सदर तहसील क्षेत्र के सोनावां गांव निवासी किसान सीताराम तिवारी के छोटे बेटे ओमप्रकाश तिवारी ने आरओ/एआरओ(सहायक समीक्षा अधिकारी/ समीक्षा अधिकारी) भर्ती परीक्षा 2013 में यूपी में पहला स्थान प्राप्त किया है।
उन्होंने गांव के माहौल में रहकर संसाधनों के अभाव से लड़ते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की इस प्रतिष्ठित परीक्षा में यह सफलता हासिल की है। उनकी कामयाबी से पूरा परिवार खुशी से झूम उठा है।
अमर उजाला से बातचीत में ओमप्रकाश ने बताया कि सिविल सेवा तथा आयोग की भर्ती परीक्षाओं की वह लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं और इसी क्रम में आरओ/एआरओ परीक्षा 2013 में सम्मिलित हुए।
उनका कहना है कि लगातार कड़ी मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी में लगा रहा। जिसकी वजह से सफलता मिल सकी। बताया कि घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण बड़े शहरों में जाकर तैयारी नहीं कर सका।
रोजाना 6 घंटे करते थे पढ़ाई
घर पर ही रणनीति बनाकर परीक्षापयोगी किताबों का संकलन कर तैयारी की। घर के काम से समय मिलने के बाद सुबह-शाम छह घंटे पढ़ाई करता था। प्रतिदिन की समय सारिणी बनाकर तैयारी की।
उन्होंने कहा कि जो अभ्यर्थी संसाधन के अभाव में बड़े शहरों में जाकर कोचिंग नहीं कर सकते हैं, उन्हें निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि दोगुने उत्साह से अच्छी किताबों का संकलन करते हुए तैयारी करनी चाहिए। हां, यह जरूरी है कि तैयारी ईमानदारी से की गई हो।
सिविल सेवा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को नियमित समयसारिणी के आधार पर तैयारी करनी चाहिए। असफलता मिलने पर घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उन कमियों का पता लगाकर तैयारी में सुधार करना चाहिए।
घर पर रहकर ही की तैयारी
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ ने शनिवार की सुबह 11 बजे फोन कर ओमप्रकाश को समीक्षा अधिकारी भर्ती परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त करने की सूचना और बधाई दी। यह खबर सुनते ही अभिभावकों की आंखों से जहां खुशी के आंसू निकलने लगे वहीं सफलता मिलने पर ओमप्रकाश खुशी से झूम उठे।
सोनावां गांव निवासी सीताराम तिवारी के बड़े बेटे अशोक कुमार तिवारी वृजेंद्रमणि इंटर कालेज में प्रवक्ता हैं। जबकि छोटा बेटा ओमप्रकाश सिविल सेवा की तैयारी में लगा था। आरओ/एआरओ परीक्षा में सफलता से पूर्व उन्होंने समाजशास्त्र विषय से नेट के साथ राजस्व निरीक्षक परीक्षा में 16 वां स्थान प्राप्त किया था।
घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह घर पर ही रहकर तैयारी करते रहे। कई बार असफलताओं के बाद भी वह निराश नहीं हुए, बल्कि दोगुने उत्साह से तैयारी में लगे रहे। शनिवार की सुबह परीक्षा नियंत्रक ने उन्हें फोन कर सफलता की बधाई देते हुए सचिवालय में चयन होने की बात कही।