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मानता हूँ

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यादों की गुल्लक में हर रोज सिक्के डालता हूँ ,
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ये मानता हूँ,
जब आएगा बुढ़ापा गुजारा इन्ही से होगा
पैसे कम कमाता हूँ, दोस्त ज्यादा बनाता हूँ ,
ये मानता हूँ ,
जब आएगी मुसीबत सहारा इन्हीं से होगा
सब कहते हैं बेअसूल हूँ, खोटा हूँ, फिजूल हूँ, फूल नही शूल हूँ
महफिलो का शौक नहीं मुझे, तन्हाई में जीना जानता हूँ,
ये मानता हूँ,
जब हो जाऊंगा बेकार इशारा इन्ही से होगा।

 


 

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