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Chhath Puja 2025: गुड़, ठेकुआ और अर्घ्य, छठ प्रसाद के औषधीय गुण जानकर रह जाएंगे हैरान!

Sat, 25 Oct 2025 12:12 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Chhath Puja 2025: जानिए कैसे छठ पूजा केवल आस्था नहीं बल्कि विज्ञान और स्वास्थ्य से जुड़ा पर्व है। क्या है सूर्यस्नान, उपवास और प्रसाद के पीछे छिपे औषधीय रहस्य।

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Chhath Puja 2025 - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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भारत की हर परंपरा के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण छिपा है। छठ पूजा प्रकृति, सूर्य और जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व है। यह पर्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक और औषधीय रूप से भी अत्यंत लाभकारी है। यह पर्व शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने का अद्भुत माध्यम है, जहां उपवास, सूर्यस्नान और स्वच्छता का अनुशासन एक तरह से प्राकृतिक डिटॉक्स थेरेपी बन जाता है। छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक जीवनशैली है। यह पर्व हमें बताता है कि प्रकृति से जुड़ना ही असली चिकित्सा है। 

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सूर्य उपासना का वैज्ञानिक कारण

छठ में किए जाने वाले सूर्य अर्घ्य का वैज्ञानिक आधार बेहद गहरा है। सूर्य जीवन का स्रोत है और उसकी किरणों से विटामिन D प्राप्त होता है जो हड्डियों, त्वचा और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए अनिवार्य है। प्रातः और सायं काल में सूर्य की रश्मियों में पराबैंगनी किरणों की मात्रा संतुलित होती है, जिससे त्वचा को लाभ मिलता है और शरीर में मनोवैज्ञानिक संतुलन बनता है।


शरीर की नैचुरल हीलिंग प्रक्रिया

छठ व्रती तीन दिनों तक उपवास रखते हैं, और केवल जल या प्रसाद के रूप में प्राकृतिक खाद्य लेते हैं। यह प्रक्रिया शरीर को डिटॉक्सिफाई करती है, पाचन तंत्र को विश्राम देती है और मेटाबॉलिज्म सुधारती है। आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत और इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है।

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जल और मिट्टी का औषधीय प्रभाव

छठ के दौरान व्रती नदी, तालाब या घाट के किनारे स्नान करते हैं और वहीं पूजा करते हैं। यह केवल आस्था नहीं, बल्कि एक तरह की नेचुरल थेरेपी है। नदी के जल में मौजूद खनिज तत्व (minerals) त्वचा और शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। मिट्टी पर नंगे पैर चलने से ग्राउंडिंग इफेक्ट मिलता है, जो शरीर में जमा नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालता है।

 स्वच्छता और पर्यावरणीय संतुलन

छठ पर्व में शुद्धता और सफाई का विशेष महत्व है। व्रती अपने घर और आसपास की जगहों की सफाई करते हैं। यह न केवल धार्मिक नियम है बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार भी है। छठ से पहले की सफाई हवा में धूल, बैक्टीरिया और फफूंदी की मात्रा कम करती है, जिससे मौसम बदलने के दौरान होने वाली बीमारियों का खतरा घटता है।


प्रसाद का औषधीय महत्व

छठ का प्रसाद ठेकुआ, गुड़, चावल, गन्ने का रस, अदरक, केला, नारियल, और पानी सभी प्राकृतिक तत्व हैं जिनके औषधीय गुण हैं।

  • गुड़: शरीर को आयरन देता है और खून साफ करता है।

  • ठेकुआ: गेहूं और घी से बना ऊर्जा से भरपूर स्नैक।

  • गन्ने का रस: लिवर को शुद्ध करता है।

  • अदरक और नींबू: प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।

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