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Chhath Puja 2025: छठ पूजा के ठेकुआ प्रसाद का महत्व, जानिए महाप्रसाद का इतिहास

Sat, 25 Oct 2025 03:12 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

Chhath Puja 2025 Thekua Prasad: जानिए क्यों छठ पूजा में ठेकुआ को महाप्रसाद कहा जाता है। इसके इतिहास, औषधीय महत्व और आस्था से जुड़ी परंपरा को समझें।
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Thekua - फोटो : Adobe stock
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विस्तार
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Chhath Puja 2025 Thekua Prasad: छठ पूजा केवल सूर्य और प्रकृति की आराधना नहीं, बल्कि सादगी, शुद्धता और भारतीयता का प्रतीक है। इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है ठेकुआ प्रसाद, जिसे “महाप्रसाद” कहा जाता है। आटे, गुड़ और घी से बना यह पारंपरिक व्यंजन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसमें आस्था, परंपरा और औषधीय महत्व तीनों का संगम मिलता है। ठेकुआ छठ पूजा का आत्मा स्वरूप महाप्रसाद है। यह सिखाता है कि सादगी में भी भक्ति का स्वाद छिपा होता है, और घर की मिट्टी से बने आटे में भी सूर्य की दिव्यता घुली होती है। यह प्रसाद केवल पेट नहीं भरता, यह परंपरा, पीढ़ी और आस्था को जोड़ता है, यही इसकी असली महिमा है।

 

ठेकुआ का इतिहास

ठेकुआ का इतिहास वैदिक काल तक जाता है। माना जाता है कि जब लोग खेतों में सूर्य की उपासना करते थे, तब प्राकृतिक और बिना तेल वाले भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता था। धीरे-धीरे यह परंपरा बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल के तराई क्षेत्रों में “छठ प्रसाद” के रूप में स्थापित हुई। पुराने लोकगीतों में भी इसका उल्लेख मिलता है,

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“ठेकुआ बना नै सखी, अरघे में धरा नै...”

इससे पता चलता है कि ठेकुआ केवल भोजन नहीं, बल्कि श्रद्धा और मातृत्व की अभिव्यक्ति है।


क्यों कहा जाता है ठेकुआ को ‘महाप्रसाद’

छठ में व्रती स्वयं अपने हाथों से ठेकुआ बनाते हैं बिना किसी बाहरी संपर्क या अशुद्धता के। यह प्रसाद सूर्य देव को अर्पित किया जाता है और फिर परिवार व समाज में वितरित होता है। इसीलिए इसे “महाप्रसाद” कहा जाता है, क्योंकि इसमें स्वयं सूर्य की आशीर्वाद ऊर्जा समाहित मानी जाती है। ठेकुआ घर की रसोई में नहीं, बल्कि स्वच्छ और पवित्र स्थल पर बनता है> यह भाव बताता है कि आस्था का स्वाद हमेशा पवित्रता से जन्म लेता है।

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ठेकुआ और सूर्य की ऊर्जा

छठ व्रत का सबसे अहम हिस्सा है सूर्य को अर्घ्य देना और प्रसाद अर्पित करना। ठेकुआ का सुनहरा रंग सूर्य की रश्मियों का प्रतीक माना जाता है। जिस तरह सूर्य हर जीव को ऊर्जा देता है, वैसे ही यह प्रसाद सकारात्मक ऊर्जा और शांति का प्रतीक है।

 


ठेकुआ की सामग्री और औषधीय लाभ

ठेकुआ बनाने के लिए गेहूं का आटा, गुड़, घी, नारियल, सौंफ और इलायची की आवश्यकता होती है। इन सबका संयोजन शरीर को पोषण देता है।

  • गुड़: आयरन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर; खून की सफाई और ऊर्जा में मददगार।

  • सौंफ और इलायची: पाचन शक्ति को बढ़ाते हैं, गैस और अपच से राहत देते हैं।

  • घी: शरीर को ताकत देता है, जो उपवास के बाद ऊर्जा संतुलन में सहायक है।

  • गेहूं: कार्बोहाइड्रेट और फाइबर से युक्त, शरीर में स्थायी ऊर्जा देता है।

इस प्रकार ठेकुआ प्राकृतिक एनर्जी बार की तरह काम करता है जो कि शुद्ध, पौष्टिक और पवित्र है।

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