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हिंदी हैं हम वेबिनार: जुड़िए, मशहूर अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं के साथ थोड़ी देर में

Fri, 07 Oct 2022 05:21 PM IST
रत्नेश मिश्र अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली
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हिंदी हैं हम - फोटो : amar ujala
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एक प्रमुख हिंदी समाचार पत्र होने के नाते अमर उजाला भाषा के गौरव को फिर से जगाना और बढ़ाना चाहता है और लोगों के जीवन में इसका सार वापस लाना चाहता है, जिनके लिए यह उनकी संस्कृति में गहराई से निहित है। इसलिए अमर उजाला ने "हिंदी- अपनों की भाषा, सपनों की भाषा - हिंदी हैं हम" नाम से एक पहल शुरू की है। अभियान का नाम ही इसकी समृद्धि को दर्शाता है। 
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दरअसल, भारत में हिंदी सबसे व्यापक रूप से बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है, जहां लगभग 61.5 करोड़  लोग इस भाषा का उपयोग करते हैं। हिंदी भाषा इतनी लोकप्रिय है कि गूगल और फेसबुक जैसे वैश्विक दिग्गजों को लगातार बढ़ते बाजार को पूरा करने के लिए भाषा उपकरणों में निवेश करना पड़ा है। इस दौड़ में हालिया शामिल होने वाला वैश्विक खिलाड़ी नेटफ्लिक्स है, जो उपयोगकर्ता की सुविधा के लिए अपना पूरा इंटरफेस हिंदी में लॉन्च कर रहा है। 

हिंदी भाषा का प्रभाव और महत्व इतना प्रबल रहा है कि दुनिया भर के विभिन्न देशों में लोगों ने इसका अध्ययन करना शुरू कर दिया है। जैसे अंग्रेजी दुनिया को बांधती है, वैसे ही हिंदी एक ऐसा सेतु है जो दुनिया भर के लोगों को जोड़ता है। 
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दुनिया भर में कई ऐसे लोग हैं जो विदेशों में भाषा और साहित्य के माध्यम से भारत की संस्कृति को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए समर्पित रूप से काम कर रहे हैं। वे युवा पीढ़ी को इसके साहित्य और विश्वासों में निहित भारत की संस्कृति को सीखने में मदद कर रहे हैं। अलग-अलग देशों के ऐसे लोग जो भारत से नहीं हैं या कभी भारत नहीं आए हैं, हिंदी सीखने के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हैं।

एक ऐसी भाषा जिसमें हम सपने देखते हैं क्योंकि यह हमारी संवेदनाओं को शब्द देती है और हमारी अभिव्यक्ति को जीवंत करती है। हिंदी: अपनों की भाषा, सपनों की भाषा: पढ़ें, बोलें, सीखें। गर्व करें। यह अभियान हिंदी भाषा के महत्व को बढ़ाने के लिए हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है और भाषा के प्रति प्रेम के माध्यम से परिवारों को जोड़ने का एक अच्छा तरीका है। इसी अभियान को आगे बढ़ाते हुए अमर उजाला 7 अक्टूबर 2022 को शाम 5.30 बजे एक वेबिनार आयोजित कर रहा है, जिसमें राष्ट्रीय- अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध हिंदी के विद्वान भाग ले रहे हैं। 

रिचर्ड डिलेसी, हारवर्ड विश्वविद्यालय

रिचर्ड डिलेसी हारवर्ड विश्वविद्यालय में हिंदी-उर्दू के अध्ययन-अध्यापन का कार्य पिछले सोलह सालों से कर रहे हैं। रिचर्ड मूलत: ऑस्ट्रेलिया के नागरिक हैं, इन्होंने मेल्बोर्न शहर में स्नातक की पढ़ाई के दौरान 3 साल हिंदी का अध्ययन किया फिर ऑस्ट्रेलिया लौटकर इतिहास में एम ए की उपाधि प्राप्त की। आगे की पढ़ाई यूएस के यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में साउथ एशियन स्टडीज में, विशेष रूप से आधुनिक हिंदी उपन्यास विषय पर अपनी पीएचडी की थीसिस लिखी। इसके अलावा दिल्ली के केंद्रीय हिंदी संस्थान में रिचर्ड ने अध्ययन किया है। अपना अधिकतम समय दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में बिताते हैं। 
 
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प्रोफेसर एल्मर जोसेफ, कोपेनहेगन विश्वविद्यालय, डेनमार्क

इनके अलावा कोपेनहेगन विश्वविद्यालय, डेनमार्क से जुड़े एल्मर जोसेफ रेनर भी वेबिनार में भाग ले रहे हैं।  एल्मर जोसेफ कोपेनहेगन विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं और हिंदी भाषा के अध्ययन-अध्यापन व प्रचार- प्रसार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। 2008 में केंद्रीय हिंदी संस्थान, दिल्ली से उच्चस्तरीय डिप्लोमा करने के बाद 2009 से शिक्षण क्षेत्र में सक्रिय हुए। 2009 में म्यूनिक यूनिवर्सिटी, जर्मनी, 2010 में लिपजिग यूनिवर्सिटी में पढ़ाने के बाद 2011 से 13 तक जर्मनी के बॉन विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य किया। 2013 से कोपेनहेगन विश्वविद्यालय, डेनमार्क से जुड़े हुए हैं। हिंदी पाठ्यक्रमों को लेकर इन्होंने एक प्रोग्राम तैयार किया और 2014 में कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के बेस्ट टीचर सम्मान से नवाजे गए। 

इस वेबिनार को फेसबुर और यूट्यूब पर भी देखा जा सकता है, लिंक नीचे दिए गए हैं...

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यूट्यूब- youtube.com/user/NewsAmarujala
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