प्रख्यात शास्त्रीय गायक उस्ताद राशिद खान
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मात्र 11 वर्ष की उम्र में अपना पहला लाइव कंसर्ट पेश करने वाले राशिद शान ने मुड़कर पीछे नही देखा और वे आज देश ही नही विदेशों में भी अपना अलग मुकाम बना चुके हैं। राशिद खान के कहा कि हर घराने की एक अलग खूबी है। मुझे सभी को जानना था। इसलिए मैने सभी से कुछ न कुछ सीखा है और उनका आज भी आदर करता हूं।
हमने बहुत मार खाई तभी आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं
उस्ताद राशिद खान कहते हैं कि क्लासिकल म्यूजिक की बात करें तो इसकी जडे़ं इतनी मजबूत हैं कि इसे कोई चाह कर भी हिला नहीं सकता लेकिन वेस्टर्न म्यूजिक की वजह से आजकल के बच्चों में इसका रुझान कम होता जा रहा है। इसके लिए जरूरी है कि माता पिता अपने बच्चों को क्लासिकल म्यूजिक के बारे में जानकारी दें। बच्चों की मर्जी को जानने के बाद ही मां बाप को उन्हें उस फील्ड में डालना चाहिए उनके साथ जोर जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए।
हमने बहुत मार खाई तभी आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं, लेकिन अब के बच्चों को न डांट पड़ रही है और न ही मार पड़ रही है। मुझे आज भी वह दिन याद है जब भुवनेश्वर एक कार्यक्रम से पहले कुछ समय के लिए सुस्ती के मूड में था। एक दम मेरे गुरु निसान हुसैन साहिब आए और उन्होंने एक जोरदार लात मारी। इसके बाद मेरे में इतनी चुस्ती आ गई कि मैने उस कार्यक्रम में सबसे बेहतरीन प्रस्तुति दे डाली।
उस्ताद राशिद खान की आवाज़ और मुख़्तलिफ़ अंदाज़ की तपस्या से ही उन्हें पद्मश्री सहित अनगिनत सम्मानों से नवाजा जा चुका है। ये हमारे लिए फ़ख़्र की बात है कि अमर उजाला काव्य शख़्सियत में उस्ताद राशिद ख़ान हमारे ख़ास मेहमान हैं।