इस किताब में हरित ऊर्जा के भयावह सच को उजागर किया गया है, जिसकी कीमत गरीब देश चुका रहे हैं। किताब सोचने पर मजबूर करती है कि फोन, इलेिक्ट्रक कार इत्यादि में प्रयुक्त धातुओं की होड़ ने दुनिया को कहां ला खड़ा किया है।
जब आप अपने स्मार्टफोन की स्क्रीन पर अपनी उंगलियां फेरते हैं या अपनी बिना आवाज वाली इलेक्ट्रिक कार को सड़क पर चलाते हैं, तो आपको एक साफ और आधुनिक भविष्य की झलक मिलती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस चमक के पीछे कितनी कालिख छिपी है? निकोलस नियार्कोस की हालिया प्रकाशित किताब द एलीमेंट्स ऑफ पावर : ए स्टोरी ऑफ वॉर, टेक्नोलॉजी, एंड द डर्टिएस्ट सप्लाई चेन ऑन अर्थ इसी चमकते हुए भ्रम के पर्दे को हटाकर उसके पीछे की स्याह हकीकत को उजागर करती है। जिस हरित ऊर्जा को दुनिया बचाने का जरिया माना जा रहा है, उसकी कीमत सबसे गरीब देशों के लोग अपने खून-पसीने से चुका रहे हैं।
किताब के जरिये नियार्कोस हमें एक ऐसी वैश्विक यात्रा पर ले जाते हैं, जो बेहद असहज करने वाली है। वह पाठकों को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की उन अंधेरी खदानों में ले जाते हैं, जहां 'आर्टिसनल माइनर्स' (छोटे खनिक), जिनमें मासूम बच्चे भी शामिल हैं, अपनी जिंदगी जोखिम में डालकर नंगे हाथों से उस कोबाल्ट को निकालते हैं, जो आधुनिक उपकरणों की जान है। वह बेहद दिलचस्प ढंग से समझाते हैं कि कैसे चीनी कंपनियों ने शांत तटीय इलाकों को एक ऐसे औद्योगिक नरक में बदल दिया है, जहां विशाल प्रोसेसिंग प्लांट दिन-रात धुआं उगल रहे हैं और किसान अपनी उपजाऊ जमीन को बर्बाद होते देखने के लिए विवश हैं।
किताब में न सिर्फ घटनाओं के कालक्रम को बड़ी ही नजाकत के साथ उकेरा गया है, बल्कि लेखक का उद्देश्य पाठकों को यह एहसास दिलाना भी है कि हमारे द्वारा अपनाए गए तकनीकी विकल्प किसी न किसी भू-रणनीतिक खेल के हिस्से हैं। इस किताब की सबसे बड़ी ताकत इसकी खोजी रिपोर्टिंग और जमीनी किस्सों की गहराई में है। लेखक ने कई बार जोखिम उठाकर सूत्रों से बात की, और यही साहस पाठक को उन जगहों तक ले जाता है, जहां आमतौर पर असल कहानी नहीं पहुंच पाती। लेखक हमें कभी 1970 के तेल संकट में ले जाते हैं, तो कभी देंग शियाओ पिंग के आर्थिक सुधारों की गलियों में।
वह बताते हैं कि हमारी हर सुख-सुविधा की एक कीमत होती है, जो अक्सर दुनिया के सबसे गरीब देशों द्वारा चुकाई जाती है। अंत में, नियार्कोस एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठाते हैं कि क्या यह उद्योग जलवायु परिवर्तन का समाधान है या एक नई महामारी?
वह स्वीकार करते हैं कि खनन को पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है, क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने के लिए इलेक्ट्रिक क्रांति की जरूरत है। वह 'पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार खनन' की वकालत तो करते हैं, लेकिन इसे कैसे लागू किया जाएगा, इस पर किताब मौन है। अगर आप वैश्विक राजनीति, पर्यावरण और तकनीक के आपसी रिश्तों को समझना चाहते हैं, तो यह किताब आपको जरूर पढ़नी चाहिए। साथ ही, यदि आप यह जानने में दिलचस्पी रखते हैं कि अगली सदी का युद्ध किन तत्वों के लिए लड़ा जाएगा, तो यह किताब आपकी लाइब्रेरी का हिस्सा होनी चाहिए।
द एलीमेंट्स ऑफ पावर : ए स्टोरी ऑफ वॉर, टेक्नोलॉजी, एंड द डर्टिएस्ट सप्लाई चेन ऑन अर्थ
(लेखक : निकोलस नियार्कोस)
प्रकाशक : पेंगुइन रैंडम हाउस
मूल्य : 2,934.22 रुपये (हार्डकवर)