भगवान श्रीकृष्ण और सुभद्रा की कथा
एक अन्य कथा के अनुसार, नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गए थे। सुभद्रा ने उनका स्वागत करते हुए तिलक लगाया और मिठाई खिलाई। इस परंपरा के चलते भी भाई दूज का पर्व मनाया जाता है।
भाई दूज के नियम और परंपरा
तिलक की परंपरा- भाई दूज पर बहनें अपने भाई को रोली, चंदन, या कुमकुम से तिलक करती हैं। कुछ जगहों पर हल्दी और चूने के मिश्रण से तिलक बनाकर भाई के माथे पर लगाया जाता है। तिलक के बाद भाई की आरती उतारी जाती है और मिठाई खिलाई जाती है।
थाल सजाना- बहनें इस दिन विशेष थाल सजाती हैं, जिसमें रोली, अक्षत (चावल), दीपक, मिठाई और नारियल रखा जाता है। इस थाल को पूजा के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
भाई को भोजन कराना- मान्यता है कि इस दिन भाई अपनी बहन के घर भोजन करे तो उसे दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए कई घरों में भाई को बहन के हाथ से बना भोजन कराया जाता है।
उपहार का आदान-प्रदान- इस दिन भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं, जो उनकी बहन के प्रति प्यार और देखभाल का प्रतीक है।
सूर्यास्त से पहले पूजा- मान्यता है कि भाई दूज की पूजा सूर्यास्त से पहले ही कर लेनी चाहिए, ताकि शुभ फलों की प्राप्ति हो।