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'आखिर अपनी कमाई से संतुष्ट क्यों नहीं हैं आप?'

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फ्रीलांस पत्रकार के तौर पर मुझे काफी समय ये सोचना पड़ता है कि मैं कितना पैसा कमा सकता हूं? क्या मुझे कुछ ज्यादा घंटे काम करना चाहिए या साल दर साल ज़्यादा पैसे कमाने के लिए मुझे अपने काम का शुल्क बढ़ा देना चाहिए।
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क्या मैं जितना अभी कमा रहा हूं उससे संतुष्ट हूं? जब में नौकरी कर रहा था और कंपनी के स्टाफ़ में था, तब भी स्थिति अलग नहीं थी- मैं अपने सहयोगियों से हमेशा अपनी सेलरी की तुलना करता रहता।

आप कितना कमा कर ख़ुश रह सकते हैं, ये ऐसा सवाल है जिससे आपको लगातार संघर्ष करना पड़ता है। हालांकि अमरीका की प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में 2010 के एक अध्ययन के मुताबिक अमरीका में रहते हुए यदि आपकी आमदनी 75 हज़ार डॉलर सालाना हो तो आप संतुष्ट रह सकते हैं।
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ज्यादा पैसा कमाने की चाहत क्यों है?

लेकिन मैंने ये जानने की कोशिश की कि लोग कैसे हमेशा ख़ुश रहते हैं या पूरी तरह नाख़ुश रहते हैं। भले ही उनकी कमाई जितनी भी हो। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि वेतन के प्रति सम्मोहित लोग कभी संतुष्ट भी हो पाते हैं? इसका जवाब बहुत आसान नहीं है।

इसराइल के इंटर डिस्पिलनरी सेंटर में मनोविज्ञानी बेन शहर ताल मानते हैं कि वेतन के बारे में हमारा ऑब्सेशन (जुनून) शायद हमारे जीन में ही शामिल है। अगर हमारे अतिरिक्त खर्चे को पूरा करने के लिए हमें भारी भरकम सेलरी की जरूरत नहीं भी हो, तो भी हममें ज़्यादा पैसे कमाने की चाहत होती ही है।

बेन शहर ताल कहते हैं, "हमारी प्रकृति बीते हज़ारों सालों में ज़्यादा नहीं बदली है। तबीयत से ही हम जमाखोर हैं। हमें ज़्यादा से ज़्यादा की जरूरत महसूस होती है ताकि वह हमारे भविष्य में काम आ सके।"

पैसों को महज एक टूल (औजार) के तौर पर देखें

अमरीकी रिसर्च इंस्टीच्यूट के एप्लायड पॉजिटिव रिसर्च इंस्टीच्यूट के संस्थापक मिशेल गाइलेन के मुताबिक ज्यादातर लोगों में अपने वेतन से असंतुष्ट होने की सबसे बड़ी वजह अपने सहयोगियों वेतन की लगातार तुलना करते रहना है। जिन लोगों को भरोसा होता है कि उन्हें उनके साथियों जितना ही वेतन मिल रहा है वे आम तौर पर ख़ुश होते हैं।

मिशेल कहती हैं, "लोग एक दूसरे से तुलना करने के प्रति काफी सजग रहते हैं। अगर उन्हें लगता है कि दफ़्तर में वे अपने किसी साथी से कम वेतन पाते हैं, तो वो असंतुष्ट हो जाते हैं।"

अमरीका के मेनियापोलिस के मेनेसोटा यूनिवर्सिटी के कार्लसन स्कूल ऑफ़ मैनजमेंट की प्रोफेसर कैथलीन वोहस कहती हैं कि लोगों को पैसों को महज एक टूल (औज़ार) के तौर पर देखना चाहिए, ना कि अपने सहयोगी के साथ मुकाबले करने के लिेए।

कैथलीन कहते हैं, "किसी के वेतन के साथ तुलना आसान है, क्योंकि पैसों को गिना जाता है। जीवन के दूसरे पहलुओं का मुकाबला इतना आसाना नहीं, क्योंकि उसमें गिनती करना मुश्किल है।"

तो फिर आप कभी संतुष्ट नहीं हो सकते

ताल के मुताबिक जो लोग संतुष्ट रहना चाहते हैं, उन्हें हमेशा ये देखना चाहिए कि उनके पास क्या क्या है, ना कि क्या क्या नहीं है। यह बहुत सामान्य सी बात है। दान दीजिए। जितना कुछ आपके पास है, उसके लिए आपको ईश्वर का आभार जताना चाहिए। आपके पास जितना कुछ है, वह आपको ज्यादा संतोष दे सकता है। अगर आपका अपने खर्च पर अंकुश है तो आप अपने मौजूदा वेतन में भी संतुष्ट रह सकते हैं।

गाइलेन के मुताबिक इंडस्ट्री के अंदर अपने सहयोगियों के साथ वेतन पर चर्चा से भी आपको ज्यादा संतोष मिल सकता है। डाटा और साफ्टवेयर फर्म पे-स्केल की एक रिसर्च के मुताबिक अगर कंपनी अपने कर्मचारियो को ये बता दे कि उन्हें किस आधार पर कितना वेतन मिल रहा है तो संतुष्टि ज़्यादा होती है।

अमरीका के सिएटल स्थित पे-स्केल के वाइस प्रेसिडेंट टिमोथी लॉ कहते हैं, "वेतन पैकेज को लेकर पारदर्शी बातचीत की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।" पारदर्शिता के अभाव में, कर्मचारियों में अपने और दूसरे सहयोगियों के वेतन को लेकर गलतफहमियां ज़्यादा होती हैं। लॉ कहते हैं, "जो वेतन मिलता है, उससे ज्यादा अहम उसके बारे में धारणा होती है। अगर आपको लगता है कि आपको कम वेतन मिल रहा है तो आप कभी संतुष्ट नहीं हो सकते।"

आप कितना कमा कर संतुष्ट हो सकते हैं, यह काफी कुछ हद तक आपके जीवन के कुछ दूसरे पहलुओं पर भी निर्भर होता है। गाइलेन के मुताबिक जो लोग अपने काम करने के बाद, काम से बाहर गुणवत्ता वाला समय बिताते हैं, उन्हें वेतन के कम, ज़्यादा होने की चिंता ज़्यादा नहीं होती।
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असली खुशी की ये है वजह

ज़्यादातर शोध यही बताते हैं कि आप कितना कमाते हैं, इसका आपकी ख़ुशी से बहुत ज्यादा लेना देना नहीं होता। ख़ुशी का बहुत ज़्यादा हिस्सा आपके जेनेटिक्स और दुनिया की गति पर निर्भर करता है।

गाइलेन कहती हैं, "वेतन पैकेज हमारे लिए क्या कर सकता है, उसका गंभीर मतलब है।" हालांकि बेहतर वेतन पैकेज की चाहत होने के अपने फ़ायदे भी हैं। कम वेतन होने के एहसास के चलते बहुत सारे लोग अपने करियर में बदलाव लाते हैं और अपने कार्यक्षेत्र में शानदार करते हैं, क्योंकि वेतन ही कर्मचारियों के मनोबल और काम करने के स्तर को बढ़ाता है।

वोहस कहते हैं, "पैसों के बारे में सोचते हुए लोग ज़्यादा से ज़्यादा काम करते हैं और बेहतर करते हैं।"
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