सुनो बाग के सबसे सुंदर फूलों तुम हम फूलों को इन नजरों से मत देखो गाने वालों की अपनी मजबूरी है हिरणों की बेचैनी ही कस्तूरी है जिनका घर चलता है जिनके पैरों से उन पैरों में घुंघरू बहुत जरूरी है बारह साल का लड़का चलता रस्सी पर बना हुआ है अपने घर की छत देखो तुम पर टिकती हैं दुनिया भर की नजरें हम पर भूली भटकी तितली आती है संघर्षो में सम्मोहन चुक जाता है जैसे आती हैं वैसे उड़ जाती हैं हम फूलों को कोई देवी नही मिली गिरकर सूख गए , कैसी किस्मत देखो अभिनय वाला अपने आंसू पी पीकर आड़ी तिरछी शक्लें खूब बनाता है बड़े बड़े हँसकर भी न कर पाते जो जोकर होकर रोकर वो कर जाता है रामायण में सिर्फ राम ही राम नही कुशासनो पर सोये हुए भरत देखो साभार : स्वयं श्रीवास्तव की फेसबुक वाॅल से |