल बाद कुछ हद तक स्तनपान करा रही थीं। जबकि जर्मनी में ये आंकड़ा 23%, अमरीका में 27%, ब्राज़िल में 56%, सेनेगल में 99% था। 

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