इस देश में टैटू यानी गोदना की परंपरा सदियों पुरानी है। कई संस्कृतियों में तो यह अनिवार्य रस्म की तरह है। आदिवासियों में शरीर पर गोदने को समृद्धि और सेहत से जोड़कर देखने की परंपरा रही है। अब तो टैटू फैशन का प्रतीक भी बन गया है लेकिन यही टैटू अगर किसी की नौकरी के आड़े आ जाए तो क्या हो। महाराष्ट्र के शोलापुर निवासी श्रीधर पखारे ने CISF के खिलाफ एक याचिका दायर की थी, क्योंकि बांह पर टैटू गुदा होने के कारण सीआईएसएफ ने उन्हें नौकरी देने से मना कर दिया था। इस मामले में सुनवाई करते हुए मुंबई उच्च न्यायालय ने कहा कि सीआईएसएफ टैटू की वजह से किसी को भी नौकरी देने से मना नहीं कर सकता है। न्यायालय ने कहा कि टैटू याचिकाकर्ता के अधिकारिक कर्तव्यों में हस्तक्षेप नहीं करेगा, यदि वह अन्य सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करता है।