हमारे यहां तुलसीदास को महाकवि माना गया है। लोकप्रिय महाकाव्य रामचरितमानस की रचना कर तुलसीदास ने देश के जन जन को भक्ति और नैतिक जीवन से जोड़ने का अतुलनीय प्रयास किया है। तुलसी की तरह ही यूनान और यूरोप में होमर को महाकवि का दर्जा व्याप्त है। होमर का कार्यकाल ईसा से लगभग 1000 साल पहले का था। होमर अंधे थे लेकिन तात्कालीन सभ्यता तथा संस्कृति का तात्विक चिंतन उनकी रचनाओं में मुखर रूप से देखने को मिलता है। उनके दो महाकाव्य इलियड और ओडिसी विश्व साहित्य में शोध के शाश्वत संधान हैं। यूनान के इतिहास का एक पूरा काल होमर को समर्पित है। यह संभवतया 850 ईसा पूर्व से लेकर 1194-1184 ईसा पूर्व तक है।
होमर की काव्य मीमांसा
होमर के महाकाव्य इलियड में ट्राय राज्य और ग्रीक की जनता के बीच किए गए युद्ध की विस्तार से व्याख्या की गई है। इसमें ट्राय की जीत तथा अन्य विध्वंस सहित यूनानी वीर एकलिस के शौर्य की गाथाएं शामिल की गई हैं। इलियड में देश, काल और वातावरण के साथ तत्कालीन सामाजिक परिवेश और संस्कृति का भाव व्यंजना के साथ वर्णन किया गया है। हमारे देश में तुलसी रचित रामचरितमानस एक लोकप्रिय महाकाव्य है। दशरथ नंदन राजा राम के आदर्श और उस समय की तात्कालिक परिस्थितियों का तुलसी ने अवधी भाषा में मार्मिक उल्लेख किया है। इस महाकाव्य में देश के लोग अपने जीवन से जुड़ी परेशानियों का हल चाहते हैं। उन्हें सफलता भी हाथ लगती है। रामचरितमानस की तरह ही इलियड और ओडिसी भी यूनान और यूरोप के पथ में प्रकाश डालते हैं। ओडिसी में यूनानी वीर यूलीसिस की कथा का सजीव वर्णन है। विश्व रूपक, शब्द विन्यास, भाव-संयोजन और गहन विश्लेषण के आधार पर इलियड और ओडिसी अन्य साहित्य से एक अलग शिखर पर आसीन है। आस्था और विश्वास के साथ प्रेम, घृणा, भाई चारा, राज्य, सत्ता, विकास, अर्थव्यवस्था का भी उल्लेख इसमें किया गया है।
लोकप्रिय और कल्याणकारी काव्य
माना यह भी जाता है कि यह दोनों महाकाव्य सबसे पहले मौखिक थे। इन्हें प्राचीन ग्रीस के गायक गाते थे। इसमें वह अपना शब्द भाव भी जोड़ देते थे। इसलिए यह और विविध हो गया। महाकाव्यों में नायक की परंपरा हमेशा से बलवती रही है। इससे जनमानस महाकाव्य से जुड़े रहता है। होमर की काव्य रचना का विश्लेषण किया जाएगा तो सबसे पहले उसमें मानव कल्याण और सामाजिक विकास को एक निश्वित और आदर्श मापदंड के तले ही निर्धारित किया जाएगा। महाकाव्य श्रद्धा और विश्वास का संचार करते हुए जनसमूह में लोकप्रिय हो जाते हैं। वंदनीय हो जाते हैं। ऐसे महाकाव्यों की रचना करने वाले महाकवि कहलाते हैं। होमर और तुलसीदास पश्विम और पूर्व के महाकवि हैं। इनका साहित्य चिरकाल तक मानव सभ्यता के पथ को आलोकित करता रहेगा।