बिरुदेव के पिता का बकरियों को चराने के पारंपरिक व्यवसाय
बिरुदेव के पिता सिद्धापा बारहवीं कक्षा तक पढ़े हैं लेकिन अपना जीवन बकरियों को चराने के पारंपरिक व्यवसाय में बिता दिया। आर्थिक तंगी की वजह से कई बार उसके पिता ने कोई और नौकरी करने की सलाह दी लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ा रहा। उसने परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत की और कई बार तो दिन में 22 घंटे तक पढ़ाई करता था। बिरुदेव के दोस्त ने जब यूपीएससी परीक्षा पास होने की सूचना दी तो माता-पिता और परिजन खुशी से झूम उठे।
पहले प्रयास में यूपीएससी में मिली सफलता
बीरप्पा हमेशा से भारतीय सेना में अधिकारी बनने का सपना देखते थे। यह प्रेरणा उन्हें अपने बड़े भाई से मिली, जो खुद भारतीय सेना में कार्यरत हैं। उन्होंने पुणे के एक इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक किया और सेना में जाने की पूरी कोशिश की, लेकिन कुछ कारणों से वह संभव नहीं हो सका।
सपना टूटा जरूर, लेकिन हौसला नहीं। इसके बाद बीरप्पा ने सिविल सेवा परीक्षा की ओर रुख किया। उन्होंने पूरे समर्पण और धैर्य के साथ तैयारी की और पहले प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली। अब उनकी इच्छा है कि उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में जगह मिले और वे समाज की सेवा कर सकें।
करीब 13 लाख में चुने गए 1,009
इस बार यूपीएससी परीक्षा के लिए करीब 13 लाख छात्रों ने आवेदन किया था। इनमें से सिर्फ 14,627 ही प्रारंभिक परीक्षा पास कर पाए। कुल 2,845 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। जिसमें कुल 1,009 उम्मीदवारों को विभिन्न सेवाओं में नियुक्त किया गया। शक्ति दुबे शीर्ष स्थान पर आई हैं। दूसरे स्थान पर हर्षिता गोयल और तीसरे स्थान पर डोंगरे अर्चित पराग हैं।