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कुवैत सरकार ने तैयार किया एक कानून का मसौदा, विदेशी लोगों को देश में काम करने की दी इजाजत

Thu, 30 Jul 2020 05:14 PM IST
Garima Garg जॉब डेस्क, अमर उजाला
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सरकार ने भारतीय कामगारों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। कुवैत की सरकार ने एक नया मसौदा तैयार किया है। जिसमें विदेशी लोगों को देश में काम करने की इजाजत से संबंधित कुछ नए नियम बनाए जा रहे हैं। भारतीय कामगारों के लिए अच्छी खबर यह है कि इस प्रस्तावित कानून के तहत कुवैत में काम करने वाले भारतीय लोगों के लिए 15 फ़ीसदी का कोटा तय किया गया है। हालांकि, यह कानून लागू हुआ तो करीब 8.5 लाख भारतीयों को वापस लौटना पड़ सकता है।
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नए कानून के तहत घरेलू कामगारों कॉरपोरेशन काउंसिल के सदस्य देशों के नागरिकों सरकारी खेतों में काम करने वाले लोगों राजनयिकों और कुवैती नागरिकों के रिश्तेदारों को कोटा सिस्टम से बाहर रखा जाएगा। बता दें कि कुवैत अपने नागरिकों और बाहर से आए लोगों के बीच रोजगार का संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। स्थानीय अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस कानून का मकसद दूसरे देश के लोगों को कुवैत में नौकरी हासिल करने से रोकना है। हालांकि, एक निश्चित संख्या में विदेशी लोगों को नौकरी करने और कंपनियों को नौकरी देने की छूट रखी जाएगी। कुवैत की नेशनल असेंबली में 50 सांसद चुनकर आते हैं। हालांकि, माना जाता है कि वहां अमीर भी फैसला लेने वाली भूमिका में है। उन्नीसवीं सदी के अंत से 1961 तक ब्रिटेन के संरक्षण में रहे कुवैत में भारतीयों का जाना लंबे समय से शुरू हो गया था। इस समय व्यापार से लेकर तकरीबन सारे क्षेत्रों में वहां भारतीय मौजूद हैं। कुवैती घरों में ड्राइवर, बावर्ची से लेकर आया तक का काम करने वाली की संख्या साढ़े तीन लाख तक बताई जाती है। लोगों का मानना है कि जल्दी-जल्दी में दूसरे लोगों से उनकी जगह पर पाना इतना आसान न होगा।

भारतीयों के लिए कोटा तो लागू लेकिन बड़ा झटका
इस नए कानून के तहत विदेशियों की भर्ती के लिए निर्वाचित कोटा से ज्यादा लोगों की भर्ती करने पर कंपनियों के अधिकारियों को जेल भेजे जाने और भारी जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है। इस कानून के तहत कुवैत में काम करने वाले भारतीय लोगों के लिए 15 फ़ीसदी कोटा तय किया गया है। इसके अलावा श्रीलंका, फिलीपींस मिस्त्र के लिए 10-10 फीसदी कोटा तय किया गया। जबकि बांग्लादेश पाकिस्तान नेपाल और वियतनाम के लिए पांच-पांच फीसदी कोटा तय किया गया है। फिलहाल इस कानून को मंजूरी के लिए कुवैत की मानव संसाधन विकास कमेटी के पास विचार के लिए भेजा गया है।
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45 लाख जनसंख्या में केवल 13 लाख कुवैती
ऐसा हो सकता है कि कानून लागू होने के बाद लोगों से जाने के लिए न कहा जाए और उन देशों से नियुक्ति तब तक रुकी रहेगी जब तक कि ये निर्धारित कोटा के अनुरूप न हो जाए। इस कानून के लागू होने के बाद रेत में रह रहे दस लाख भारतीयों में से करीब साढ़े आठ लाख लोगों को वापस लौटना पड़ सकता है या फिर सालों तक कुवैत में ही किसी भारतीय को नौकरी नहीं मिलेगी। कुवैत की कुल आबादी 45 लाख है जिसमें से मूल कुवैतियों की जनसंख्या महज तेरह साढ़े तेरह लाख ही है। यहां रहने वाले मिस्त्री फिलीपींस, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और दूसरे मुल्कों के प्रवासियों में सबसे अधिक भारतीय हैं।
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