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कुछ ऐसी है यूपी के टॉपर की कहानी, पढ़कर आ जाएगा आंखों में पानी!

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'सपने उन्हीं के सच होते हैं जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौंसलों में उडान होती है।' इस कथन को सार्थक किया है बस्ती के रहने वाले सर्वेश शर्मा ने। सर्वेश ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में 96.83 फीसदी अंक लाकर प्रदेश टॉप किया है। परिवार की हालत ठीक न होने के बावजूद सर्वेश की मेहनत रंग लाई है। उनकी सफलता पर प्रस्तुत हैं बातचीत के अंश-
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:- कैसा लग रहा है सर्वेश?
:- सर, सोचा ही नहीं था कि मैं टॉप करूंगा। जिन हालात में मैंने पढाई की है, उन हालात को देखते हुए मुझे केवल अच्छे नंबरों की उम्मीद थी। हमारा गांव सहसगांव बस्ती जिले में है। मेरे पापा का नाम स्वामीनाथ है और वे एक किसान हैं। हमारे पास सिर्फ तीन बीघा जमीन है। उसी जमीन से परिवार का खर्च चलता है। मेरी पढ़ाई भी उसी से होती है। भैंस का दूध बेचकर पापा फीस की व्यवस्था करते थे। आज टॉप किया है तो मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने पापा का नाम रोशन किया है।

मोदी को अपना आदर्श मानते हैं सर्वेश

:- पढ़ाई कहां से कर रहे हैं?
:- मैं अपने गांव से 10 किलोमीटर दूर हर्रैया के गजोधर सिंह अंगद सिंह इंटर कॉलेज से पढ़ाई कर रहा हूं। रोजाना 10 किलोमीटर मैं साइकिल से स्कूल जाता हूं। घर मैं बड़ी बहन भी है। वो बीएससी कर रही है।

:- क्या करना चाहते हैं जीवन में?
:- मेरे पापा का सपना है कि मैं पढ़-लिख कर बड़ा अधिकारी बनूं। मुझे अपने पापा के सपनों को पूरा करना है। पापा का सपना पूरा करना अब मेरा सपना है। मैं परिवार को कष्टों से छुटकारा दिलाउंगा। आईएएस अधिकारी बनकर गड़बड़ सिस्टम को सुधारूंगा।

:- किससे प्रभावित हैं आप?
:- मैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अभिनेता अमिताभ बच्चन और क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को अपना आदर्श मानता हूं। ये तीनों लोग कभी नहीं थकते हैं। तीनों के पास जबरदस्त ऊर्जा है। इनकी ऊर्जा से ही मैं प्रभावित हूं।
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'हालात को कोसें नहीं, बल्कि सामना करें'

:- पढ़ाई के अलावा क्या पसंद है आपको?
:- पसंद काफी कुछ है लेकिन हमारे परिवार की हालत के आगे सब बेकार है। क्रिकेट खेलना मुझे पसंद है। पढ़ाई करने के बाद कुछ समय निकालकर मैं क्रिकेट खेलता हूं।

:- सफलता का श्रेय किसको देंगे?
:- मैं अपनी सफलता का श्रेय सबसे पहले अपने पापा को दूंगा। इसके अलावा मैं अपने प्रधानाचार्य सुभाष त्रिपाठी को भी इस सफलता का श्रेय देना चाहूंगा।

:- छात्रों के लिए कोई संदेश
:- हां, मैं ग्रामीण छात्रों के लिए कुछ कहना चाहता हूं। प्रतिभा सुविधाओं की मोहताज नहीं होती है। मेहनत करो, आपकी मेहनत का परिणाम जरूर मिलेगा। टॉप करना जरूरी नहीं, जरूरी है सफलता पाना। इसलिए अपने परिवार की हालत को कोसें नहीं, उसे सुधारने की दिशा में कदम उठाएं।
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