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जमेगी अदब और इल्म की महफ़िल, साहित्य और सिनेमा जगत के कलाकार जीतेंगे लोगों का दिल

Tue, 05 Nov 2019 06:40 PM IST
Trainee Trainee अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली
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'जश्न-ए-अदब' 2019 को लेकर हुई प्रेस वार्ता - फोटो : अमर उजाला
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'जश्न-ए-अदब' के संस्थापक सचिव कुंवर रंजीत चौहान ने साहित्योत्सव को समय की मांग बताते हुए आज एक प्रेस वार्ता की। जिसमें उन्होंने 'जश्न-ए-अदब' की विशेषता और साहित्योत्सव 2019 के कार्यक्रमों के बारे में बताया।

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साहित्य के प्रेमी जिस महोत्सव की प्रतीक्षा करते रहते हैं 8, 9 और 10 नवंबर की तीनों तिथियों को सुरक्षित कर लीजिये क्योंकि आ रहा है 'आठवें साहित्योत्सव' का दूसरा चरण। समय हर क्षण के साथ हमें उस दिन की दिशा में ले जा रहा है जब जामिया हमदर्द, दिल्ली में इल्म, फ़न, तहज़ीब, अदब के रंगों से हर बरस की तरह 'जश्न-ए-अदब' आपके लिए सजा रहे हैं ऐसी यादगार रंगोली जिसके रंग आपके ज़हन में हमेशा के लिए छाप छोड़ देंगे।

रूह को ताज़ा और दिल को शाद कर देने वाले इस माहौल में आपको एक ऐसी दुनिया मिलेगी जो नई भी लगेगी और अपनी भी। साहित्योत्सव की तैयारियां शिद्दत से हो रहीं हैं। तहज़ीब की गरिमा के साथ संस्कृति का नाज़ बढ़ रहा है, फिर एक बार 'जामिया हमदर्द' और 'जश्न-ए-अदब' ऐसे मिलेंगे जैसे गंगा और जमुना। दर-असल 'जश्न-ए-अदब' की सभ्यता ही ये है कि यहां साहित्य और सृजनिता का अद्भुत और असाधारण संगम होता है। जिसे अविस्मरणीय अनुभव बना देना ही हमारा संकल्प है।
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कुंवर रंजीत चौहान जो ख़ुद एक मक़बूल शायर हैं। पूरी दुनिया में अपनी मोतबर और मुख़्तलिफ़ शायरी के लिए बुलाए जाते हैं। उन्होंने लगभग 10 बरस पहले अपनी अच्छी-खासी नौकरी को अलविदा कहकर साहित्य की सेवा में अपने हिस्से का सहयोग देने का संकल्प लिया और उसका परिणाम ये है कि साहब दिल्ली में तीन दिनों के लिए एक छोटा-सा हिंदुस्तान बसाने की बड़ी-सी कोशिश करते हैं।

और इस बड़ी कोशिश का बड़ा और क़ामयाब नतीजा है कि ये नाम  'जश्न-ए-अदब' नामवर हो चुका है। जामिया हमदर्द के वी सी सय्यद एहतेशाम हसनैन साहब की साहित्योत्सव में सदा ही एक प्रेरणास्पद भूमिका रही है, ये उन्हीं की सोच थी कि यूनिवर्सिटी कैंपस में कार्यक्रम के आयोजन से न सिर्फ युवाओं को अपनी सांझी विरासत से जुड़ने का मौका मिलेगा बल्कि आने वाले समय में इस तरह के और आयोजन करने की प्रेरणा भी मिलेगी।

'जश्न-ए-अदब' के इस तीन तीनों के महोत्सव में हर बार की तरह देश-विदेश से कलाकार, साहित्यकार, रंगकर्मी, संगीतकार, गायक और हिंदी व उर्दू ज़बानों में काम करने वाले सभी श्रेष्ठतम लोग शामिल होते हैं। इस बरस भी फिल्म, मीडिया, थिएटर, कविता, संगीत, गायन सभी क्षेत्रों के कलाकार अपनी कला के दर्शन और प्रदर्शन से जश्न में चार चाँद लगाने वाले हैं।

पहले दिन के कार्यक्रम

पहले दिन 8 नवंबर को उद्घाटन के अवसर पर श्री एन एन वोहरा साहब द्वारा 'जश्न-ए-अदब' के अवार्ड्स दिए जाएंगे जिसके बाद व्यंग्य-संध्या के कार्यक्रम में पद्मश्री अशोक चक्रधर एवं श्री सुरेंद्र शर्मा द्वारा एक विशेष चर्चा होगी।

पहले दिन के कार्यक्रम की रुख़सती आपके कानों में डॉ. राधिका चोपड़ा की मधुर आवाज़ के साथ होगी।   
 

दूसरे दिन के कार्यक्रम

दूसरे दिन 9 नवंबर को मेन स्टेज, कन्वेंशन हॉल ऑडिटोरियम और लॉन स्टेज में कुल मिलाकर लगभग 20 इवेंट्स होंगे जिनमें ओपन माइक के साथ थियेटर और सिनेमा भी शामिल हैं। जहाँ श्री पियूष मिश्रा अपने बैंड बल्लीमरान के साथ, श्री राजपाल यादव, श्री यशपाल शर्मा के साथ जनाब राना सिद्दीक़ी साहब गुफ़्तगू करेंगे। नायाब नावेद में मुलाक़ात होगी आर जे नावेद से और लुत्फ़ मिलेगा आलमी नशिस्त का, पीयूष मिश्रा साहब के बैंड का मज़ा आएगा संगीत की रंगों के साथ और ख़वातीन का मुशायरा महका देगा दिलों में ख़ुशबू।

राजभाषा का भविष्य और इल्म से फ़िल्म जैसे कार्यक्रम होंगे बेहद दिलचस्प और आप गोते लगाएंगे ज्ञान की गंगा में। बुक रिलीज़ और फिर शाम-ए-सूफ़ियाना ले जाएगी आपको कविता सेठ जी की सुरीली आवाज़ के साथ। फ़ूड कोर्ट में ज़ायक़ा हिंदुस्तान का देगा आपको बेहतरीन लज़्ज़त जो आपके अनुभव को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। 

तीसरे दिन के कार्यक्रम

तीसरे दिन 10 नवंबर को लगभग 21 इवेंट्स होंगे जिनमें 'ओपन माइक' के साथ 'बैत बाज़ी' और 'हमदर्द का बदलता स्वरुप' होंगे चर्चा का विषय। आपके प्रिय नीलेश मिसरा होंगे 'आवाज़ दिखाई देती है' में और 'गुरुनानक से महात्मा गाँधी तक' का सफ़र तय होगा फ़रहत अहसास और संजीव जोहरी के साथ।

'सिनेमा एक आइना' में आपके चहेते राजीव खंडेलवाल, नीलेश मिसरा, राजपाल यादव, रवि राय से गुफ़्तगू करेंगी अफ्शा अंजुम साहिबा। 'ग़ालिब कौन है' नाम का प्ले आपके लिए ज़िंदा कर देगा ग़ालिब की दुनिया को फिर एक बार और दो ज़बान एक हिंदुस्तान में आप राना सिद्दीक़ी साहब के साथ डॉ. राहत इंदौरी और डॉ. अशोक चक्रधर से मिलेंगे। 

आपको शाद कर देने के लिए यूथ मुशायरा और मुशायरा और कवि सम्मलेन होंगे जो आपकी यादों में महफूज़ हो जाएंगे। आपके लुत्फ़ को दोगुना करने के लिए बुक रीडिंग और बुक रिलीज़ का सिलसिला रहेगा। सुप्रसिद्ध अभिनेता धर्मेंद्र जी क्लोजिंग सेरेमनी करेंगे। साबरी ब्रदर्स की क़व्वाली के सुर आप अपने लबों पर सजाकर साथ ले जाएंगे ।
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कुंवर रंजीत चौहान के अनुसार नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और सभ्यता से परिचित होने और जुड़ने का यह सबसे सुंदर रास्ता है।

कार्यक्रम के बारे में और जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। 
https://www.amarujala.com/jashn-e-adab

 
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