याचिकाएं गलत प्रश्न के कारण दायर की गई थीं
इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता, जो अदालत की मदद के लिए नियुक्त किए गए थे, ने यूपीएससी के हालिया हलफनामे का हवाला दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने कहा कि याचिकाएं गलत प्रश्न के कारण दायर की गई थीं और उम्मीदवारों ने इससे कई साल गंवा दिए।
यूपीएससी ने हलफनामे में कहा था कि अंतिम उत्तर कुंजी परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद प्रकाशित की जाएगी। वहीं, प्रीलिम्स परीक्षा के बाद अस्थायी उत्तर कुंजी जारी की जाएगी। उम्मीदवारों को आपत्तियां या सुझाव देने का अवसर दिया जाएगा, जिन्हें तीन प्रामाणिक स्रोतों से समर्थित होना चाहिए।
यूपीएससी ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी आपत्तियों और सुझावों की जांच संबंधित विषय के विशेषज्ञों की टीम करेगी। इस टीम द्वारा अंतिम रूप दी गई उत्तर कुंजी ही प्रीलिम्स के परिणाम घोषित करने का आधार होगी।
जल्द से जल्द लागू होगी प्रक्रिया
यूपीएससी ने कहा कि वह इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द लागू करना चाहता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूपीएससी का यह निर्णय याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों का प्रभावी समाधान है और इससे आयोग के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी।
सिविल सर्विसेज परीक्षा सहित यूपीएससी कई परीक्षाएं आयोजित करता है और यह निर्णय उम्मीदवारों के लिए पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।