समस्या को स्पष्ट करें
त्वरित और सही निर्णय के लिए पहले समस्या और लक्ष्य को स्पष्ट करें, यानी यह समझें कि फैसला किस बारे में है और सफलता कैसी दिखेगी। इसके लिए खुद से कुछ सवाल पूछें कि आप क्या हासिल करना चाहते हैं, इसका असर क्या होगा, समय सीमा क्या है, जोखिम कितने हैं और क्या आपके संसाधन पर्याप्त हैं। ये सवाल संतुलित सोच में मदद करते हैं। इसके बाद निर्णय के प्रभाव का आकलन करें। यदि प्रभाव कम हो, तो अधिक समय गंवाने के बजाय जल्दी फैसला लें, ताकि महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए समय बच सके।
अत्यधिक शोध में उलझने से बचें
सही निर्णय के लिए आवश्यक जानकारी जल्दी और प्रासंगिक रूप से एकत्र करें, लेकिन अत्यधिक शोध में उलझने से बचें। अपने लक्ष्य के अनुसार स्पष्ट मानदंड तय करें, जैसे लागत, गति या गुणवत्ता में से क्या सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। फिर संभावित विकल्पों की सूची बनाकर उन्हें छांटें और उन विकल्पों को हटा दें, जो तय मानदंडों पर खरे नहीं उतरते या जिनमें बड़े जोखिम और नुकसान हों।
अपनी समझ को महत्व दें
फैसला लेते समय सिर्फ आंकड़ों और तथ्यों पर ही निर्भर न रहें, बल्कि अपने अनुभव और भीतर की समझ (अंतर्ज्ञान) को भी महत्व दें। जब एक बार निर्णय ले लिया जाए, तो उस पर पूरे मन से अमल करें और बार-बार उसी पर सोचकर काम को न रोकें। बाद में उसके नतीजों को शांति से देखें, उनसे सीख लें और उसी सीख के आधार पर आगे और जल्दी व आत्मविश्वास के साथ बेहतर फैसले लेने की आदत विकसित करें।
भरोसेमंद लोगों से बात करें
अक्सर बहुत सारे विकल्प होने पर दिमाग उलझ जाता है और सही फैसला लेना मुश्किल हो जाता है। इसलिए यह तय करना जरूरी है कि आपके लिए 'पर्याप्त' यानी व्यावहारिक और समय पर लिया गया निर्णय कौन-सा है, न कि बिल्कुल उपयुक्त फैसला। अगर निर्णय मुश्किल लगे, तो एक-दो भरोसेमंद और अनुभवी लोगों से सलाह लेना मददगार हो सकता है।