हर साल 8 अक्टूबर को भारतीय वायु सेना दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश की वायु सेना की भूमिका, उपलब्धियों और उसके जवानों के साहस को याद करने का मौका होता है। भारतीय वायु सेना में कई तरह के पद होते हैं, लेकिन युवाओं के बीच पायलट बनने का सपना काफी खास होता है। लड़ाकू विमान उड़ाने से लेकर देश की हवाई सुरक्षा में भूमिका निभाने तक, पायलट की जिम्मेदारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। अगर आप भी भारतीय वायु सेना में पायलट बनना चाहते हैं, तो 12वीं के बाद आपके पास कुछ प्रमुख रास्ते हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये रास्ते कौन से हैं।
12वीं के बाद कौन सा रास्ता खुलता है?
12वीं के बाद भारतीय वायु सेना में पायलट बनने का प्रमुख रास्ता राष्ट्रीय रक्षा अकादमी यानी एनडीए है। इसके लिए उम्मीदवार को संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की एनडीए परीक्षा देनी होती है। वायु सेना के लिए 12वीं में भौतिक विज्ञान और गणित विषय होना जरूरी है। एनडीए की परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवार को सेवा चयन बोर्ड यानी एसएसबी की प्रक्रिया से गुजरना होता है। चयन होने पर खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में करीब तीन साल का प्रशिक्षण मिलता है। इसके बाद संबंधित उड़ान प्रशिक्षण पूरा करके उम्मीदवार वायु सेना में पायलट के रूप में आगे बढ़ सकता है।
स्नातक के बाद कौन सा मौका मिलता है?
अगर किसी उम्मीदवार ने 12वीं के बाद स्नातक की पढ़ाई पूरी कर ली है, तो उसके लिए भी भारतीय वायु सेना में पायलट बनने के रास्ते मौजूद हैं। इनमें संयुक्त रक्षा सेवा यानी सीडीएस परीक्षा और वायु सेना सामान्य प्रवेश परीक्षा यानी एएफसीएटी प्रमुख हैं। सीडीएस के जरिए वायु सेना की उड़ान शाखा में जाने के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी करनी होती है। वहीं एएफसीएटी के जरिए स्नातक उम्मीदवार उड़ान शाखा के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, हर भर्ती में आयु, शैक्षणिक योग्यता और अन्य शर्तें अलग हो सकती हैं, इसलिए आवेदन से पहले संबंधित आधिकारिक अधिसूचना देखना जरूरी है।
एएफसीएटी से कैसे बन सकते हैं पायलट?
एएफसीएटी भारतीय वायु सेना में अधिकारी बनने के प्रमुख प्रवेश मार्गों में से एक है। स्नातक उम्मीदवार इसके जरिए उड़ान शाखा के लिए आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के बाद एसएसबी जैसी आगे की चयन प्रक्रिया शामिल होती है। उड़ान शाखा के लिए उम्मीदवारों को शारीरिक और चिकित्सकीय मानकों को भी पूरा करना होता है। यहां केवल परीक्षा पास करना ही काफी नहीं होता। उम्मीदवार की मानसिक क्षमता, टीम के साथ काम करने की क्षमता, नेतृत्व क्षमता और अन्य जरूरी गुणों को भी जांचा जाता है। सफल उम्मीदवारों को आगे उड़ान प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है।
एसएसबी और मेडिकल जांच में क्या होता है?
एनडीए, सीडीएस या एएफसीएटी के जरिए आगे बढ़ने वाले उम्मीदवारों को सेवा चयन बोर्ड यानी एसएसबी की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। इसमें कई चरणों में उम्मीदवार की सोच, व्यक्तित्व, मानसिक क्षमता, समूह में काम करने की क्षमता और नेतृत्व जैसे गुणों को परखा जाता है। इसके बाद मेडिकल जांच भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। खासकर उड़ान शाखा के उम्मीदवारों के लिए स्वास्थ्य और आंखों से जुड़े मानक कड़े होते हैं। उम्मीदवार को वायु सेना के निर्धारित चिकित्सा और दृष्टि मानकों पर खरा उतरना होता है। इन सभी चरणों में सफल होने के बाद ही प्रशिक्षण के अगले चरण का रास्ता खुलता है।
पायलट बनने के लिए ट्रेनिंग कहां होती है?
चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवार को वायु सेना के निर्धारित प्रशिक्षण संस्थानों में उड़ान प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें शुरुआती उड़ान प्रशिक्षण के साथ आगे का उन्नत प्रशिक्षण भी शामिल होता है। डुंडीगल स्थित वायु सेना अकादमी वायु सेना के अधिकारियों के प्रशिक्षण से जुड़ा प्रमुख संस्थान है। प्रशिक्षण के दौरान उम्मीदवारों को विमान उड़ाने, हवाई संचालन, सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने जैसी जरूरी बातें सिखाई जाती हैं। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उम्मीदवार को उड़ान शाखा में अधिकारी के रूप में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। यानी पायलट बनने का सफर परीक्षा से शुरू होकर कठिन प्रशिक्षण तक जाता है।