ऑस्ट्रेलियाई हाई कमीशन के कार्यक्रम में दिखी खास झलक
बुधवार शाम नई दिल्ली में ऑस्ट्रेलियाई हाई कमीशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में ग्रेस ली ने खुद को एक “गर्वित बुनकर (Proud Weaver)” बताया। इस दौरान उनकी प्रसिद्ध फैशन कलेक्शन ‘The Guardians’ पहने नर्तक-नर्तकियां मेहमानों के बीच नृत्य करती नजर आईं, जिससे माहौल बेहद खास और कलात्मक हो गया।
कौन हैं ग्रेस लिलियन ली?
ग्रेस लिलियन ली का जन्म 1988 में ऑस्ट्रेलिया के केयर्न्स (Cairns) शहर में हुआ था। वह टॉरेस स्ट्रेट आइलैंडर समुदाय से आती हैं और एक जानी-मानी आदिवासी कलाकार, डिजाइनर और सांस्कृतिक संरक्षण की समर्थक हैं।उनका काम पहचान, जमीन से जुड़ाव, पर्यावरण, और आदिवासी संस्कृति की संप्रभुता जैसे विषयों पर आधारित है, जिसे वह आधुनिक नजरिए से पेश करती हैं।
‘Winds of Guardians’ क्या है?
भारत में प्रदर्शित किया जा रहा उनका आर्टवर्क ‘Winds of Guardians’ चार कलात्मक मूर्तियों से बना है, जो चार दिशाओं को दर्शाती हैं,
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नॉर्थ विंड
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साउथ विंड
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ईस्ट विंड
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वेस्ट विंड
इनके साथ एक सेरेमोनियल ड्रीमवीवर मास्क भी शामिल है। ग्रेस ली के अनुसार, ये मूर्तियां उनके पूर्वजों, हवाओं और यात्राओं की कहानी कहती हैं।
पूर्वजों से मिली बुनाई की कला
ग्रेस ली को बचपन से ही पारंपरिक बुनाई की कला सिखाई गई थी। यह ज्ञान उन्हें अपने समुदाय के बुजुर्गों से मिला, जो आज भी उनके काम की नींव है। उनकी कलाकृतियों में कॉटन, केन, ऐक्रेलिक शीट, शीशा और प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। वह बताती हैं कि पहले ये तकनीकें नारियल के पत्तों से की जाती थीं, जो उन्हें उनके एक बुजुर्ग चाचा ने सिखाईं।
कला उनके लिए “हीलिंग” का जरिया
ग्रेस ली का कहना है कि उनकी कला सिर्फ सुंदरता नहीं दिखाती, बल्कि आदिवासी समुदाय के अतीत के दर्द को भी दर्शाती है। उनके लिए यह रचनात्मक प्रक्रिया प्रेरणादायक और उपचार करने वाली है।
फैशन को मानती हैं संवाद का माध्यम
ग्रेस ली फैशन को सिर्फ कपड़े नहीं, बल्कि संवाद का जरिया मानती हैं। उनका मानना है कि इससे नई पीढ़ी अपनी परंपरा को नए नजरिए से देख सकती है।
ग्रेस ली की अंतरराष्ट्रीय पहचान
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2021 में ऑस्ट्रेलियन फैशन वीक में कलेक्शन पेश किया
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2024 में मशहूर डिजाइनर जीन पॉल गॉल्टियर के साथ सहयोग
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फर्स्ट नेशंस फैशन डिजाइन (FNFD) की संस्थापक
भारत को लेकर क्या बोलीं ग्रेस ली?
भारत में अपने अनुभव को लेकर ग्रेस ली ने कहा कि यहां उन्हें अपनी और ऑस्ट्रेलिया की आदिवासी संस्कृति में कई समानताएं दिखीं। उन्होंने कहा, “भारत और ऑस्ट्रेलिया की कहानियों, संस्कृति और परंपराओं में गहरा जुड़ाव है। क्रॉस-कल्चरल सहयोग वाकई शानदार होगा।”