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महिला दिवस पर विशेष: ये हैं बॉलीवुड की टॉप 5 महिला गीतकार...

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली Updated Wed, 07 Mar 2018 08:44 PM IST
अनेक महिला लेख़कों, कवियित्रियों, और उपन्यासकारों के नाम हमें मुंह-ज़ुबानी याद हैं, अनेक क्षेत्रों के साथ-साथ लेख़न में भी महिलाओं ने हर आयाम को छूआ है लेकिन जब बात गीतकार के पेशे की आती है तो बामुश्किल ही दो नाम ज़हन में आएंगे। जबकि इस श्रेणी में भी महिलाओं ने अपना परचम लहराया है। 

आइए जानते हैं ऐसी महिला गीतकारों के नाम जिनके नग़मे फ़िल्मी दुनिया को एक नया मुकाम देते हैं।
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कौसर मुनीर... 

कौसर मुनीर एक प्रसिद्ध बॉलीवुड गीतकार हैं। इन्होंने बजरंगी भाईजान, डियर ज़िंदग़ी, सीक्रेट सुपरस्टार और पैडमेन जैसी कई सुपरहिट फ़िल्मों के गाने लिखे हैं। ये है इनका लिखा एक बेहतरीन गाना

फलक तक चल साथ मेरे 
फलक तक चल साथ चल 

ये बादल की चादर 
ये तारों के आँचल
में छुप जाएं हम पल दो पल 

देखो कहाँ आ गये हम सनम साथ चलते
जहाँ दिन की बाँहों में रातों के साये हैं ढलते 
चल वो चौबारे ढूंढें जिनमें चाहत की बूँदें 
सच कर दे सपनो को सभी 
आँखों को मीचे-मीचे 
मैं तेरे पीछे-पीछे 
चल दूँ जो कह दे तू अभी 
बहारों के छत हो 
दुआओं के ख़त हो 
बढ़ते रहे ये ग़ज़ल 
फलक तक चल साथ मेरे फलक तक चल साथ चल 

देखा नहीं मैंने पहले कभी ये नजारा 
बदला हुआ सा लगे मुझको आलम ये सारा 
सूरज को हुई हरारत 
रातों को करे शरारत 
बैठा है खिड़की पे तेरी 
इस बात पे चाँद भी बिगड़ा 
कतरा-कतरा वो पिघला 
भर आया आँखों में मेरी 
तो सूरज बुझा दूँ, तुझे मैं सजा दूँ
सवेरा हो तुझसे ही कल 
फलक तक चल साथ मेरे फलक तक चल साथ चल

अन्विता दत्त गुप्तन...

अन्विता ने नील एंड निक्की, दोस्ताना, लक, टशन और हे बेबी जैसी कई फ़िल्मों में गाना लिखा है। वह यशराज फ़िल्म्स के मुख्य लेख़कों में से एक हैं। 
क्वीन फ़िल्म में लिखा उनका यह गाना बेहद ख़ूबसूरत है।

 ढूंढे हर इक सांस में, डुबकियों के बाद में
हर भंवर के पास
किनारे
बह रहे जो साथ में, जो हमारे खास थे
कर गये अपनी बात
किनारे

गर माझी सारे साथ में
गैर हो भी जायें
तो खुद ही तो पतवार बन
पार होंगे हम
जो छोटी सी हर इक नहर
सागर बन भी जाये
कोई तिनका लेके हाथ में
ढूंढ लेंगे हम किनारे
किनारे, किनारे...

खुद ही तो हैं हम, किनारे
कैसे होंगे कम, किनारे
हैं जहाँ हैं हम, किनारे
खुद ही तो हैं हम
हाँ, खुद ही तो हैं हम

औरों से क्या, खुद ही से पूछ लेंगे राहें
यहीं कहीं, मौज़ों में ही, ढूंढ लेंगे हम
बूँदों से ही तो है वहीं, बांध लेंगे लहरें
पैरों तले जो भी मिले, बाँध लेंगे हम
किनारे, किनारे, किनारे...

प्रिया पांचाल...

प्रिया सराईया ने सिमरन, हसीना पार्कर, एबीसीडी और भूमि जैसी कई फ़िल्मों के गाने लिखे हैं। रमैया वस्तावैया का यह गाना ख़ासा प्रसिद्ध हुआ था।

जीने लगा हूं पहले से ज्यादा
पहले से ज्यादा तुमपे मरने लगा हूं मैं मेरा दिल और तुम हो यहां
फिर क्यूं हो पलके झुकाये वहां
तुम सा हसीं पहले देखा नहीं
तुम इससे पहले थे जाने कहां
जीने लगा हूं पहले से ज्यादा
पहले से ज्यादा तुमपे मरने लगा हूं रहते हो आके जो तुम पास मेरे
थम जाये पल ये वही बस मैं ये सोचूं
सोचूं मैं थम जाये पल ये पास मेरे जब हो तुम
सोचूं मैं थम जाये पल ये पास मेरे जब हो तुम
चलती है सांसे पहले से ज्यादा
पहले से ज्यादा दिल ठहरने लगा तन्हाईयों में तुझे ढूंढे मेरा दिल
हर पल ये तुझको ही सोचे भला क्यूं
तन्हाई में ढूंढे तुझे दिल, हर पल तुझको सोचे
तन्हाई में ढूंढे तुझे दिल, हर पल तुझको सोचे
मिलने लगे दिल पहले से ज्यादा
पहले से ज्यादा इश्क होने लगा जीने लगा हूं पहले से ज्यादा
पहले से ज्यादा तुमपे मरने लगा हूं

पद्मा सचदेव...

पद्मा सचदेव ने फ़िल्मी गीतों के साथ साथ कवि और उपन्यास भी लिखे हैं, वह डोगरी भाषा की पहली आधुनिक महिला कवियित्री हैं। वह पद्मश्री से सम्मानित हैं, उन्होंने साहस, प्रेम बारात और आँखों देखी के गाने लिखे हैं।
यह एक गाना उन्होेंने फ़िल्म आँखों देखी में लिखा था।

सोना रे तुझे कैसे मिलूं
कैसे कैसे मिलूं
सोना रे तुझे कैसे मिलूं
कैसे कैसे मिलूं
अम्बुआ की बगिया
झरना के नदिया कहा मिलूं
तुझे कैसे मिलूं
कैसे कैसे मिलूं

घिरे रे घीरे रे
बदरवा करे करे
करे करे करे करे
डारे रे डारे रे अंचरा के रंग
सरे सरे सरे सरे
रंग रंगा दुगा ऐसा
कभी जो न छूटे
गजरा ला दूंगा ऐसा
कभी जो न टूटे

रूपा तुझे कैसे मिलूं
कैसे कैसे मिलूँ
रूपा तुझे कैसे मिलूं
कैसे कैसे मिलूं

तहमी रे तहमी रे
नादिया की देखो
धरा धरा धरा धरा
दोहड़ा रे दोहड़ा रे
प्यासा नदी का किनारा
किनारे किनारे किनारे
गगरी में राजा भरु
नदिया का पानी
माटी के बंधन में
डोले पहाड़ों की रानी
सोना रे तुझे कैसे मिलूं
कैसे कैसे मिलूं
रूपा तुझे कैसे मिलूं
कैसे कैसे मिलूं
अम्बुआ की बगिया
झरना के नदिया कहा मिलूं
तुझे कैसे मिलूं
कैसे कैसे मिलूं

इंदु जैन...

इंदु जैन ने चश्मे बद्दूर, स्पर्श और कथा जैसी फिल्मों के गाने लिखे हैं। उनका लिखा गाना कहाँ से आए बदरा बहुत ही ख़ूबसूरत लिखा गया है।

कहाँ से आए बदरा
घुलता जाए कजरा
कहाँ से आए बदरा
घुलता जाए कजरा

पलकों के सतरंगे दीपक
बन बैठे आँसू की झालर
मोती का अनमोलक हीरा
मिट्टी में जा फिसला
कहाँ से आए बदरा...

नींद पिया के संग सिधारी
सपनों की सूखी फुलवारी
अमृत होठों तक आते ही
जैसे विष में बदला
कहाँ से आए बदरा...

उतरे मेघ या फिर छाए
निर्दय झोंके अगन बढ़ाए
बरसे हैं अब तोसे सावन
रोए मन है पगला
कहाँ से आए बदरा...

 

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