केके बिड़ला फाउंडेशन ने घोषणा की है कि लेखक मधु कांकरिया को उनके वर्ष 2018 में प्रकाशित उनके उपन्यास ‘हम यहां थे’ के लिए 31वें बिहारी पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बिहारी पुरस्कार 1991 में फाउंडेशन द्वारा स्थापित तीन साहित्यिक पुरस्कारों में से एक है। प्रसिद्ध कवि बिहारी के नाम पर, राजस्थानी लेखकों को प्रति वर्ष यह पुरस्कार दिया जाता है। सम्मान स्वरूप ₹2.5 लाख, एक पट्टिका और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है।
मधु कांकरिया का उपन्यास ‘हम यहां थे’ झारखंड के आदिवासियों के संघर्ष पर आधारित है। यह उपन्यास कोलकाता की संस्कृति, समाज और आर्थिक स्थितियों के बारे में भी जानकारी प्रदान करता है। मधू कंकरिया की प्रकाशित पुस्तकों में पट्टाखोर, खुले गगन के लाल सितारे, सलाम आखिरी और भारी दुपहर के अंधेरे शामिल हैं।
इसके पूर्व मधु कांकरिया को कथकराम पुरस्कार, हेमचंद्र स्मृति साहित्य सम्मान, विजय वर्मा कथा सम्मान और प्रथम विद्या साहित्य सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।
पिछले 10 वर्षों में हिंदी या राजस्थानी में किसी राजस्थानी लेखक द्वारा प्रकाशित उत्कृष्ट कार्य के लिए बिहारी पुरस्कार हर साल प्रदान किया जाता है। प्राप्तकर्ता का चयन अध्यक्ष ओम थानवी की अध्यक्षता वाली चयन समिति द्वारा किया गया। जूरी के अन्य सदस्य थे हेमंत शेष, मुरलीधर वैष्णव, अलका सरावगी, हरिराम मीणा और डॉ सुरेश रितुपर्णा। डॉ रितुपर्णा केके बिड़ला फाउंडेशन के निदेशक हैं। पहला बिहारी पुरस्कार 1991 में डॉ जय सिंह नीरज को उनकी कविता धनी का आदमी के लिए दिया गया था। बिहारी पुरस्कार के अलावा, सरस्वती सम्मान और व्यास सम्मान फाउंडेशन द्वारा स्थापित साहित्यिक पुरस्कार हैं।