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Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti 2024: आज है शिवाजी महाराज की जयंती? पढ़ें उनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें

Mon, 19 Feb 2024 09:48 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हिंदुओं पर संकट आया तो शिवाजी महाराज ने महज 15 वर्ष की आयु में हिंदू साम्राज्य को स्थापित करने के लिए पहला आक्रमण किया।
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Chhatrapati Shivaji maharaj Jayanti 2024 - फोटो : Amar ujala
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विस्तार
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Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti 2024: मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती फरवरी माह में मनाई जाती है। शिवाजी भारत के वीर सपूतों में से एक हैं, जिनकी शौर्यगाथा इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई है। छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता की मिसाल केवल महाराष्ट्र में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में दी जाती है और गर्व के साथ उनका नाम लिया जाता है। शिवाजी महाराज एक देशभक्त के साथ ही एक कुशल प्रशासन और साहसी योद्धा थे। उन्होंने मुगलों को परास्त किया था। राष्ट्र को मुगलों के चंगुल से आजाद कराने के लिए उन्होंने मराठा साम्राज्य की नींव रखी।

इस लेख में पढ़िए छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती और शिवाजी महाराज के जीवन से जुड़ी रोचक बातें, जो इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गई।

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शिवाजी महाराज का जीवन परिचय
 

शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को मराठा परिवार में हुआ था। छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम शिवाजी भोंसले था। उनके पिता शाहजी भोंसले और माता जीजाबाई थीं। उस दौर में भारत मुगल आक्रमणकारियों से घिरा हुआ था। दिल्ली सल्तनत ने दिल्ली समेत पूरे भारत पर कब्जा कर लिया था।


मुगलों के खिलाफ शिवाजी का पहला युद्ध


हिंदुओं पर संकट आया तो शिवाजी महाराज ने महज 15 वर्ष की आयु में हिंदू साम्राज्य को स्थापित करने के लिए पहला आक्रमण किया। शिवाजी ने बीजापुर पर हमला किया और कुशल रणनीति व गोरिल्ला युद्ध के जरिए बीजापुर के शासक आदिलशाह को मौत के घाट उतार दिया। साथ ही बीजापुर के चार किलों पर कब्जा कर लिया था।

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छल से शिवाजी को बनाया था बंदी


जब शिवाजी के पराक्रम, गोरिल्ला युद्ध में पारंगत होने और युद्ध में कुशल रणनीति से जुड़े किस्से बढ़ने लगे तो औरंगजेब डर गया और संधि वार्तालाप के लिए शिवाजी महाराज को आगरा बुलाया। औरंगजेब ने छल से शिवाजी को बंदी तो बना लिया लेकिन वह ज्यादा दिन उनके कब्जे में न रहे और फल की टोकरी में बैठकर मुगल बंदीगृह से भाग निकले। इसके बाद उन्होंने मुगल सल्तनत के खिलाफ जंग छेड़ दी।


मराठा साम्राज्य के सम्राट 

 

1674 में उन्होंने पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी थी। इस दौरान उन्हें औपचारिक रूप से छत्रपति या मराठा साम्राज्य के सम्राट के रूप में ताज पहनाया गया। उस दौर में फारसी भाषा का ज्यादा उपयोग होता था, इसलिए शिवाजी ने अदालत और प्रशासन में मराठी व संस्कृत के उपयोग को बढ़ावा दिया। बाद में 3 अप्रैल 1680 को गंभीर बीमारी के कारण शिवाजी महाराज ने पहाड़ी दुर्ग राजगढ़ में अपने प्राण त्याग दिए। उनके योगदान के कारण देश के वीर सपूतों में से एक छत्रपति शिवाजी महाराज को 'मराठा गौरव' कहा जाता है।

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